पुणे भूस्खलन: मरने वालों की संख्या 21
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महाराष्ट्र के पुणे जिले के एक आदिवासी गांव में बुधवार सुबह आए भूस्खलन के मलबे में दब कर मरने वालों की संख्या बढकर 21 हो गई है।
अब तक 10 लोगों को जिंदा निकाला जा चुका है। राहत और बचाव कार्य जारी है। लेकिन खराब मौसम के कारण राहतकर्मियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक 35 से 40 घर ध्वस्त हुए हैं और 150 से 200 लोग फंसे हुए हैं।
आखिर कैसे हुई यह घटना?
यह हादसा पुणे से करीब 100 किलोमीटर दूरी पर आंबेगांव तालुका में स्थित मालीण गांव में हुआ। तड़के करीब तीन बजे पहाडी का एक हिस्सा टूट कर गिर गया। उस समय लोग सो रहे थे और घंटों के बाद अधिकारियों की इसकी सूचना मिल सकी।
एक स्थानीय बस ड्राइवर ने जब पाया कि मालीण गंवा को जोडने वाली सडक दिखाई ही नहीं दे रही है, तब उसने अधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों की मौत को दुखद कहा है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह घटनास्थल का दौरा करेंगे। गांव के एक स्कूल को छोडकर लगभग सबकुछ या तो बह गया है या मलबे में दबा हुआ है।
पुणे के विभागीय आयुक्त प्रभाकर करंदीकर ने बताया, "भारी बारिश की वजह से पहाडी का हिस्सा टूटकर गिरा है। रात का समय होने की वजह से सभी लोग अपने घर में थे। यह पूरा आदिवासी गांव है और काफी दुर्गम है। हमने जेसीबी और एंबुलेंस भेजी थी। लेकिन उन्हें मौके पर पहुंचने में दिक्कत आ रही है।''
इस इलाके में पिछले दो-तीन दिनों से तेज बारिश हो रही है और करीब के गांववालों का कहना है कि सुबह तीन बजे के आस-पास एक तेज आवाज से उनकी नींद टूटी। कुछ गांव वालों ने कहा कि उन्हें लगा कि कोई शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ है।
पास की एक पहाडी गांव पर गिर गई और कुछ ही देर में 150-200 लोगों का गांव हजारों टन मिट्टी, कीचड और पत्थर के मलबे में दब गया। गांव के ज्यादातर मकान कच्चे थे जिनके कारण गांव वालों को निकलने का मौका नहीं मिल सकता।
नहीं मिला निकलने का मौका
एनडीआरएफ के आईजी संदीप राय राठौर ने बीबीसी बताया कि उन्हें घटना की जानकारी सुबह 10.45 बजे मिली। पतली सडक और लगातार हो रही बारिश के कारण बचाव कार्यों में काफी परेशानी हो रही है।
दुर्घटना के 12 घंटों से ज्यादा गुजर जाने के बाद भी बचावकर्मी मलबे के अंदर दबे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब जबकि रात हो चुकी है, इन हालात में किसी के जिंदा बचे होने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही है।
एक स्थानीय अधिकारी सौरभ राव ने पीटीआई को बताया कि भारी मशीनें और एम्बुलेंस को गांव भेजा गया है।
राव के अनुसार अभी मारे जाने वालों की संख्या बताना मुश्किल है क्योंकि प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में है।