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क्या बैन हो जाएंगे 15 साल पुराने बस और ट्रक?

Fri, 04 Dec 2015 09:10 AM IST
Updated Fri, 04 Dec 2015 09:10 AM IST
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15 years older trucks and buses will ban on Across the country

देश की राजधानी समेत तमाम शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण से चिंतित सरकार 15 साल से ज्यादा पुराने ट्रकों और बसों पर अगले साल अप्रैल से प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस सिलसिले में सलाह-मशविरा शुरू कर दिया है।

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प्रतिबंध लगाने की घोषणा दस दिन में सार्वजनिक हो जाएगी और इसे अप्रैल से लागू कर दिया जाएगा। प्रतिबंध से पैदा हालातों की समीक्षा के बाद सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी प्रतिबंध के फै सले पर अंतिम मुहर लगाएंगे।
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सूत्रों के मुताबिक  नेशनल परमिट वाले 15 साल से ज्यादा पुराने वाहनों को सड़कों न चलने देने से जुड़ी एक अधिसूचना जारी की जा चुकी है। लेकिन अब अप्रैल से इन्हें बंद करने का पक्का मन बना लिया गया है।
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दरअसल पर्यावरण को बचाने और इसे प्रदूषण रहित बनाने की बढ़ती चिंता के मद्देनजर 15 साल से ज्यादा पुराने ट्रकों और बसों को सड़कों से उतारने का फैसला किया गया है। प्रतिबंध लगाते समय यह नहीं देखा जाएगा कि इन वाहनों के पास नेशनल परमिट है या नहीं।

बढ़ते प्रदूषण की वजह से सरकार ने लिया फैसला

15 years older trucks and buses will ban on Across the country

सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव विजय छिब्बर इस मामले के सभी पक्षों और अन्य लोगों से बातचीत कर चुके हैं। पंद्रह साल से ज्यादा पुराने ट्रकों और बसों पर प्रतिबंध लगाने पर अंतिम फैसला सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ही लेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि स्कूल बस समेत 15 साल से ज्यादा पुराने सभी वाहनों में कई खराबियां आ जाती हैं।

नतीजतन दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही गलत उत्सर्जन प्रणाली की वजह से पर्यावरण भी काफी प्रदूषित होता है। इस साल 7 अप्रैल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने एक फैसले में 10 साल से पुराने डीजल वाहनों को दिल्ली और एनसीआर में चलने से रोक दिया था।

राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से ट्रिब्यूनल ने यहां की सड़कों पर 15 साल से पुराने वाहनों को चलाने पर रोक लगा दी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रिब्यूनल के इस फैसले का समर्थन किया था।

इस साल, अगस्त में गडकरी ने कहा था कि सरकार उन वाहन मालिकों को डेढ़ लाख रुपये देगी, जो प्रदूषण और सड़कों पर दुर्घटना कम करने के उद्देश्य से अपने दस साल से पुराने वाहनों को सरकार के पास जमा कर देंगे। 

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता

15 years older trucks and buses will ban on Across the country

डब्ल्यूएचओ की पिछले साल की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 20 सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में 13 भारत के हैं। इस रिपोर्ट के बाद सरकार के नीति-निर्माताओं की चिंता और बढ़ गई है और वे पुराने ट्रकों और बसों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कमर कसने लगे हैं।  

''वाहनों से पैदा होने वाले वायु प्रदूषण में 15 साल से पुराने ट्रकों और बसों की हिस्सेदारी 60 फीसदी है। हालांकि प्रतिबंध ही वायु प्रदूषण खत्म करने का एक मात्र रास्ता नहीं है। इसके अलावा कारों पर टैक्स और पार्किंग चार्ज बढ़ाना होगा। साथ ही सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।'' विवेक चट्टोपाध्याय, विशेषज्ञ- सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट

बढ़ते वाहनों से प्रदूषण
देश में कारों की बढ़ती संख्या शहरों की आबोहवा तेजी से खराब कर रही है। राजधानी दिल्ली की सड़कों पर हर दिन 1400 नई कारें उतर जाती हैं।

अमेरिकी दूतावास ओर से लगाए गए मॉनिटरिंग स्टेशन के मुताबिक एयर क्वालिटी इंडेक्स इस सप्ताह 400 के पार पहुंच गया। यह स्तर स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी नुकसानदेह है। ठंड के दौरान राजधानी में हालात और खराब हो जाते हैं जब धुंध और प्रदूषण मिलकर लोगों की सेहत पर कहर बरपाते हैं।

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