सिख दंगों की खुली फाइल से कांग्रेस की बढ़ी आफत
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सिख दंगों की खुली फाइल ने चुनावी साल में कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी है।
राष्ट्रीय स्तर में खुद को स्थापित करने की कोशिश में जुटे भाजपा नेता और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगों की याद दिलाकर रोकने की रणनीति बुनने में जुटी कांग्रेस अब खुद सिख दंगों की आग में फंस गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस एक बार फिर धर्म संकट में फंस गई है। लिहाजा, सिख दंगों के दाग से अपना दामन बचाने की कोशिश में कांग्रेस ने जगदीश टाइटलर से किनारा करने का फैसला कर लिया है।
जगदीश टाइटलर के खिलाफ आए कोर्ट के ताजा फैसले के बाद 30 साल पुराने सिख दंगों का दाग कांग्रेस के माथे पर फिर से गहरा गया है। सिख दंगों की कालिख से पार्टी कई बार दो चार हो चुकी है।
इससे पहले पिछले 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले भी सिख दंगों के मामले ने तूल पकड़ लिया था। उस समय सीबीआई ने जगदीश टाइटलर को क्लीन चिट दे दी थी।
तब तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम ने टाइटलर को क्लीन चिट मिलने पर खुशी जाहिर की थी तो उन पर एक सिख पत्रकार ने कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान जूता ही फेंक दिया था।
उस दौरान भी सिख दंगों में टाइटलर और पूर्व सांसद सज्जन कुमार की भूमिका के मामले ने बेहद तूल पकड़ा था। नतीजतन पार्टी ने दोनों का लोकसभा चुनाव लड़ने का टिकट काट दिया था।
अब इस बार भी चुनावी साल में फिर से पार्टी को ऐसे ही संकट का सामना करना पड़ रहा है। टाइटलर इस समय कांग्रेस में नीति निर्धारण की शीर्ष इकाई पार्टी कार्यसमिति के सदस्य और ओडिशा के प्रभारी भी हैं।
विवाद बढ़ता देख पार्टी उसे इन पदों से हटा भी सकती है। बुधवार को पार्टी इस मामले से अपना दामन बचाती दिखी। पार्टी प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि कानून अपना काम करेगा।
कोर्ट की टिप्पणी पर उन्हें कुछ नहीं कहना है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कानून के खिलाफ काम करने वालों को पार्टी ने कभी नहीं बख्शा है।
दूसरी तरफ विपक्ष के पास भी कांग्रेस पर दंगे भड़काने के आरोप के तौर पर बड़ा हथियार मिल गया है। भाजपा और नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस 2002 के गुजरात दंगों का हवाला देकर ताबड़तोड़ सियासी बैटिंग करती रही है।
मगर ऐन वक्त पर अदालती फैसले से पार्टी को इस मोर्चे पर विपक्ष को घेरना इतना आसान नहीं होगा। इन सब संभावनाओं को पार्टी आलाकमान बखूबी भांप रहा है। इसलिए टाइटलर से दूरी बनाने के सभी विकल्प पार्टी ने खुले रखे है।