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10 सवाल जो मोदी-ओबामा से जरूर पूछे जाने चाहिए थे

Tue, 27 Jan 2015 04:32 PM IST
Updated Tue, 27 Jan 2015 04:32 PM IST
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10 Questions Modi and Obama Should Have Been Asked

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मीडिया का सामना तो किया पर उसने वो 10 सवाल नहीं पूछे जो पूछे जाने चाहिए थे।

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भारतीय मीडिया ने एक ऐसा मौका गवां दिया जब अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों को उठाते हुए प्रश्न पूछे जा सकते थे। जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने हैं तब से उनसे जरूरी प्रश्न नहीं पूछे जा रहे हैं।
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वरिष्ठ पत्रकार सिद्घार्थ वरदराजन ने ऐसे 10 प्रश्न पूछे हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से पूछे जाने चाहिए थे। एनडीटीवी डॉट कॉम में लिखे एक लेख में उन्होंने यह 10 प्रश्न उठाए हैं।
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प्रश्न 1- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा जाना चाहिए कि न्यूक्लियर डील को लेकर भारत और अमेरिका में हुए समझौते के बाद अमेरिकी कंपनियों से क्या वायदा किया गया है? क्या यह सच है कि अगर परमाणु हादसा होता है तो क्या पीड़ित भारतीय लोग अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ नुकसान की भरपाई का मुकदमा नहीं कर पाएंगे?

क्या कहता है अमेरिकी कानून?

10 Questions Modi and Obama Should Have Been Asked

प्रश्न 2- बराक ओबामा से पूछा जाना चाहिए था कि अमेरिकी कानून से मुताबिक परमाणु हादसे के समय आपूर्ति करने वाले के खिलाफ मुकदमा किया जा सकता है। पर अमेरिकी सरकार यह क्यों चाहती है कि भारतीय कानून में इस तरह का प्रावधान नहीं होना चाहिए। अमेरिका में परमाणु हादसे को लेकर परमाणु न्यूक्यिलर आपूर्ति करने वालों के खिलाफ जब कैलिफोर्निया की अदालत में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है तो भारत में ऐसा कानून बनने से अमेरिकी सरकार को क्यों चिंता है? कैलिफोर्निया की अदालत में फुकुसिमा हादसे को लेकर जनरल इलेक्ट्रिक के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है।

प्रश्न 3- प्रधानमंत्री मोदी से पूछा जाना चाहिए कि वर्ष 2008 में आपकी पार्टी इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील का विरोध कर रही थी। वर्तमान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इंडो-यूएस न्यूक्लियर डील पर सवाल उठाए थे। सुषमा स्वराज ने उस समय कहा था कि बीजेपी सरकार इस समझौते को दूसरी तरह से करेगी। अब आप वही समझौता कर रहे हैं। इस समय आपके दिमाग में क्या प्रश्न है जो आप इस समझौते में बदलना चाहेंगे।

क्या अमेरिका इजरायल पर प्रतिबंध लगाएगा?

10 Questions Modi and Obama Should Have Been Asked

प्रश्‍न-4 ओबामा से पूछा जाना चाहिए कि यूक्रेन की संप्रभुत्ता के उल्लघंन को लेकर रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। क्या अमेरिका इजरायल के ऊपर कोई प्रतिबंध लगाएगा। क्योंकि फिलिपींस की सीमाओं में अवैध अतिक्रमण को लेकर कोई प्रश्न उठाया जाएगा।

प्रश्‍न-5 मोदी से पूछा जाना चाहिए कि क्रीमिया को लेकर रूस और यूक्रेन में चल रहे आपसी विवाद को लेकर आपकी राय है?

प्रश्‍न-6 मोदी और ओबामा दोनो से पूछा जाना चाहिए कि क्लाइमेंट चेंज पर पेरिस एग्रीमेंट को लेकर लेकर दोनों देशों ने इस बारे में अभी तक क्या सोचा है? इस नए समझौते से क्या फायदा होने वाला है?

प्रश्‍न-7 ओबामा से पूछा जाना चाहिए था कि पूरी दुनिया ने सीनेट की रिपोर्ट में देखा कि सीआईए किस तरह से कैदियों का उत्पीड़न करती है। क्या ओबामा सरकार उन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी? क्या अमेरिका के कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मंजूरी देते हैं?

मोदी क्यों नहीं करते आरआरएस की आलोचना?

10 Questions Modi and Obama Should Have Been Asked

प्रश्‍न-8 मोदी से पूछा जाना चाहिए था कि आप कह चुके हैं कि राष्‍ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े होने पर आपको को गर्व है। जब से आप प्रधानमंत्री बने हैं तब से आरआरएस और आपकी पार्टी के सांसदों ने ऐेसे बयान दिए हैं जिससे भारतीय मुस्लिमों और ईसाइयों अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। क्या आप ऐसी गतिविधियों से सहमत हैं? यदि नहीं सहमत हैं तो क्यों आपने सीधे तौर पर या फिर पब्लिक में जानकर इस तरह के लोगों की ‌आलोचना क्यों नहीं की है?

प्रश्‍न-9 ओबामा से पूछा जाना चाहिए था कि आपकी सरकार और पहले की सरकार ने नरेंद्र मोदी को वीजा देने से मना कर दिया था। उस समय भी मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। क्या आपको लगता है कि आपने उस समय गलती की थी? आपकी सोच में तब बदलाव आया जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री बन गए और आपको लगा कि अगर अब वीजा नहीं दिया गया तो भारत और अमेरिका के बीच होने वाले समझौतों पर असर पड़ेगा?

प्रश्‍न-10 मोदी से पूछा जाना चाहिए था कि आपकी सरकार ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश देश समेत कई अन्य अध्यादेश पास किए हैं। भूमि अधिग्रहण अध्यादेश में कॉरपोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए बदलाव किया गया है। अगर भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव करने की बहुत ज्यादा जरूरत थी तो आपने सरकार में आने के बाद ही क्यों नहीं संबंधित मसौदे को लोगों तक पहुंचाया ? कम से कम इस अध्यादेश को पारित करवाने से पहले लोकसभा और सामान्य जनता के एक बीच में एक बहस तो करवा ही जा सकती थी।

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