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10 वजहें जिनसे फडनवीस को मिली कमान
वेदविलास उनियाल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 11 Nov 2014 10:22 AM IST
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महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के तौर पर देवेंद्र फडनवीस के नाम का चयन किया गया है। राज्य में पहली बार भाजपा का नेता मुख्यमंत्री बन रहा है। देवेंद्र फडनवीस के अलावा विधानसभा विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से, सुधीर मुनगंटीवार, पंकजा मुंडे और विनोद तावड़े मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे।
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बीच-बीच में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के नाम की चर्चा भी चलती रही। लेकिन आखिर देवेंद्र फडनवीस के नाम पर ही सहमति हुई। महाराष्ट्र में भाजपा के अंदर ही एक वर्ग देवेंद्र फडनवीस के नाम पर असहमत था कि वह विदर्भ क्षेत्र से हैं, आने वाले समय में अलग विदर्भ बनने पर पश्चिम महाराष्ट्र में खासकर मराठा नेता की जरूरत होगी।
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जातीय समीकरण पर उनका ब्राह्मण होना भी आड़े आ रहा था। साथ ही यह दलील भी दी जा रही थी कि वह सक्षम नेता हैं लेकिन उनके पास प्रशासन का कम अनुभव है। भाजपा नेतृत्व ने इन बातों को तवज्जो न देकर आखिर उनपर ही भरोसा जताया। देश के सबसे युवा महापौर का रिकार्ड बनाने वाले देवेंद्र फडनवीस अब महाराष्ट्र में भाजपा का पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।
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आखिर महाराष्ट्र भाजपा के सभी बड़े नेता उनके नाम के प्रस्ताव के समय सहमत दिखे। वह दस मुख्य कारण जिनकी वजह से भाजपा में देवेंद्र फडणवीस के नाम के लिए सहमति बनी
1-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में देवेंद्र फडनवीस को ही मुख्यमंत्री बनाए जाने के इच्छुक थे। उन्होंने राज्य विधानसभा चुनाव के समय अपनी सभाओं में कई जगहों पर देवेंद्र फडनवीस की प्रशंसा भी की थी। संघ को भी उनके नाम को लेकर किसी तरह का एतराज नहीं था। फडनवीस के अलावा राज्य भाजपा में जिन नेताओं के नाम इस पद के लिए चल रहे थे, उनमें नितिन गडकरी के अलावा दूसरे नेताओं का कद इतना बड़ा नहीं था। इससे भाजपा को किसी असंतोष होने या नाराजगी की दिक्कत नहीं थी।
2-केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बारे में भी उनके समर्थकों ने आवाज उठाई। एक बार नितिन गडकरी नागपुर संघ मुख्यालय गए तो चर्चा को भी बल मिला। लेकिन कहा जाता है कि प्रधानमंत्री उन्हें केंद्र में ही रखना चाहते हैं। साथ ही नितिन गडकरी ने साफ शब्दों में कहा कि वह राज्य में लौटने के इच्छुक नहीं है।
3-राज्य में पश्चिम महाराष्ट्र की राजनीति हावी रही। वहीं से नेता मुख्यमंत्री भी बनते रहे। उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ के नेता मुख्यमंत्री नहीं बने। भाजपा का विदर्भ में आधार है। साथ ही जिस तरह हरियाणा में गैर जाट को मुख्यमंत्री बनाया गया है उसी तरह यहां भी गैर मराठा का कार्ड चला गया है।
4-देवेंद्र फडनवीस राज्य की राजनीति में कांग्रेस और राकांपा के मुखर आलोचक के तौर पर रहे हैं। उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया। इससे भाजपा नेताओं में उनकी खास पहचान बनी। कार्यकर्ताओं के बीच जाने गए। यहां तक कहा गया कि वह गोपीनाथ मुंडे के बाद सबसे ज्यादा चर्चित नेता के तौर पर उभरे हैं।
5-स्व. गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे राज्य की राजनीति में उभरता हुआ नाम है। मराठवाड़ा क्षेत्र में वह अपने पिता के कामकाज को एक दशक से देख रही हैं। लेकिन अभी राजनीति का कम अनुभव और उम्र इस पद के लिए आड़े आई। बेशक वह फडनवीस मंत्रिमंडल में बेहद अहम मंत्री के तौर पर होंगी।
6-भाजपा अगर कहीं शिवसेना का ख्याल रख रही हो, तो नितिन गडकरी या सुधीर मुनगंटीवार के नाम पर दिक्कत हो सकती थी। लेकिन आगे किसी तरह का मेलजोल की गुंजाइश हो तो देवेंद्र फडनवीस के साथ ऐसा वातावरण बन सकता है। देवेंद्र फडनवीस गडकरी खेमे के नहीं हैं।
7-विदर्भ क्षेत्र का मुख्यमंत्री बनने पर फिलहाल अलग विदर्भ राज्य की मांग तूल नहीं पकड़ेगी। भाजपा को इस मसले पर कुछ वक्त मिल सकता है। मराठा मुख्यमंत्री बनने पर या पश्चिम महाराष्ट्र के किसी नेता को कमान सौंपने पर अलग विदर्भ की मांग तूल पकड़ सकती थी।
8-देवेंद्र फडनवीस को सहज नेता माना जाता है। कार्यकर्ताओं से उनका संपर्क बना रहता है। अपेक्षा की जा रही है कि वह उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ के अनसुलझे मसलों पर ध्यान दे सकते हैं। खासकर महाराष्ट्र में सिंचाई, पानी , किसानों की समस्याएं यहां ज्यादा हैं।
9-भाजपा में विनोद तावड़े एकनाथ खड़से जैसे मराठा नेता है, पर वह शरद पवार के समक्ष नहीं ठहरते। इसलिए भाजपा की नीति गैर मराठा पर शक्ति लगाने की थी। उसमें वह सफल रही। अब नेतृत्व भी सौंपा गया है।
10-भाजपा ने राज्य में बदलाव का संकेत देना चाहा है। परंपरागत राजनीति से हटकर उसके फैसले में कई संदेश निहित हैं।