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291 लोग नहीं चाहते हैं कि याकूब को हो फांसी

Mon, 27 Jul 2015 01:13 PM IST
Updated Mon, 27 Jul 2015 01:13 PM IST
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291 people  written letter to the President, said  stayed yakub execution

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन के पक्ष में किए गए ट्वीट को लेकर देश की सियासत में वार-पलटवार का दौर शुरू हो गया।

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हालांकि बढ़ते बवाल को देखते हुए सलमान ने माफी मांगते हुए अपने ट्वीट वापस ले लिए। भाजपा ने याकूब की फांसी का विरोध करने वालों को न्यायपालिका और देश की न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने तथा आतंकवाद पर राजनीति न करने की नसीहत दी है।
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हालांकि भाजपा सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने सलमान के ट्वीट को निजी विचारों से जोड़कर देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक देश है और हर किसी को अपनी बात तथा राय रखने का हक है।
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इस बीच देश की 291 हस्तियों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर याकूब की फांसी पर रोक लगाने की मांग की है। याकूब को 30 जुलाई को नागपुर की सेंट्रल जेल में फांसी दी जा सकती है।

ये हैं वो नाम जो नहीं चाहते याकूब की फांसी

291 people  written letter to the President, said  stayed yakub execution

उधर देश की 291 जानीमानी हस्तियों ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पत्र लिखकर याकूब की फांसी पर रोक लगाने की मांग की है। राष्ट्रपति से पत्र को ही दया याचिका के रूप में स्वीकार करने का आग्रह करते हुए कहा गया है कि याकूब पिछले 20 वर्षों से सिजोफ्रेनिया से पीड़ित है और इस आधार पर वह फांसी के लिए शारीरिक रूप से अनफिट है।

पत्र लिखने वाली हस्तियों में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, बृंदा करात, भाजपा नेता शत्रुघ्न सिन्हा, कांग्रेस सांसद मणि शंकर अय्यर, वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी, प्रशांत भूषण, वरिष्ठ पत्रकार एन. राम, आनंद पटवर्धन, महेश भट्ट, नसीरुद्दीन शाह, मजीद मेमन, डी राजा, केटीएस तुलसी, एचके दुआ, टी सिवा, दीपांकर भट्टाचार्य, एमके रैना, तुषार गांधी, जस्टिस पानाचंद जैन, जस्टिस पीबी सावंत, जस्टिस एचएस बेदी, जस्टिस एच सुरेश,जस्टिस केपी सिवा सुब्रह्मण्यम, जस्टिस एसएन भार्गव, जस्टिस के चंद्रू, जस्टिस नागमोहन दास, वकील इंदिरा जयसिंह, इरफान हबीब, अर्जुन देव, डीएन झा, अरुणा रॉय और जॉन दयाल आदि हैं।

येचुरी ने कहा कि फांसी देना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। याकूब शारीरिक रूप से अस्वस्थ है। इसके अलावा आईबी के पूर्व अधिकारी ने माना है कि उसने भारतीय एजेंसियों की मदद की है। ऐसे में फांसी पर अंतिम फैसला लेने से पहले इस तथ्य पर भी गौर किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

291 people  written letter to the President, said  stayed yakub execution

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को याकूब की फांसी पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। अधिवक्ता टीआर अंध्यार्जिना ने अपनी याचिका में फांसी की सजा को चुनौती दी है।

मुख्य न्यायाधीश ने शुक्रवार को दायर इस याचिका को एक पीठ को सौंप दिया था। इस बीच रिटायर जस्टिस हरजीत सिंह बेदी ने कहा है कि अगर आईबी अधिकारी का लेख फैसले से पहले ही अदालत में रखा जाता तो याकूब को फांसी की सजा नहीं होती। हालांकि अब भी सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत अपने फैसले को बदलने का अधिकार रखता है।

याकूब की पत्नी ने कहा, नरमी दिखाए सरकार
याकूब की पत्नी राहिन मेमन ने न्यायपालिका और सरकार से गुहार लगाई है कि उसके पति की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए।

राहिन ने कहा है, ‘मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मैं भारत सरकार से याकूब को माफ करने की याचना करती हूं ताकि उसकी फांसी की सजा बदली जा सके। राहिन ने कहा कि उनके पति निर्दोष थे और उन्होंने अपनी इच्छा से अधिकारियों के सामने समर्पण किया था। ’उन्होंने कहा कि अगर याकूब की सजा बदलकर आजीवन कारावास कर दी जाती है तब भी उनको खुशी होगी।

राहिन ने कहा कि मेरी बेटी एक दिन भी याकूब के साथ नहीं रही है। वह याकूब के घर आने का इंतजार कर रही है ताकि उससे मिल सके।

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