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ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट पर 23 करोड़ का जुर्माना

Wed, 07 Jan 2015 10:21 AM IST
Updated Wed, 07 Jan 2015 10:21 AM IST
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23 crore rupee fine on flipkart for irregularity in business uttar pradesh

ऑनलाइन कंपनी फ्लिपकार्ट पर वाणिज्य कर विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के गाजियाबाद और नोएडा के अधिकारियों के संयुक्त अभियान में फ्लिपकार्ट कंपनी से 23.51 करोड़ रुपये की पेनाल्टी वसूली है। यह वसूली कंपनी के खाते को सीज करके की गई है।

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विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कंपनी ग्राहकों से प्रोडक्ट पर टैक्स वसूल रही थी, लेकिन टैक्स को सरकार के खजाने में जमा नहीं किया जा रहा था। लिहाजा जब्त दस्तावेज की गहनता से छानबीन के बाद यह कार्रवाई की गई है।
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पूर्व में भी इसी कंपनी से 29 लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए थे। वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी कई माह से ऑनलाइन कंपनियों के बिजनेस मॉड्यूल को समझ रहे हैं। कंपनियों के खिलाफ विक्रेता आंदोलन कर रहे हैं। साथ ही विभाग का राजस्व भी गिरा है। इन सभी को देखते हुए विभाग ने जांच कमेटी बनाकर कार्रवाई की।
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ऑनलाइन कंपनी के दिए गए दस्तावेज निकले फर्जी

23 crore rupee fine on flipkart for irregularity in business uttar pradesh

नोएडा में वाणिज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर एएन अग्रवाल ने बताया कि कंपनी फ्लिपकार्ट ग्राहकों से तो टैक्स ले रही थी पर उस टैक्स को विभाग में जमा नहीं किया जा रहा था।

डासना में जब कंपनी के गोदाम पर छापा मारा गया तो कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। इन दस्तावेजों की जांच की गई तो पूरा मामला समझ में आया। कंपनी रिटर्न फाइल करते वक्त गोलमाल करती है।

जांच में डिप्टी कमिश्नर सीपी मिश्रा के साथ अन्य अधिकारी लगाए गए थे। पहले कंपनी को रिकवरी नोटिस भेजा गया। इसके बाद खाते को सीज करके 23.51 करोड़ रुपये का बैंक ड्राफ्ट बीते 3 जनवरी को विभाग को मिला। मंगलवार को यह ड्राफ्ट सरकारी खजाने में जमा करा दिया गया।

फ्लिपकार्ट कंपनी चालाकी से बिजनेस कर रही

23 crore rupee fine on flipkart for irregularity in business uttar pradesh

गाजियाबाद के एडीशनल कमिश्नर अनिल कुमार पाठक ने बताया कि फ्लिपकार्ट कंपनी चालाकी से बिजनेस कर रही थी। वह माल की खरीद प्रदेश की फर्म से दिखाती। विभाग ने जब फर्म की जांच की तो बताई गई सभी फर्में फर्जी निकली। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूला है।

क्या कहते हैं विक्रेता

वाणिज्य कर विभाग की इस कार्रवाई से ऑनलाइन कंपनियों को जरूर झटका लगेगा। विक्रेता सरकार को टैक्स देते हैं। जबकि यह कंपनियां धोखाधड़ी करती हैं।-हर्ष बत्रा, विक्रेता

ऑनलाइन कंपनियों के लिए भी नियम बनाए जाने चाहिए। एमआरपी से कम रेट पर यदि कोई अपना सामान बेचता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।-अरुण कक्कड़, विक्रेता

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