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13 लेखक-कलाकार लौटाएंगे अकादमी पुरस्कार, रुश्दी भी साथ

Tue, 13 Oct 2015 08:57 AM IST
Updated Tue, 13 Oct 2015 08:57 AM IST
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12 author and artist refund Academy Awards

देश में बढ़ रहे सांप्रदायिक जहर और असहिष्णुता के खिलाफ उठती आवाज में बुकर पुरस्कार विजेता सलमान रुश्दी का भी स्वर शामिल हो गया है। रुश्दी ने ट्वीट कर साहित्यकारों द्वारा प्रकट किए जा रहे विरोध के प्रति एकजुटता जाहिर की है।

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वहीं, 11 और साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार और एक कलाकार ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार वापस करने की घोषणा की है। इस बीच सबसे निशाने पर आई साहित्य अकादमी ने 23 अक्तूबर को एक्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक बुलाई है।
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सोमवार को कश्मीरी लेखक गुलाम नबी ख्याल, उर्दू उपन्यासकार रहमान अब्बास, कन्नड़ लेखक-अनुवादक श्रीनाथ डीएन तथा जीएन रंगनाथ राव व हिंदी लेखक मंगलेश डबराल और राजेश जोशी ने अकादमी पुरस्कार वापस करने का एलान किया।
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पंजाबी लेखकों डॉ. वरियाम संधू, डॉ. सुरजीत पातर, बलदेव सिंह सड़कनामा, जसविंदर सिंह और दर्शन बुट्टर ने भी अकादमी पुरस्कार लौटाने की बात कही है। इस सूची में जानी मानी थियेटर कलाकार माया कृष्ण राव का भी नाम शामिल हो गया है।

उन्होंने दादरी घटना के विरोध में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार लौटा दिया है। राव ने अकादमी की सचिव हेलेन आचार्य को पत्र लिखकर नागरिकों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने में सरकार की नाकामी के प्रति निराशा जताई है।

असुरक्षित और डरा हुआ महसूस कर रहे हैं साहित्यकार

12 author and artist refund Academy Awards

लेखकों ने चेताया है कि देश में संप्रदायवाद का जहर फैल रहा है और लोगों को बांटने का खतरा बढ़ता जा रहा है। ख्याल ने कहा है कि अल्पसंख्यक देश में असुरक्षित और डरा हुआ महसूस कर रहे हैं।

उन्हें अपना भविष्य निराशाजनक लग रहा है। ख्याल पहले कश्मीरी लेखक हैं, जिन्होंने देश के किसी और हिस्से में हुई घटना के लिए अपना साहित्यिक पुरस्कार वापस किया है।

रहमान अब्बास ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि दादरी घटना के बाद उर्दू लेखक बेहद दुखी हैं। अपने आस-पास हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़े होने का यही सही समय है।

डबराल और जोशी ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि पिछले एक साल में हिंदूवादी ताकतों द्वारा लोकतंत्र के आधार मूल्यों, अभिव्यक्ति की आजादी और हमारी इच्छा के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता पर हमला हुआ है। अकादमी को कालबुर्गी की हत्या की सार्वजनिक आलोचना करनी चाहिए।

दूसरी ओर अकादमी के अधिकारियों ने बताया कि उन्हें अभी तक केवल उदय प्रकाश, जीएन देवी, अमन सेठी, वरयाम संधू और जीएन रंगनाथ राव से ही पुरस्कार लौटाने के बारे में सूचना मिली है।

इन्होंने तोड़ा पुरस्कार से नाता

12 author and artist refund Academy Awards

गुलाम नबी ख्याल, रहमान अब्बास, श्रीनाथ डीएन, जीएन रंगनाथ राव, मंगलेश डबराल, राजेश जोशी, डॉ. वरियाम संधू, डॉ. सुरजीत पातर, बलदेव सिंह सड़कनामा, जसविंदर सिंह, दर्शन बुट्टर और माया कृष्ण राव।

मैं साहित्य अकादमी का विरोध कर रहीं नयनतारा सहगल और दूसरे सभी लेखकों का समर्थन करता हूं। भारत में स्वतंत्र अभिव्यक्ति के लिए खतरे का समय।
- सलमान रुश्दी का ट्वीट
कलम की जगह नई तरह की गोलियां चल रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार को कालबुर्गी के हत्यारों के खिलाफ तेजी से कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हो।
- श्रीनाथ, कन्नड़ अनुवादक
लेखकों पर हमले हो रहे हैं और उनकी हत्या तक कर दी जा रही है लेकिन सरकार मौन है। दादरी की घटना के बाद केंद्र सरकार का रवैया बताता है कि यह देश फांसीवाद की ओर बढ़ रहा है।
- राजेश जोशी, हिंदी कवि और लेखक

विचारों और शब्दों की आजादी पर हमला किसी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विचार-शब्द का मुकाबला विचारों और शब्दों से ही होना चाहिए।
- डॉ. सुरजीत पातर, पंजाबी साहित्यकार

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