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विरोध का दौर खत्म, 10 लेखक वापस लेंगे साहित्य अकादमी पुरस्कार

Fri, 22 Jan 2016 01:43 PM IST
Updated Fri, 22 Jan 2016 01:43 PM IST
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10 writers agreed to accept awards they returned in protest of intolerance

देश में बढ़ी असहिष्णुता के विरोध में साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा चुके 10 साहित्यकारों ने साहित्य अकादमी की अपील पर अपने पुरस्कार वापस लेने की घोषणा की है। पुरस्कार वापस लेने वालों में प्रख्यात लेखिका नयनतारा सहगल भी शामिल हैं।

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उल्लेखनीय है कि दिल्ली के नजदीक दादरी में गोमांस रखने की आशंका में 50 वर्षीय मुसलमान अखलाक की हत्या, उससे पहले कर्नाटक में तर्कवादी एमएम कलबुर्गी और महाराष्ट्र में नरेंद्र दाभोलकर की हत्या किए जाने के विरोध में लेखकों और संस्कृतिकर्मियों ने अपने पुरस्कार लौटा दिए थे।
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नयनतारा सहगल उन शुरुआती सहित्यकारों में थी, जिन्होंने पत्र लिखकर कलबुर्गी समेत सभी हत्याओं पर विरोध जताया। बाद में इस मुहिम में फिल्मकार और पेंटर भी शामिल हो गए। हालांकि मोदी सरकार उस विरोध लगातार ही प्रायोजित बताती रही। उन्हीं दिनों बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे थे, केंद्र के मंत्रियों और भाजपा के नेताओं ने कहा कि चुनाव में विपक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए पुरस्कार वापसी की मुहिम चलाई जा रही है।
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अशोक वाजपेयी अब भी अपने रुख पर कायम

10 writers agreed to accept awards they returned in protest of intolerance

नयनतारा सहगल ने सहित्य अकादमी के उस तर्क को मानते हुए अपना पुरस्कार वापस लेने पर सहमति जताई, जिसमें संस्‍थान ने कहा था कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे वह साहित्यकारों द्वारा लौटाए गए पुरस्कार वापस ले सके।

उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्‍स से बातचीत में बताया कि साहित्य अकादमी ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि एक बार दिया जा चुका पुरस्कार वापस लेना उनकी नीति में नहीं है, इसलिए इसे वे लेखक को वापस भेज रहे हैं।

नंद भरद्वाज ने कहा कि लेखकों के विरोध के बाद साहित्य अकादमी ने जैसा उत्तर दिया, वह संतोषजनक था। भरद्वाज ने असहिष्‍णुता के विरोध में पुरस्कार समेत 50,000 रुपए का चेक वापस कर दिया था।

हालांकि, पुरस्कार वापसी की मुहिम का सर्वाधिक चर्चित चेहरा रहे अशोक वाजपेयी अब भी अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी ने उन्हें भी पत्र लिखा था, लेकिन मुझे नहीं लगता कि पुरस्कार वापस लेने के अब भी पर्याप्त कारण हैं।

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