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जोगी की सीट पर एक नाम के 11 उम्मीदवार

Fri, 28 Mar 2014 02:33 PM IST
Updated Fri, 28 Mar 2014 02:33 PM IST
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10 namesakes on mahasamund seat
छत्तीसगढ़ में 'चंदू' एक बेहद प्रचलित नाम है। इसी तरह 'साहू' उपनाम वालों की भी यहां कमी नहीं है। लेकिन अगर संसद में एक सीट के लिए छत्तीसगढ़ के महासमुंद संसदीय क्षेत्र से चंदू साहू नाम के 11 प्रत्याशी खड़े हों, तो यह जरूर चौंकाने वाली खबर है। इससे भाजपा के भी कान खड़े हो गए हैं।
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नाम के पीछे छिपे इस खेल के लिए भाजपा भूतपूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी को जिम्मेदार ठहरा रही है। महासमुंद सीट पर 17 अप्रैल को मतदान होना है। इस सीट के लिए अजित जोगी समेत 38 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनावी मैदान पर हैं।
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बीते बृहस्पतिवार को नामांकन का अंतिम दिन था। लगने लगा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (जोगी) भी इन चुनावों के लिए अपनी कमर कस चुके हैं।

जोगी पर इल्जाम

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महासमुंद सीट के लिए भाजपा के उम्मीदवार निवर्तमान सांसद चंदू लाल साहू हैं। मजे की बात है कि इन 38 प्रत्याशियों में से 5 का नाम चंदू लाल साहू है। जबकि दूसरे 6 उम्मीदवारों का नाम चंदू राम साहू है। भारतीय जनता पार्टी नामों के पीछे छिपे खेल को अजित जोगी के दिमाग की उपज बता रही है।

भाजपा के प्रवक्ता शिवरतन शर्मा का कहना है, ''मिलते-जुलते नामों वाले 11 उम्मीदवारों का होना, वोटर्स को धोखे में डालने की साजिश है। अजित जोगी का यह कदम उनकी हताशा को दिखाता है।''वहीं जोगी इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं।

अजित जोगी का कहना है, ''मैं चुनाव प्रचार में इतना ज्यादा व्यस्त हूं कि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अगर भाजपा को कोई भी आपत्ति है तो वह चुनाव आयोग के दरवाजे खटखटा सकती है।'' अपने अगले अभियान पर निकलने से ठीक पहले जोगी ने यह बयान दिया था।

चुनाव अधिकारी भी हैरान

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चंदू साहू के मामले ने चुनाव अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है। मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के एक प्रतिनिधि कहते हैं, ''तकरीबन एक जैसे नाम वाले 11 प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह और संख्या आवंटित करते समय हमें सतर्कता बरतनी होगी।''

गौरतलब है कि जोगी ने 2004 में यह सीट जीती थी। 2009 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था। 2013 के विधान सभा चुनावों में महासमुंद के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से 6 में भाजपा को और कांग्रेस को एक ही सीट पर जीत मिल सकी थी।

महासमुंद संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के कुल मतदाताओं में से 36 फीसदी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), 28 फीसदी अनुसूचित जाति (एससी) और 27 फीसदी अनुसूचित जनजाति (एसटी) के हैं।

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