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दिल्ली गैंगरेपः 'मैं बेहोश हो जाती, वे मुझे और मारते'

Wed, 11 Sep 2013 03:40 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 11 Sep 2013 03:40 PM IST
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16 december gangrape, when manhood become animal

बिटिया ने जो झेला वह भयावह था, इतना कि सुनकर ही रूह कांप उठे। चलती बस में दरिंदे एक घंटे तक वहशीपन की तमाम हदें पार करते रहे, लेकिन उसकी चीखें बस के काले शीशों के बाहर नहीं जा सकीं।

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घटना के बाद दिए बयान में उसने दिल को चीर डालने वाली आपबीती इस तरह बयां की।

तस्वीरों में देखिए:- दिल्ली गैंगरेप के दरिंदों को फांसी की मांग
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मैं साकेत के सेलेक्ट सिटी मॉल से ‘लाइफ ऑफ पाई’ फिल्म देखकर लौट रही थी। हमने वहां से एक ऑटो लिया और मुनिरका पहुंच गए। यहां हमने एक सफेद बस देखी।

बस का कंडक्टर आवाज लगा रहा था कि बस पालम और द्वारका जा रही है। मुझे भी उसी तरफ जाना था। मैं और मेरा मित्र बस में बैठ गए। हमने 20 रुपये में टिकट लिया।

मैंने देखा कि बस में छह-सात लोग बैठे हैं। मुझे लगा कि सभी यात्री हैं। बस में पीले पर्दे और लाल रंग की सीटें थीं। बस की खिड़कियां बंद थीं और उन पर काले शीशे थे।
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हम बाहर तो देख सकते थे, लेकिन बाहर से अंदर कुछ नहीं दिख सकता था। मैंने बस में बैठे दूसरे लोगों की ओर देखा तो मुझे कुछ शक हुआ, लेकिन तब तक हम टिकट ले चुके थे और बस चल चुकी थी।

पांच मिनट बाद ही कंडक्टर ने बस का गेट बंद कर दिया और लाइट बंद कर दी। उनमें से तीन-चार ने मेरे मित्र को पकड़ लिया, बाकी मुझे खींचकर पीछे की सीट पर ले गए।

उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ डाले और दुष्कर्म किया। इस दौरान उन्होंने लोहे की रॉड से मुझे खूब पीटा और कई जगह काटा भी। छह दरिंदों ने एक-एक कर दुष्कर्म किया और उनमें से एक ने लोहे की रॉड मेरे अंदर डाल दी।


फिर एक ने मेरे शरीर में हाथ डालकर मेरे अंग बाहर निकाल दिए। वह चलती बस में मुझे एक घंटे तक यातनाएं देते रहे। मैं बार-बार बेहोश हो जाती, वे मुझे होश में लाने के लिए और मारते।

मेरे मित्र को भी रॉड से पीटा गया। बाद में उन्होंने हमारे कपड़े उतारकर हमें मरा समझकर सड़क पर फेंक दिया। उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए, ताकि फिर किसी लड़की के साथ ऐसा नहीं हो। उन्हें जिंदा जला दिया जाना चाहिए।

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