आप के दस जांबाज, जिनके बल पर जीती जंग
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का रण जीत लिया है। पार्टी ने भले ही अरविंद केजरीवाल के नायकत्व और लोकप्रियता के बल पर चुनाव जीत लिया हो लेकिन खुद अरविंद केजरीवाल आप को 'वन मैन पार्टी' नहीं मानते। दरअसल दिल्ली के रण को जीतने में अकेले अरविंद केजरीवाल ने पसीना नहीं बनाया है।
प्रचार- प्रसार और पार्टी की रणनीति बनाकर उसे जनता तक पहुंचाने में केजरीवाल और उनके नौ अहम सिपहसालारों की बड़ी भूमिका रही है। भले ही शाजिया इल्मी और किरण बेदी जैसे लोग केजरीवाल से छिटक कर भाजपा में शामिल हो गए लेकिन पार्टी के कई ऐसे सदस्य रहे जिन्होंने आप को दिल्ली में प्रचंड बहुमत दिलाया।
अरविंद केजरीवाल
पार्टी के संस्थापक और लोकपाल आंदोलन के रचयिता केजरीवाल आम आदमी होते हुए आप के खास हैं। पार्टी के संयोजक होने के साथ साथ केजरीवाल पार्टी के मुख्य स्तंभ हैं। एक आम आदमी की छवि रखने वाले और जनता की सही नब्ज पहचानने वाले केजरीवाल दिल्ली की जनता के हीरो बन गए हैं।
लोकपाल आंदोलन के बाद जब केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का गठन किया तो कुछ ही लोग उनके साथ आए। अधिकतर लोगों ने उन्हें लोकपाल आंदोलन का विश्वासघाती और अवसरवादी कहा। लेकिन केजरीवाल ने विरोधियो की बातों पर ध्यान न देकर आम आदमी पार्टी का गठन किया। उनके साथ कुछ लोग आए और केजरीवाल ने घर घर जाकर प्रचार किया।
धरनों की राजनीति का मास्टर कहा जाने वाला ये आम आदमी बिलकुल नए अंदाज की राजनीति करेत हुए चर्चा में आया। 2013 में 49 दिन की सरकार के बाद जब केजरीवाल दोबारा जनता के बीच आए तो उन्हें राजनीति समझ आने लगी थी। जीतोड़ मेहनत और बड़ी बड़ी राजनीतिक पार्टिंयों के आगे टिककर लड़ने का माद्दा रखने वाले ये आम आदमी आज दिल्ली में सरकार बनाने जा रहा है।
कुमार विश्वास
'कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है...'पेशे से लेक्चरर और कवि कुमार विश्वास लोकपाल आंदोलन के समय से केजरीवाल के साथ हैं। कुमार विश्वास ने लोकपाल आंदोलन के दौरान अपने जोशीले भाषणों और कविताओं के दम पर भारी भीड़ जुटाई। हालांकि जब केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के गठन की बात कही तो सबसे पहला विरोध कुमार विश्वास ने ही किया था। लेकिन बाद में कुमार विश्वास ने आप के टिकट पर अमेठी से चुनाव लड़ा।
विश्वास का मोदी प्रेम
लोकसभा चुनावों में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद कुमार विश्वास ने कई बार मोदी की तारीफ की जिससे लगने लगा था कि विश्वास भाजपा का दामन थाम सकते हैं लेकिन इन अटकलों के बावजूद कुमार विश्वास केजरीवाल के साथ बने रहे और दिल्ली विधानसभा चुनाव में जमकर पार्टी का प्रचार किया।
पार्टी में भी कुमार विश्वास के मोदी प्रेम को लेकर यदा कदा उंगलियां उठती रही हैं लेकिन खुद कुमार विश्वास का कहना है कि वो मोदी की तारीफ बतौर प्रधानमंत्री करते हैं और इसमें कोई बुराई नहीं। जहां तक नीतियों की बात है कुमार विश्वास का कहना है कि जिस लक्ष्य को लेकर वो केजरीवाल के साथ खड़े थे, उस लक्ष्य तक पहुंचे बिना वो पार्टी का साथ नहीं छोड़ सकते।
आपको मालूम होगा कि अपनी क्रांतिकारी कविताओं और लच्छेदार भाषा शैली के दम पर कुमार विश्वास ने जनता के बीच अन्ना आंदोलन की एक सही तस्वीर पेश की थी। 2012 से अब तक कुमार विश्वास आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य भी हैं और कई गंभीर मसलों पर केजरीवाल उनसे रायशुमारी भी करते रहे हैं।
किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने से कुमार विश्वास खासे भड़क गए थे। उन्होंने कई चैनलों पर किरण बेदी पर विश्वासघात का आरोप तक लगा डाला। इसके चलते कुमार विश्वास के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई।
योगेंद्र यादव
आम आदमी पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले योगेंद्र यादव राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। योगेंद्र यादव पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं और केजरीवाल के विश्वस्त सहयोगी माने जाते हैं। यादव 2010 में शिक्षा के अधिकार पर बनी कानून की परामर्श समिति के सदस्य थे। वे यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के सदस्य भी रह चुके हैं।
मुख्यतौर पर सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक यादव लोकपाल आंदोलन के दौरान केजरीवाल के साथ आए और पार्टी के संस्थापक सदस्य बने। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने उन्हें मुख्यंमत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था।
हरियाणा विधानसभा चुनाव में आप की हार के बाद पार्टी के कुछ सदस्यों ने हार का ठीकरा योगेंद्र यादव के सिर पर फोड़ा था जिसके बाद यादव और केजरीवाल में मनमुटाव की खबरें आई थी। योगेंद्र यादव ने यहां तक कह दिया था कि आप व्यक्तिवाद का शिकार होती जा रही है।
हरियाणा में हार की जिम्मेदारी लेते हुए यादव ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर एक तरह से केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा तक खोल लिया था। हालांकि बाद में आपसी सुलह के बाद यादव के सुर नरम पड़ गए थे।
लोकसभा चुनावों में योगेंद्र यादव हरियाणा की गुड़गांव लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। योगेंद्र यादव ने ही दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप पार्टी को 50 से ज्यादा सीटें मिलने की बात कही थी।
मनीष सिसौदिया
लक्ष्मण की तरह हमेशा अरविंद केजरीवाल के साथ बने रहने वाले मनीष सिसौदिया पार्टी के सबसे विश्वस्त सदस्य हैं। सामाजिक और राजनीतिक सरोकारों से जुड़ने से पहले मनीष जी न्यूज और ऑल इंडिया रेडियो में बतौर पत्रकार काम करते थे। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने 'कबीर' और 'परिवर्तन' नामक सामाजिक संस्था का संचालन किया। मनीष सक्रिय आरटीआई (सूचना का अधिकार अधिनियम) कार्यकर्ता भी रहे हैं।
मालूम हो कि मनीष लोकपाल आंदोलन के समय केजरीवाल से नहीं जुड़े बल्कि वो केजरीवाल के साथ 'सार्वजनिक हित अनुसंधान फाउण्डेशन' (Public Cause Research Foundation) नामक गैर सरकारी संगठन के सह-संस्थापक भी हैं जो लोकपाल आंदोलन से पहले गठित किया गया था। मनीष अरविंद की सलाह पर भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन के सदस्य बने लेकिन जब केजरीवाल ने आंदोलन छोड़ राजनीति में आने का निश्चय किया तो मनीष ने उनका साथ दिया।
आप की 49 दिन की सरकार में मनीष सिसौदिया मंत्री बने और उनके हिस्से शिक्षा मंत्रालय समेत उच्च शिक्षा, जन निर्माण विभाग (पी डब्ल्यू डी), शहरी विकास, स्थानीय निकाय, भूमि एवं भवन तथा रेवेन्यू विभाग आया।
लोकसभा चुनावों में बुरे प्रदर्शन के बाद जब एक एक करके सहयोगी केजरीवाल का साथ छोड़ते जा रहे थे तब मनीष ही थे जो केजरीवाल के साथ बने रहे और पार्टी की मजबूती के लिए काम करते रहे।
आशुतोष
IBN7 के पूर्व मैनेजिंग एडिटरआशुतोष जब अच्छी खासी नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए तो काफी प्रतिक्रिया हुई थी। दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान आशुतोष प्रचार प्रसार करने प्रमुख नेताओं में शामिल थे। केजरीवाल ने आशुतोष पर दांव खेला और लोकसभा चुनाव के दौरान चांदनी चौक से आषुतोष को टिकट दिया गया। हालांकि आशुतोष चुनाव हार गए लेकिन वो टीम के अहम हिस्से बन चुके हैं।
हालिया चुनावों के दौरान पार्टी के घोषणापत्र को बनाते समय भी आशुतोष से रायशुमारी की गई और उन्होंने पार्टी के चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झौंक दी। कहा जाता है कि फेसबुक और ट्विटर पर आशुतोष काफी सक्रिय रहते हैं और पार्टी का पक्ष रखने में सबसे आगे रहते हैं।
बताया जाता है कि लोकपाल आंदोलन की कवरेज करते हुए आशुतोष काफी प्रभावित हुए थे। उन्होंने अन्ना आंदोलन पर किताब भी लिखी थी।
आशीष खेतान
तहलका के पूर्व पत्रकार आशीष खेतान आप पार्टी के अहम सदस्य और पार्टी के प्रवक्ता हैं। आप ने अपना घोषणापत्र तैयार करने की जिम्मेदारी आशीष को दी और उन्हें 'मेनिफेस्टो कमिटी' का प्रमुख बनाया। कहा जाता है कि गुजरात दंगों के दौरान स्टिंग करने वाले आशीष खेतान ने ही आप पार्टी को राजनीति के असली गुर सिखाए। प्रचार प्रसार के तरीकों के साथ साथ चंदा एकत्र करने के तरीके भी आशीष द्वारा पार्टी को बताए गए।
यूं तो आशीष पार्टी कार्यकारिणी के सदस्य हैं लेकिन वो केजरीवाल के भी अहम सहयोगी हैं। आशीष, नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव ‘आप’ के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।
गोपाल राय
गोपाल राय आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों में से एक है। गोपाल राय यूं तो सामाजिक कार्यकर्ता हैं लेकिन वो लोकपाल आंदोलन के दौरान केजरीवाल से जुड़े। गोपाल राय आप के संस्थापक सदस्य हैं और पार्टी के अहम नेता माने जाते हैं।
इलाहाबाद विवि में छात्र जीवन की राजनीति के बाद गोपाल राय वामपंथी संगठन आइसा में सक्रिय हुए। लंबे समय से नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े राय दिल्ली में अन्ना आंदोलन के शुरू होने के साथ ही उससे जुड़े। जानकार कहते हैं कि केजरीवाल को पार्टी बनाने के लिए प्रेरित करने में राय की अहम भूमिका थी।
1999 में छात्र राजनीति आंदोलन के समय गोपाल राय की गर्दन में गोली मार दी गई थी। तबसे वो गोली गोपाल राय की गर्दन से नीचे रीढ़ की हड्डी में फंसी है। कई साल बिस्तर पर रहने के बाद गोपाल राय लोकपाल आंदोलन के समय सक्रिय हुए। आज भी राय के शरीर का दाहिना हिस्सा लकवाग्रस्त है. गोली अब भी उनकी रीढ़ में फंसी हुई है लेकिन इससे राय की राजनीतिक सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है।
सोमनाथ भारती
पेशे से वकील और सोमनाथ भारती आप पार्टी के कथित उग्र सदस्यों में शामिल सोमनाथ भारती 49 दिन की सरकार में प्रदेश के कानून मंत्री बनाए गए। सोमनाथ पार्टी के अहम नेताओं में गिने जाते हैं।
दिल्ली आईआईटी से एमएससी के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री लेने वाले सोमनाथ भारती 49 दिन की आप की सरकार के लिए परेशानी का सबब बने रहे। कभी खिड़की एक्सटेंशन में विदेशी महिलाओं पर 'रेड' का मामला तो कभी जजों की बैठक बुलाने का फरमान। सोमनाथ के कामकाज के तरीकों से विपक्षी दल हमेशा पार्टी पर हमले करते रहे।
राघव चड्ढा
दिल्ली का एक उत्साहित और युवा सीए राघव चड्ढा कुछ ही महीनों में आप पार्टी में खास हो गया है। उन्हें पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया है और पार्टी के पॉलिसी थिंक टैंक में भी राघव को जगह मिली है। राघव टीवी न्यूज चैनलों पर आप पार्टी की तरफ से बहस करते हुए दिखते हैं। पार्टी ने राघव को प्रवक्ता बनाकर यूथ वोट हासिल करने का जो प्लान बनाया वो कामयाब हुआ। राघव बेहद उम्दा वक्ता होने के साथ साथ एक सामाजिक कार्यकर्ता भी है।
हालिया चुनाव के दौरान नई दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी नुपूर शर्मा ने राघव चड्ढा पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था जिसके चलते राघव सुर्खियों में आ गए थे। पिछले दिनों दिल्ली में चर्च पर हमले के विरोध में मार्च निकालते वक्त राघव चड्ढा को गिरफ्तार किया गया था।