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मराठवाड़ा में एक हफ्ते में 27 किसानों ने दे दी जान

Wed, 09 Dec 2015 04:16 PM IST
Updated Wed, 09 Dec 2015 04:16 PM IST
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27 farmers committed suicide in marathwada in one week

देशभर में शायद ये खबर मीडिया की सुर्खियां बनने से मोहताज रह जाए या शायद चेन्नई की बाढ़ के प्रति संवदेना जताते लोगों की निगाहें इस ओर न पड़ें लेकिन महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में एक हफ्ते में 27 किसानों ने इसलिए खुदकुशी कर ली क्योंकि सूखे के कारण उनकी फसलें तबाह हो चुकी थीं।

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गरीब किसानों और उनके परिवारों के सामने रोजी रोटी जाने के कारण भूखे मरने की नौबत आ चुकी थी। ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र में यह सिलसिला पहली बार हुआ है, बल्कि सूखे से जूझते मराठवाड़ा में इस साल एक हजार से ज्यादा किसान अपनी जान दे चुके हैं।
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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मराठवाड़ा में जान देने वाले किसानों का आंकड़ा मंगलवार शाम तक 1024 तक पहुंच चुका था। महाराष्ट्र के कृषि प्रधान मराठवाड़ा के आठ जिलों में यह हालात तब हैं जब राज्य की दमदार मंत्री और पूर्व केन्द्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे इसी क्षेत्र से प्रतिनिधि हैं।
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उनके निर्वाचन क्षेत्र बीड में ही सबसे ज्यादा 286 किसान आत्महत्या कर चुके हैं, जबकि नादेंड में 177 और ओसमानाबाद में 154 किसान सरकार से भी आखिरी आस टूटने के बाद मौत को गले लगा चुके हैं।

पंकजा मुंडे के जिले में सबसे ज्यादा किसानों ने की खुदकुशी

27 farmers committed suicide in marathwada in one week

हैरत की बात ये है कि महाराष्ट्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही शून्य खुदकुशी वाला जिले के तौर पर चुना है। हालांकि सरकार आज भी दावा करती है कि मौतों के इस आंकडे में केवल 630 किसानों ने ही फसल बर्बाद होने या सूखे के कारण जान दी है बाकी मरने वालों की अपनी निजी समस्याएं थीं।

हालांकि बीड़ के जिलाधिकारी नवल किशोर स्वीकार करते हैं किसानों की यह सामूहिक आत्महत्या उनकी टीम की विफलता के कारण है। वो कहते हैं, ''हां मौतों का आंकड़ा यह साबित करता है कि किसानों के लिए किए गए हमारे प्रयास काफी नहीं हैं।''

''लेकिन मैं साफ कर देता हूं कि हम अभी हारे नहीं हैं, हम अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहे हैं कि यह दर्दनाक आंकडा कुछ कम हो। हमें पूरा यकीन भी है ‌कि निकट भविष्य में इसमें कमी आएगी''।

हालांकि पंकजा मुंडे स्‍थानीय प्रशासन को दोष देने से इंकार करती हैं। उनके अनुसार ''वह इस समस्या को लेकर काफी चिंतित हैं।'' मात्र दो तालुका में ही हालात कुछ बेहतर हैं, बाकी के नौ तालुका पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

प्रशासन के सारी कवायद हो रही विफल

27 farmers committed suicide in marathwada in one week

वहीं बैंकों और सूदखारों की भूमिका पर जिलाधिकारी नवल किशोर का कहना है कि, किसानों की दुर्दशा के लिए बैंकों को दोष देना गलत है। यह सबकुछ फसल की बर्बादी के कारण हो रहा है।
 
जिला प्रशासन का कहना है कि वह डोर टू डोर सर्वे करा रहा है जिससे पीड़ित और तनावग्रस्त किसानों को चिह्नित किया जा सके। अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल उन्हें मनोवैज्ञानिकों की कमीं से जूझना पड़ रहा है। हमारे पास 11 तालुका हैं प्रत्येक तालुका के लिए तीन मनोवैज्ञानिक चाहिएं, लेकिन हमारे पास इनकी संख्या काफी कम है।

वहीं मराठवाडा के क्षेत्रीय आयुक्त उमाकांत ढंगत कहते हैं कि प्रशासन वह सबकुछ कर रहा है जिससे किसानों को राहत मिल सके और आत्महत्या करने वालों की संख्या में कमी आ सके। हालांकि इसमें कुछ समय लग सकता है लेकिन हम आश्वस्त हैं कि जल्द ही यह पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

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