2015 में इन 15 चुनौतियों से कैसे निपटेंगे PM मोदी?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश की सत्ता संभाले करीब सात महीने गुजर चुके हैं। इन सात महीनों तक लोगों ने देश की नई सरकार को मौजूदा व्यवस्था को समझने और समस्याओं से निपटने को अनुकूल माहौल बनाने के लिए पर्याप्त वक्त दिया।
लेकिन साल 2015 एक ऐसा वक्त आया है जिसमें लोगों को केंद्र सरकार से उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने की आकांक्षा है। लोगों की इन आकांक्षाओं को 2015 में पूरा करना मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। इस खास रिपोर्ट में पढ़िए, मोदी के सामने क्या हैं 15 चुनौतियां?
1-कालाधन
कालाधन आज सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है। 2015 में मोदी सरकार की सबसे बड़ी चुनौती होगी विदेशों में जमा कालाधन को वापस लाना, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी कालाधन को वापस कैसे ला पाएंगे जब अभी तक यह जानकारी ही हासिल नहीं हो सकी कि विदेशों में भारत का कुल कितना काला धन है?
2014 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में कालाधन वापस लाने और देश में नया कालाधन तैयार न हो इसकी कोशिश करने का ऐलान किया था। 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री बने तो पद गृहण के अगले ही दिन 27 मई 2014 को कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई जिसमें कालेधन पर एसआईटी गठन करने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा नवंबर 2014 में ऑस्ट्रेलिया में हुए जी-20 सम्मेलन में विभिन्न देशों के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ सूचना देने के लिए आपसी सहयोग के लिए एक समझौता किया। लेकिन सिर्फ इतना ही करने से विदेशों में जमा कालाधन देश को मिलने वाला नहीं है। ऐसे में अब 2015 में जनता देखना चाहेगी 2015 में मोदी कालेधन को वापस लाने के लिए क्या करती है?
2- 'गुड गवर्नेंस' बनाम समयबद्ध सेवाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विकास से जुड़े लगभग हर संबोधन में गुड गवर्नेंस की बात करते हैं। लाल फीताशाही को खत्म करने की बात करते हैं। लेकिन क्या केवल लालफीताशाही को खत्म करने की बात से हर जिले और तहसील के दफ्तरों में धक्के खाने वाले आम लोगों को सुशासन का अनुभव कराया जा सकता है?
जब तक आम लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए धक्के खाने पड़ेंगे तब तक लोगों को गुड गवर्नेंस का अनुभव नहीं कराया जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी की पार्टी ने अपने घोषणा-पत्र में सेवाओं की पुअर डिलीवरी यानी मुश्किल से सरकारी सेवाएं मिलने की दिक्कत खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया गया जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली हो। यहां तक की दिल्ली के लोगों को भी अब तक समय पर सरकारी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने 2015 लोगों को सरकारी सेवाओं की पुअर डिलीवरी से मुक्त कराना एक बड़ी चुनौती होगी। लोगों में जगी सुशासन की आशा को 2015 में प्रधानमंत्री मोदी कैसे पूरी करते हैं यह देखना होगा।
3- बेरोजगारों को रोजगार
भारतीय जनता पार्टी को जिस उम्मीद के लिए पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का गौरव हासिल हुआ है वो उम्मीद है रोजगार। बेरोजगार युवाओं को रोजगार देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने 2015 की सबसे बड़ी चुनौतियों में एक है। क्योंकि अभी कॉलेज, स्कूलों से पास आउट होने वाले लाखों लोगों को न तो किसी नौकरी की व्यवस्था की जा सकी है ओर ना ही किसी विशेष ट्रेनिंग की जिससे कि उन्हें रोजगार सुनिश्चत किया जा सके।
देश में युवाओं की संख्या पूरी आबादी के पचास प्रतिशत से ज्यादा है जो देश के राजनीतिक भविष्य निर्धारण के हिसाब से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। युवाओं की आज सबसे बड़ी जरूरत और चुनौती रोजगार है।
2014 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने युवाओं के लिए रोजगार की खास व्यवस्था करने की बात कही थी। घोषणापत्र के अनुसार, युवाओं रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए कपड़ा उद्योग, जूता उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, पर्यटन और पारंपरिक व्यवसायों को विकसित करने और उन्हें मजबूती देने की बात कही थी।
इसके साथ ही भाजपा ने घोषणापत्र में युवाओं के लिए मल्टी स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाने की भी बात कही थी जिसमें युवाओं को रोजगार के लिए तैयार किया जाना है। लेकिन अभी तक युवाओं की बेरोजगारी दूर करने लिए एक भी ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में 2015 का साल युवाओं को रोजगार देना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक बड़ी चुनौती होगी।
गौरतलब है कि पीएम मोदी अभी सरकार के पांच महीने के कार्यकाल में लोगों को रोजगार न दे पाने पर रोजगार के लिए माहौल तैयार करने की बात कही थी, लेकिन अब देखना यह होगा कि 2015 का साल भी माहौल बनाने में निकल जाता है या लोगों को रोजगार पाने का सपना भी हकीकत होगा।
4-रेल किराया बढ़ा, सुविधाएं नहीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार बनी प्रचंड बहुमत की सरकार ने जुलाई 2014 में अपना पहला रेल बजट पेश किया। इस रेल बजट के दौरान मोदी सरकार में रेल मंत्री रहे सदानंद गौड़ा नई सरकार के जोश भरे माहौल में वो कर दिखाया जिसकी हिम्मत पिछले 15 साल से किसी सरकार ने नहीं की थी।
तत्कालीन रेलमंत्री सदानंद गौड़ा ने 15 साल से स्थिर यात्री रेल किराए सीधे 14.2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी। पहले से महंगाई में जूझ रहे लोग इस बढ़ोत्तरी पर सवाल किया तो जवाब मिला कि रेलवे की सुविधाएं बढ़ाने के लिए किराया बढ़ाना जरूरी था।
रेल का किराया बढ़े अब पांच महीने गुजरने को हैं लेकिन अभी तक जमीन पर कोई भी ऐसा काम नजर नहीं आ रहा जिससे लगे कि रेलवे की सुविधाएं बढ़ी हैं। रेलवे टिकट बुकिंग की मारामारी, मानवरहित क्रॉसिंग में दुर्घटनाएं और यात्रियों के अनुरूप बोगियों या ट्रेनों की संख्या में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ।
ऐसे में 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के लिए बढ़े किराए के एवज में लोगों को बेहतर सुविधाएं देने की एक बड़ी चुनौती होगी।
5-दिल्ली और बिहार में चुनाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सात महीने के कार्यकाल में चार राज्यों महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में चुनाव हो चुके हैं। इन चारों राज्यों के चुनावों भाजपा का विजय अभियान जारी रहा, लेकिन 2015 में होने वाले चुनाव मोदी सरकार के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होंगे।
2015 के प्रमुख चुनावों में दिल्ली विधानसभा के चुनाव हैं जो जल्द ही होने वाले हैं। दिल्ली के चुनाव में मोदी सरकार के विकास कार्यों और नीतियों का परिणाम झलक सकता है।
2014 के आम चुनावों में भाजपा ने अपने सुशासन और विकास के वादे के दम पर दिल्ली की सभी सीटों पर विजय हासिल की थी। लेकिन अब दिल्ली के लोग मोदी सरकार के अब तक किए गए विकास कार्यों और नीतियों पर वोट देना चाहेंगे क्योंकि फरवरी तक मोदी सरकार के आठ महीने पूरे हो चुके होंगे।
इसके बाद साल के अंत में बिहार विधानसभा के चुनाव होंगे जहां एनडीए सरकार की काट के रूप में बना जनता परिवार का महागठबंधन प्रधानमंत्री मोदी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ा कर सकता है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 2015 एक बड़ी चुनावी चुनौती का साल साबित हो सकता है।
6-स्वच्छ भारत अभियान
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान 2014 की बड़ी सुर्खियों में से एक रहा। मोदी के नेक इरादों वाले अभियान को तारीफ भी मिली। लेकिन क्या केवल झाड़ू मात्र लगाने से से देश स्वच्छ हो जाएगा?
जब देश से सबसे खास दिल्ली और मुंबई जैसे में शहरों में भी अभी तक कचरे के रिसाईक्लिंग और सीवेज सिस्टम के अपग्रेडेशन का इंतजाम नहीं किया जा सका। ऐसे में देश से गंदगी को कैसे दूर किया जा सकता है। देश की नदियों, तालाबों साफ रखने के लिए नए कानून को सख्ती से लागू करना भी जरूरी है जिससे कि फैक्टियों और सीवेज का गंदा पानी 100 प्रतिशत संशोधित करके ही प्रवाहित किया जा सके।
देश में गंदगी का बड़ा कारण एक बड़े तबके का अशिक्षित और गरीब होना भी है। जो शख्स ठीक से भोजन नहीं करता, अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज सकता वो ना तो साफ-सुथरा रह सकता और ना ही देश की सफाई में योगदान दे सकता। देश में पूर्ण स्वच्छता लाने के लिए गरीबी मिटाना भी एक बड़ी चुनौती है।
ऐसे में देश को सचमुच स्वच्छ बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने 2015 यह चुनौती भी होगी वे स्वच्छता के लिए बने नियम व कानूनों को सख्ती से लागू कराने में किस प्रकार से काबू पाते हैं।
7- आदर्श ग्राम योजना
प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी जब लाल किले पर झंडा फहराया तो ऐसा लगा मानों वे पारंपरिक सरकारों से हटकर कुछ अलग करने संकेत दिया हो। 15 अगस्त के मौके पर उन्होंने चुनावी घोषणा पत्र से बाहर निकलते हुए प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना का ऐलान किया।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत हर सांसद पहले दो साल में एक गांव का विकास करेगा और फिर हर साल एक आदर्श गांव बनाएगा। इस योजना के ऐलान के छह महीने पूरे होने जा रहे हैं लेकिन अभी तक ज्यादातर सांसदों की ओर से गांव गोद लेने के अलावा कुछ नहीं किया गया।
साल 2015 जब समाप्त हो रहा होगा जब मोदी सरकार का डेढ़ साल का वक्त गुजर चुका होगा और उनके ऐलान के अनुसार तब हर आदर्श गांव को 75 प्रतिशत तक विकसित किया जाना चाहिए जिसकी संभावनाएं कम नजर आ रही हैं।
वहीं कुछ सांसद इस योजना पर धन की कमी सवाल भी खड़ा कर चुके हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी 2015 में आदर्श ग्राम योजना को उसके तय मुकाम तक पहुंचाने की बड़ी चुनौती होगी।
8-गंगा की सफाई
गंगा की सफाई मोदी सरकार के सामने उतनी की चुनौती है जितना यह दूसरी सरकारों की रही है। पिछले 15 साल में कई सरकारें आईं और गंगा की सफाई के लिए योजनाएं बनाकर सैकड़ों करोड रुपए बहा चुकी हैं।
कांग्रेस के नेतृत्व में बनी केंद्र की पिछली सरकार यूपीए-2 ने गंगा सफाई के लिए 2012 में राष्ट्रीय नदी गंगा अथॉरिटी बनाई जिसके अध्यक्ष उस वक्त के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह खुद थे लेकिन गंगा सफाई नहीं हो सकी।
इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी एनडीए सरकार ने गंगा का नाम जल संसाधन मंत्रालय के नाम से जोड़ा है और गंगा को पूर्ण रूप से स्वच्छ बनाकर उसको मूल रूप देने के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
2015 के अंत तक गंगा मंत्रालय को बने डेढ़ साल गुजर चुके होंगे ऐसे में देखना होगा कि शहरों के गंदे नालों का पानी गंगा में जाने से रोकने के लिए सरकार कोई तकनीक अपना पाती है या उसके लिए केवल कोशिश ही जारी रहेगी।
9- 'मेक इन इंडिया'
भारत की आर्थिक और सामाजिक सूरत बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे महत्वाकांक्षी और जरूरी प्रोग्राम है 'मेक इन इंडिया'। मोदी की सरकार पहले स्वतंत्रता दिवस पर ऐलान किया गया एक ऐसा प्रोग्राम है जिसके दम पर भारत विश्व की आर्थिक महाशक्ति महाशक्ति के तौर पर उभर सकता।
मोदी सरकार के आठ महीने गुजरने तक इस ओर जरूरी माहौल बनाने के प्रयास दिखे। मोदी ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान की खास यात्राएं की और वहां के उद्योगपतियों को भारत में पूंजी लगाने के आह्वान किया।
अपने 'मेक इन इंडिया' की ओर से और कदम बढ़ाते हुए भूमिअधिग्रहण कानून को बेहद लचीला बनाया जिससे के यहां स्थापित होने वाली कंपनियों को किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े। इससे पहले मोदी सरकार लेबर कानूनों का आसान बना चुकी है।
लेकिन क्या सिर्फ दो कानूनों के बदलने से ऐसे समय में विदेशी कंपनियों भारत बुलाया जा सकता जब देश के बड़े पूंजीपति विदेशों में पैसा लगाना ज्यादा महफूज समझते हों। वहीं चीन में भारत के मुकाबले ज्यादा स्किल्ड लेबर है। चीन में बने प्रोडक्ट ज्यादा सस्ते हैं जो दुनिया के बाजारों आसानी से बेचे जा सकते हैं। ऐसे में पीएम मोदी का 'मेक इन इंडिया' संसाधनों की कमी के बावजूद दुनिया में कैसे अपना भरोसा जमा पाएगा?
भूमि अधिग्रहण अधिग्रहण के नए सुधारों के अनुसार सरकार जब किसानों से उनकी बिना सहमति के जमीनों का अधिग्रहण करेगी तब क्या होगा? ऐसे में भूमि 'मेक इन इंडिया' की सफलता और किसानों का हित का सांमजस्य बनाना 2015 में मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।
10- योजना के लिए नीति आयोग
मोदी सरकार ने देश के विकास का रोडमैप तैयार करने वाले योजना आयोग को भंग कर दिया। इसके स्थान पर नीति आयोग(नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफार्मिंग इंडिया) बनाया जिसे लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। खबरों में नीति आयोग को योजना आयोग का नाम बदलना बताया गया लेकिन नाम बदलने से योजना आयोग के काम करने का तरीका कितना बदलेगा यह बात सामने अभी तक नहीं आई।
योजना आयोग पं. जवाहर लाल नेहरू के समय का यानी करीब 64 साल पुराना। 64 साल पहले की भारत सरकार ने विकास के समाजवादी मॉडल के तहत योजना आयोग बनाया था जिसका काम पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से देश का विकास करना था। लेकिन 1990 में आए उदारवाद से इस आयोग का महत्व कम हो गया था, फिर भी विकास की योजनाओं का रोडमैप तैयार करने में यह आयोग भारत सरकार के लिए मददगार रहा है।
अब सवाल यह है योजना आयोग का नाम बदलना मात्र चिंन्हों की राजनीति होगी या काम करने के तरीके में भी खास बदलाव होगा? योजना आयोग आंकड़ों से हेराफेरी कर गरीबों की संख्या घटने के कारण विवादों में भी रहा। लेकिन अब देखना यहा होगा कि पीएम मोदी का नीति आयोग गरीबी और गरीबों के आंकड़ों को किस तरह से पेश करते हैं और यही मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती भी होगी।
11-भारत को विश्व गुरु बनाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव जीतने के ठीक बाद वाराणसी गए और वहां मां गंगा की विधिवत पूजा अर्चना की। भाजपा को पहली बार मिली प्रचंड जीत से गदगद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प दोहराया जो चुनावी भाषणों में किया करते थे।
चुनावों के पहले मोदी भारत को विश्व गुरु बनाने की बात करते तो चुनावी स्टंट समझा जा सकता था लेकिन चुनाव जीतने के बाद भी भारत को विश्व गुरु बनाने का मोदी का संकल्प आश्चर्यजनक लगा। भारत का विश्वगुरु बनने की बात इसलिए आश्चर्यजनक नहीं लगी की भारत विश्व गुरु क्यों बनेगा बल्कि इसलिए लगी कि भारत विश्व गुरु कैसे बनेगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास मौजूद भारत को विश्व गुरु बनाने का रोडमैप भी अभी तक सामने नहीं आया और न ही इस दिशा में आधिकारिक तौर पर सरकार का कोई काम दिख रहा।
ऐसे में 2015 में देश के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह जरूर जानना चाहेंगे कि भारत विश्व गुरु कैसे बनेगा और उनके पास इसे लेकर क्या नीतियां हैं जिनके लागू करने से भारत विश्व गुरु बनेगा।
12- पड़ोसी देशों के साथ संबंध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के राष्ट्र प्रमुखों को बुलाकर एक बड़ी डिप्लोमैसी का संकेत दिया। मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भारत के पड़ोसी देशों के शामिल होने से ऐसा लगा कि भारत की सीमाओं पर अब रामराज रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मां को शॉल भेजा तो पाकिस्तान ने भी पीएम मोदी की मां को तोहफे साड़ी भेजकर पड़ोसी रिश्तों को लेकर शुभ संकेत दिया। लेकिन कुछ महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में इतनी खटास आ गई कि सचिव स्तर की वार्ता भी रद्द हो गई।
आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का दंभ भरने वाले पाकिस्तान ने मोदी सरकार अभी तक के कार्यकाल में दर्जनों पर सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। यहां तक की भारत के कई जवान भी मारे जा चुके हैं। वहीं बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ रिश्तों में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ। इसके अलावा मोदी सरकार में अब तक चीन भी कई बार भारतीय सीमा में तंबू गाड़ चुका है।
ऐसे में 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के चुनौती होगी कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते कैसे बेहतर बनाएंगे?
13-नक्सलवाद, आंतरिक सुरक्षा
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बने नक्सलवाद पर भारतीय जनता पार्टी हमेशा सत्ताधारी दल पर उचित कार्रवाई न करने का अरोप लगाती रही है। लेकिन हालात यह है कि देश में भाजपा की सरकार बने करीब सात महीने होने को है लेकिन नक्सली हिंसा पर लगाम लगाने का कोई खास रोडमैप नजर नहीं आता।
हाल ही में दो दिसंबर को झारखंड के सुकमा में हुए नक्सली हमले में 14 जवान मारे गए थे जो मोदी सरकार के दौरान एक बड़ा नक्सली हमला था। इससे पहले अगस्त माह में झारखंड के गमला में नक्सली हमला हुआ जिसमें सात जवान मारे गए थे।
नक्सलियों पर कार्रवाई के नाम पर कई आदिवासियों का आत्मसमर्पण कराया गया था जिन्हें बाद में फर्जी बताया गया। वहीं हाल में असम बोडोलैंड के कुछ उग्रवादियों ने असम में 70 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
ऐसे में देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने चुनौती होगी कि वह 2015 में नक्सलवाद और उग्रवाद की समस्या से निपटने के लिए क्या करते हैं?
14- महिला सुरक्षा
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से किए गए चुनावी वादों में महिला सुरक्षा भी एक बड़ा वादा है। कांग्रेस शासन के दौरान दिल्ली में जब निर्भया कांड हुआ तो कांग्रेस पर महिलाओं की सुरक्षा के प्रति असंवेदनशीलता के आरोप लगे। यहां तक 2013 के विधानसभा चुनावों में दिल्ली की जनता ने उस वक्त की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को भी हरा दिया।
देश में भाजपा की सरकार बनने के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले की प्राचीर से महिलाओं की विशेष सुरक्षा की बात की थी और उसके लिए सामाजिक बदलाव की बात कही थी। लेकिन सरकार के आठ महीने बीतने के बाद भी हाल यह है अभी भी महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध में कोई खास कमी नहीं आई। दिल्ली हो या उत्तर प्रदेश हर जगह महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जारी है।
मोदी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा की ओर से कदम बढ़ाते हुए महिलाओं के लिए चल रही हेल्प लाइनों की संख्या बढ़ाई है। दिल्ली में पीसीआर वैन की संख्या बढ़ाने के साथ हर थाने में एक महिला सिपाही तैनात करने की बात कही है। लेकिन क्या इतना करने से महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को रोका जा सकेगा?
2015 में मोदी सरकार के एक साल का रिपोर्ट कार्ड आएगा तो देखना होगा मोदी सरकार महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों में कमी को किस प्रकार साबित करेगी।
15- 'सबका साथ, सबका विकास'
देश के विकास के लिए जिस बात पर देश के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रचंड बहुमत की सत्ता सौंपी वो है 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा।
भाजपा के अपने चुनावी घोषणपत्र का नारा सबका साथ, सबका विकास रखा। लेकिन इस नारे के दम पर जीते भाजपा नेता लव जिहाद और ...रामजादे जैसे नारों की बात करते नजर आए। भाजपा नेताओं के इन विवादित नारों से 'सबका साथ, सबका विकास' वाले नारे को महत्व कम हुआ है और एक विशेष वर्ग के लोगों का मोदी सरकार पर भरोसा कम हुआ है।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए 2015 में सबकों साथ लेकर कर विकास करने की चुनौती और बढ़ जाएगी।