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1971 भारत-पाक युद्धः भारतीय सेना की अमर गाथा

Mon, 03 Dec 2012 10:50 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 03 Dec 2012 10:50 AM IST
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1971 india pakistan war immortal saga of indian army

भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ 1971 का युद्ध भारतीय इतिहास में हमेशा अमर रहेगा। लगभग दो हफ्ते (3-16 दिसंबर) तक चले इस युद्ध के बाद दुनिया के पटल पर बांग्लादेश नामक नए मुल्क का उदय हुआ। भारतीय जाबांजों के साहस और जीवटता के आगे पाकिस्तानी सेना ने घुटने टेक दिए थे। इसे हिंदुस्तान की अब तक की सबसे बड़ी युद्ध विजय कहा जाता है।

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25 मार्च, 1971 को पाकिस्तान के सैनिक तानाशाह याहिया खां ने पूर्वी पाकिस्तान की जन भावनाओं को सैन्य ताकत से कुचलने का आदेश दिया। पाकिस्तानी सेना ने बांग्लादेश के बड़े नेता शेख मुजीबुर्रहमान को गिरफ्तार कर दमन चक्र शुरू कर दिया। इधर परेशान और आहत पूर्वी पाकिस्तान के लोगों का हिंदुस्तान आने का सिलसिला शुरू हुआ।
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पाकिस्तानी सेना के दमन चक्र बढ़ने के बाद भारत पर दबाव पड़ने लगा कि वह पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य हस्तक्षेप करे। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस मसले पर थलसेना अध्यक्ष जनरल मानकेशॉ से राय मांगी। मानेक शॉ ने इंदिरा गांधी को साफ कर दिया कि वह पूरी तैयारी के साथ ही जंग के मैदान में उतरना चाहेंगे।
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3 दिसंबर 1971 को अचानक पाकिस्तानी वायुसेना ने भारतीय सीमा पर पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर और आगरा के सैनिक हवाई अड्डों पर बम गिराने शुरू कर दिए। कलकत्ता में जनसभा कर रहीं इंदिरा गांधी ने उसी समय दिल्ली लौटने का फैसला किया। मंत्रिमंडल की आपात बैठक में इंदिरा ने देश को संबोधित किया। और फिर शुरू हुई भारतीय सेना की अमर गाथा...।

पूर्व में तेजी से आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने जेसोर और खुलना पर कब्जा कर लिया। तंगेल पर कब्जा और पाकिस्तानी सेना के ढाका भागने वाले मार्गों को बंद करने के तुरंत बाद मानके शॉ ने पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल नियाजी को अपना संदेश भेजकर आत्मसमर्पण करने को कहा। इस युद्ध में पूर्वी कमान के स्टाफ ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब की भी अहम भूमिका रही।


15 दिसंबर को पाकिस्तानी सेनापति जनरल एके नियाजी ने युद्धविराम की प्रार्थना की। 16 दिसंबर 1971 को करीब 90,000 पाकिस्तानी फौजों ने आत्मसमर्पण कर दिया। याहिया खां पूरी तरह हार मान चुके थे। इस तरह बांग्लादेश नामक नए मुल्क का उदय हो गया।

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