मोदी राज में 25 हजार करोड़ का घोटाला: सामना
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पारदर्शी नीति अपनाने का दावा करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार भी भ्रष्टाचार के घेरे में आ गई है। भ्रष्टाचार का यह आरोप किसी विपक्षी पार्टी ने नहीं बल्कि केंद्र और महाराष्ट्र की भाजपानीत सरकार में शामिल शिवसेना ने ही लगाया है।
शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कार्यकारी संपादक संजय राउत ने ‘सच्चाई’ नामक शीर्षक के तहत एलईडी बल्ब में भारी घोटाले का पर्दाफाश किया है। राउत ने लिखा है कि केंद्र सरकार ने एलईडी बल्ब लगाने का ठेका एक मृत कंपनी को दिया है, जिसमें करीब 25 हजार करोड़ रुपये का गैर-व्यवहार हुआ है।
राउत के इस आरोप से भाजपा-शिवसेना के बीच विवाद गहराने की संभावना है। केंद्र और राज्य सरकार में शामिल होने के बाद भी शिवसेना लगातार भाजपा के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी करती रही है लेकिन यह पहला मौका है जब शिवसेना ने अपनी ही सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर भाजपा को खुली चुनौती दी है।
पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में उठाए सवाल
मुंबई के मरीन लाइंस के समुद्री किनारे को ‘क्वीन नेकलेस’ के नाम से जाना जाता है, जहां शिवसेना के विरोध के बावजूद एलईडी बल्ब लगवाया गया है। संजय राउत ने लिखा है कि जिस एनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेस लिमिटेड (ईईएसएल) नामक कंपनी को एलईडी लगाने का काम दिया गया है, वह कंपनी भारत सरकार ने 2009 में बनाई थी।
लेकिन इस कंपनी ने 2014 तक कोई काम नहीं किया। यह कंपनी सिर्फ कागज तक ही सीमित रही। जून 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने अचानक इस कंपनी को देश के 100 शहरों में एलईडी बल्ब लगाने का काम दे दिया।
इस कंपनी में वह क्षमता नहीं थी कि उसे इतना बड़ा काम दिया जाए, क्योंकि कंपनी के पास कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। यह कंपनी न तो एलईडी का उत्पादन करती है और न ही उसके पास एलईडी बल्ब लगवाने का कोई साधन ही है। वह दूसरी छोटी कंपनियों को सब-कांट्रेक्ट देकर एलईडी बल्ब लगवा रही है। सांसद संजय राउत का कहना है कि यदि इस मामले की जांच कराई जाए तो दो केंद्रीय मंत्रियों की लालबत्ती छिन सकती है।