सीमावर्ती इलाकों में बनेंगी 21 हजार किलोमीटर लंबी सड़कें
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चीन और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में 21 हजार किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जाएंगी। इनमें से कुछ सड़क योजनाएं पूरी हो गईं हैं जबकि ज्यादातर योजनाएं भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं मिल पाने के कारण धीमी गति की शिकार हैं। जम्मू और कश्मीर में सीमा सड़क संगठन को 6,639 किलोमीटर लंबी 171 सड़कें सौंपी गईं हैं।
इन सड़क योजनाओं पर काम चल रहा है। हिमाचल प्रदेश में संगठन 791 किलोमीटर लंबी 13 सड़कें बनाएगा। पूर्वोत्तर राज्यों से संबंधित विभाग के सूत्रों के अनुसार सीमा सड़क संगठन को चीन सीमा के इलाके में 3,417 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाने का काम सौंपा गया है। इसमें से 661 किलोमीटर लंबी 21 सड़कों का काम पूरा हो गया है।
वर्तमान में 2,756 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण अधूरा है। चालीस लंबित सड़क योजनाओं में से कुछ में काम भी शुरू नहीं हो पाया है। ये सड़कें सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा से संबंधित हैं। केंद्र सरकार ने संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर उच्चाधिकार समिति के गठन की सलाह दी है ताकि भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण क्लीयरेंस और आवंटन से संबंधित शंकाओं का समाधान किया जा सके।
चीन की सीमा के पास सड़क के लिए दी स्वीकृति
पर्यावरण मंत्रालय ने चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा के 100 किलोमीटर के दायरे वाली सड़कों के लिए स्वीकृति दे दी है। संपर्क सड़कों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी गई है। सूत्रों ने बताया कि कड़ी चट्टानों को काटकर सड़कें बनाना और दुर्गम इलाके में सड़क बनाने की सामग्री पहुंचाना भी एक चुनौती रही है।
इसके अलावा 2014 में जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर की बाढ़, उससे पहले लेह की बाढ़ और सिक्किम के भूकंप के कारण संसाधनों को संबंधित इलाकों में आवश्यकता के अनुसार हस्तानांतरित किया गया। इससे भी योजना में बिलंब हुआ है।
उत्तराखंड के माना पास और नीती पास, हिमाचल प्रदेश के शिपिकला पास और सिक्किम के नाथुला पास में कुछ सड़क योजनाएं लंबित हैं। उत्तराखंड में सीमा सड़क संगठन 1,199 किलोमीटर लंबी 25 सड़कों पर काम कर रहा है। पंजाब में 127 किलोमीटर लंबी चार सड़कें और राजस्थान में 1,825 किलोमीटर लंबी 31 सड़कों का निर्माण होना है।
सीमा सड़क संगठन को इस वित्त वर्ष में अब तक 4,666.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में संगठन को लगभग 13 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस साल नवंबर तक संगठन ने 711 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई हैं। सरफेसिंग, सड़कों पर नई परत चढ़ाना, बड़े पुलों का निर्माण और अन्य स्थायी कार्यों पर संगठन ने लगभग तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए।