ई कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट पर 23 करोड़ का जुर्माना
ऑनलाइन कंपनी फ्लिपकार्ट पर वाणिज्य कर विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के गाजियाबाद और नोएडा के अधिकारियों के संयुक्त अभियान में फ्लिपकार्ट कंपनी से 23.51 करोड़ रुपये की पेनाल्टी वसूली है। यह वसूली कंपनी के खाते को सीज करके की गई है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक कंपनी ग्राहकों से प्रोडक्ट पर टैक्स वसूल रही थी, लेकिन टैक्स को सरकार के खजाने में जमा नहीं किया जा रहा था। लिहाजा जब्त दस्तावेज की गहनता से छानबीन के बाद यह कार्रवाई की गई है।
पूर्व में भी इसी कंपनी से 29 लाख रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए थे। वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी कई माह से ऑनलाइन कंपनियों के बिजनेस मॉड्यूल को समझ रहे हैं। कंपनियों के खिलाफ विक्रेता आंदोलन कर रहे हैं। साथ ही विभाग का राजस्व भी गिरा है। इन सभी को देखते हुए विभाग ने जांच कमेटी बनाकर कार्रवाई की।
ऑनलाइन कंपनी के दिए गए दस्तावेज निकले फर्जी
नोएडा में वाणिज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर एएन अग्रवाल ने बताया कि कंपनी फ्लिपकार्ट ग्राहकों से तो टैक्स ले रही थी पर उस टैक्स को विभाग में जमा नहीं किया जा रहा था।
डासना में जब कंपनी के गोदाम पर छापा मारा गया तो कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। इन दस्तावेजों की जांच की गई तो पूरा मामला समझ में आया। कंपनी रिटर्न फाइल करते वक्त गोलमाल करती है।
जांच में डिप्टी कमिश्नर सीपी मिश्रा के साथ अन्य अधिकारी लगाए गए थे। पहले कंपनी को रिकवरी नोटिस भेजा गया। इसके बाद खाते को सीज करके 23.51 करोड़ रुपये का बैंक ड्राफ्ट बीते 3 जनवरी को विभाग को मिला। मंगलवार को यह ड्राफ्ट सरकारी खजाने में जमा करा दिया गया।
फ्लिपकार्ट कंपनी चालाकी से बिजनेस कर रही
गाजियाबाद के एडीशनल कमिश्नर अनिल कुमार पाठक ने बताया कि फ्लिपकार्ट कंपनी चालाकी से बिजनेस कर रही थी। वह माल की खरीद प्रदेश की फर्म से दिखाती। विभाग ने जब फर्म की जांच की तो बताई गई सभी फर्में फर्जी निकली। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए जुर्माना वसूला है।
क्या कहते हैं विक्रेता
वाणिज्य कर विभाग की इस कार्रवाई से ऑनलाइन कंपनियों को जरूर झटका लगेगा। विक्रेता सरकार को टैक्स देते हैं। जबकि यह कंपनियां धोखाधड़ी करती हैं।-हर्ष बत्रा, विक्रेता
ऑनलाइन कंपनियों के लिए भी नियम बनाए जाने चाहिए। एमआरपी से कम रेट पर यदि कोई अपना सामान बेचता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।-अरुण कक्कड़, विक्रेता