मक्का भगदड़ में 14 भारतीयों की मौत, गुजरात के 9 हाजी
सऊदी अरब के मक्का में हज यात्रा के दौरान मची भगदड़ में मौतों का आंकड़ा 700 के पार पहुंच गया है। भगदड़ के बाद 800 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। वहीं इस हादसे में अभी तक 14 भारतीय हाजियों की भी मौत हुई है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को 14 भारतीय हाजियों की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि इस हादसे में 13 हाजी घायल भी हुए हैं, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
सुषमा ने कहा कि मक्का में मरने वाले भारतीय हाजियों की संख्या की सही जानकारी सऊदी अरब की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही हो पाएगी। भारतीय हाजियों के मरने की सूचना सऊदी अरब में जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के माध्यम से मिली है।
घायलों में 13 भारतीय भी शामिल
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर मक्का में भारत के आपातकालीन और टोल फ्री नंबर भी जारी किए हैं। मक्का में भारत का आपातकालीन नंबर 00966125458000 और 00966125496000 है, जबकि हाजियों के लिए टोल फ्री नंबर 8002477786 है।
मक्का भगदड़ में मरने वाले भारतीयों में गुजरात के 9, झारखंड और तमिलनाडू के 2-2, महराष्ट्र का एक हाजी शामिल है। सऊदी अरब में जेद्दा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास के हज मिशन ने मृतकों और घायलों की सूची जारी की है।
घायलों में जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल के 2-2, लक्षदीप, असम, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, बिहार, ओडिशा, केरल व यूपी का 1-1 हाजी है। सरकार ने कहा है कि वो मक्का में हादसे के बाद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
अब तक 700 से ज्यादा लोगों की मौत
गौरतलब है कि गुरुवार को मक्का में हज यात्रा के दौरान भगदड़ मचने से 717 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 805 लोग घायल हुए थे। 20 दिन के अंदर मक्का में हुआ यह दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले 10 सितंबर को क्रेन हादसे में भी सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी।
सऊदी अरब के मक्का में हज यात्रा 22 सितंबर से 26 सितंबर के बीच पूरी की जाएगी। इस दौरान इस्लाम धर्म के पांच पवित्र खंभों की यात्रा की जाती। पूरी दुनिया से 20 लाख हज यात्रा में शामिल होने के लिए मक्का पहुंच चुके हैं। कई लोग हज यात्रा कर लौट भी चुके हैं।
हज के दौरान शैतान को पत्थर मारने की परंपरा सबसे खतरनाक मानी जाती है क्योंकि पत्थर निशाने पर लगे, इसके लिए हज यात्रियों में होड़ लगी रहती है। अक्सर ऐसा होता है कि कमजोर लोग गिर जाते हैं। माना जा रहा है कि इस पत्थर मारने की परंपरा के दौरान ही यह हादसा हुआ।