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'मेरी बेटी सीरिया गई है, पता नहीं वो उसके साथ क्या करेंगे?'

Mon, 22 Feb 2016 08:31 AM IST
Updated Mon, 22 Feb 2016 08:31 AM IST
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13 year old Pakistani Girl goes islamic state syria

13 साल की खानसा लाहौर के एक स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ती थीं। एक साधारण बच्ची, कुछ संवेदनशील, कुछ जिद्दी पर मां की हर बात मानने वाली।पांच बहन-भाइयों में सबसे बड़ी होने की वजह से खानसा मां की आंखों का तारा थीं।

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खानसा की शुरुआती परवरिश अपने ददिहाल में हुई। लेकिन पिता के गुजरने के बाद वो अपनी मां के साथ ननिहाल चली आईं। लेकिन अपनी दादी और बुआ के खानदान से उनके लगाव में कमी न आई।
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और फिर यही लगाव नासमझ खानसा की जिंदगी में ऐसा तूफान लेकर आया कि बचपन भी भूला और गुड़िया भी छूटी। वह मां के आंचल से भी दूर हुईं और भाई-बहन से भी बिछड़ गईं।

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ये सुनकर मां का गला भर आया

13 year old Pakistani Girl goes islamic state syria

छह महीने पहले एक दिन उनकी दादी फातिमा बीबी ज‌िद करके उन्हें साथ ले गईं। फिर खबरें आईं कि खानसा इस्लामिक स्टेट में शामिल होने के लिए फरहाना नाम की महिला के साथ सीरिया जा चुकी हैं।

ये कहानी सुनाते हुए बार-बार खानसा की मां की आंखें नम हो रही थीं और कई बार तो उनका गला भर आया।उन्होंने बताया कि खानसा की बुआ इरशाद बीबी 2014 की शुरुआत में अपने दो बेटों और बहू के साथ अचानक सीरिया जा बसीं।

खानसा की मां के मुताबिक, लापता होने के बाद खानसा की बुआ के बेटे ने सीरिया से लाहौर में अपनी बहन को बताया कि खानसा उनके पास पहुँच गई हैं।

खलीफा पर विश्वास जताने को मां-बाप की इजाजत जरूरी नहीं

13 year old Pakistani Girl goes islamic state syria

"मुझे तो कुछ मालूम ही नहीं कि सीरिया क्या है और कहां है। मेरा उनसे झगड़ा था इसलिए मैंने कभी दिलचस्पी नहीं ली। पर खानसा महीने में एक-दो बार अपनी दादी और बुआ की बेटी अमारा से मिलने जाती थीं, जहां वो इंटरनेट पर सीरिया में अपनी बुआ इरशाद से बात करती थीं। बस वहीं उसका दिमाग खराब किया गया।"

खानसा अपनी बुआ इरशाद की सहेली फरहाना के साथ सीरिया गईं। क्या वह अपनी मर्जी से गईं? क्या उन्हें जबर्दस्ती ले जाया गया या मजहब के नाम पर बरगलाया गया?

खानसा की मां कहती हैं, "मेरी बच्ची की उम्र 13 साल थी। इस उम्र में बच्चों को समझ ही क्या होती है। हां, खानसा ने मुझसे एक-दो बार बहस की कि बैत करना (खलीफा पर विश्वास जताना) जरूरी होता है और इसके लिए मां-बाप की इजाजत की जरूरत भी नहीं होती?"

पाक से 100 लोग गए सीरिया

13 year old Pakistani Girl goes islamic state syria

"मैं उससे पूछती थी कि बैत क्या होता है?" खानसा की मां कहती हैं, "मुझे तो खुद भी पता नहीं कि बैत क्या होता है। लेकिन इस छोटी सी बच्ची का इंटरनेट पर इतना दिमाग खराब हुआ कि वह खुद सीरिया चली गई।"

खुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले संगठनों की मौजूदगी को पाकिस्तान में सरकारी स्तर पर काफी समय से झुठलाया जाता रहा है। सितंबर में लाहौर की तीन महिलाओं के सीरिया जाने की खबर सामने आने पर भी इसका खंडन किया गया और फिर पंजाब प्रांत के कानून मंत्री राना सनाउल्ला ने पुष्टि की कि पाकिस्तान से लगभग 100 लोग चरमपंथी संगठन आईएस में शामिल में होने के लिए सीरिया गए हैं।

अब एक संसदीय समिति में पाकिस्तान की सिविल इंटेलिजेंस एजेंसी आईबी के प्रमुख ने बताया कि पाकिस्तान में इस्लामिक स्टेट का नेटवर्क है और देश के कई धार्मिक संगठन भी इसकी सोच का समर्थन करते हैं।

किसी को नहीं जानकारी कैसे गए सीरिया

13 year old Pakistani Girl goes islamic state syria

आईएस से संबंध रखने के संदेह में कई लोगों की गिरफ्तारियों की खबरें भी मीडिया में आती रही हैं। हालांकि खानसा इरशाद बीबी, फरहाना और बशरी चीमा को सीरिया जाने पर किसने मजबूर किया? किसने उन्हें आर्थिक मदद दी? किसने यात्रा के दस्तावेज बनवाने और सीरिया जाने का रूट चुनने में मदद की?

पाकिस्तान में इनके मददगार कौन थे? सीरिया में वह किसके पास गईं और वहां जाकर उनकी गतिविधियां क्या थीं? इस बारे में कोई साफ जानकारी नहीं है।

खानसा की मां को इससे कोई मतलब नहीं। वह तो बस चिंतित हैं अपनी बेटी को लेकर। वो कहती हैं, "पता नहीं मेरी बच्ची कहां है और किस हाल में है।

पता नहीं वो उसके साथ क्या करेंगे। कहीं वो जबर्दस्ती उसका निकाह न कर दें। कल को वह मां बनकर मेरे दरवाजे पर आई, तो मैं उसे कुबूल नहीं करूंगी।"

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