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पाकिस्तान का वो हमला जिसमें भारत के 10 विमान नष्ट हुए

Sun, 06 Sep 2015 09:04 PM IST
Updated Sun, 06 Sep 2015 09:04 PM IST
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10 aircraft destroyed in 1965 India Pakistan war

दिन छह सितंबर, 1965, समय दोपहर 4 बजे, स्थान पाकिस्तान का पेशावर एयरबेस। स्क्वार्डन लीडर सज्जाद 'नोजी' हैदर पठानकोट पर हवाई हमला करने के लिए अपने साथी पायलटों को ब्रीफ कर रहे थे। अचानक उन्होंने एक बाल्टी में ताजा पानी मंगाया और अपने ओवर ऑल से नंबर 4711 कोलोन की बोतल निकाल कर उसमें उड़ेल दी।

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फिर उन्होंने छोटे छोटे तौलिए मंगवाए और उन्हें सुगंधित पानी में डुबो कर साथी पायलटों को पकड़ा दिया। सज्जाद हैदर ने बीबीसी को बताया, "मैंने उनसे कहा "हो सकता है ये आपका एकतरफा मिशन हो और आप लौट कर वापस ही न आएं।
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मैं चाहता हूँ जब आप अपने बनाने वाले से मिले तो आपके अंदर से अच्छी खुशबू आनी चाहिए।" ठीक साढ़े चार बजे 8 सेबर जेटों ने पेशावर से टेक ऑफ किया। वो 11000 फ़ीट की ऊंचाई तक गए और फिर नीचे डाइव लगा कर पेड़ों की ऊँचाई पर उड़ने लगे।

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चेतावनी को अनदेखा

10 aircraft destroyed in 1965 India Pakistan war

उधर पठानकोट एयर बेस पर अमृतसर एयर बेस से स्कवार्डन लीडर दंडापानी का एक अर्जेंट टेलिफोन कॉल आया। उन्होंने विंग कमांडर कुरियन को बताया कि कुछ सेबर जेटों को टेक ऑफ करने के बाद रडार के पर्दे से गायब होते हुए देखा गया है।

ये आने वाले हमले के संकेत हैं। कुरियन ने स्टेशन कमांडर ग्रुप कैप्टेन रोशन सूरी को इस आशंका के बारे में बताया और उनसे कैप यानि कॉम्बैट एयर पेट्रोल की अनुमति मांगी। सूरी से यहां एक बड़ी ग़लती हुई। उन्होंने कैप की अनुमति नहीं दी।

मिग 21 आग की लपटों में
ठीक 5 बज कर 5 मिनट पर पाकिस्तानी सेबर पठानकोट के ऊपर पहुंचे। ऊपर से उन्होंने देखा कि एयरबेस पर बहुत बड़ी संख्या में भारतीय युद्धक विमान पार्क हैं। नोजी हैदर ने 500 मीटर की ऊंचाई से बहुत संभल कर डाइव लगाई और नीचे खड़े विमान पर निशाना लगा कर फ‌िक्स्ड गन से हमला किया।

फिर उन्हें नए नए आए दो मिग 21 दिखाई दिए। उस समय उनमें ईंधन भरा जा रहा था। उन्होंने उन पर निशाना लगा कर हमला किया और वो दोनों विमान आग की लपटों से घिर गए।

जहाज से नीचे कूदे

10 aircraft destroyed in 1965 India Pakistan war

बाकी के पायलटों ने भी डाइव लगा कर हमला किया। उन्हें सिर्फ दो बार हमला करने के आदेश मिले थे लेकिन कई विमानों को एक साथ देख उनके मुंह में पानी आ गया और उन्होंने हवाई ठिकाने पर कई हमले किए। उनका विरोध करने के लिए एक भी भारतीय विमान ऊपर नहीं आया।

सबसे ऊपर कवर दे रहे विंग कमांडर तवाब ने नीचे कम से कम 14 आग के गोले फैलते हुए देखे। विंग कमांडर कुरियन अपने घर से सटे गैरेज में अपनी गाड़ी पार्क कर रहे थे कि उन्हें विमानभेदी तोपों के गरजने की आवाज सुनाई दी।

उन्होंने एयरबेस की तरफ नजर दौड़ाई तो देखा चार सेबर नीचे उड़ते हुए मशीन गन से गोलियाँ बरसा रहे हैं और दो एफ 104 स्टारफाइटर ऊपर से उन्हें कवर दे रहे हैं। जैसे ही चार सेबर वहां से हटे दूसरे चार सेबरों ने उनकी जगह ले ली। लगभग उसी समय जनक कपूर अपने नैट को ब्लास्ट पेन के अंदर ले जा रहे थे। एक जूनियर अफसर ने चिल्ला कर कहा, "सर ऊपर देखिए। वो हमला कर रहे हैं।"

इस बीच एक सेबर ने मर्देश्वर के नैट को भी ब्लास्ट पेन में घुसते हुए देखा। उसने उस पर गोलियों की बौछार कर दी। मर्देश्वर जहाज़ से नीचे कूद कर भागे और तभी उन्होंने देखा कि उनका नैट आग में धू धू कर जल रहा है।

कॉकपिट से छलांग

10 aircraft destroyed in 1965 India Pakistan war

उधर 3 स्कवार्डन के फ्लाइट लेफ्टिनेंट तिरलोचन सिंह अपना मिसटियर्स जहाज ब्लास्ट पेन में पार्क कर नीचे उतर ही रहे थे कि एक सेबर ने उनके विमान पर हमला किया।

उन्होंने दौड़ कर एक बंकर में शरण ली। उनके नंबर 2 फ़्लाइंग ऑफीसर रसेल मौंटेस अभी भी विमान के अंदर थे और उन्होंने अपनी सीट बेल्ट भी नहीं खोली थी। नीचे एयरमैन उनके जहाज के पहिए के नीचे क्लाक लगा ही रहे थे कि गोलियों का एक बर्स्ट उनकी तरफ आया।

एयरमैन ने रसेल की तरफ शिकायत भरी नज़र से देखा। उन्हें लगा कि रसेल ने ही गलती से पेन के अंदर गोलियां चला दी हैं। बड़ी मुश्किल से रसेल ने अपनी सीट बेल्ट का स्ट्रैप खोला।

वो जब विमान से नीचे उतरने को हुए तो उन्होंने पाया कि एयरमेन ने उनके विमान में सीढ़ी ही नहीं लगाई है। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए कॉकपिट से ही छह फीट नीचे छलांग लगाई।

गड्ढ़े में छह पायलट

10 aircraft destroyed in 1965 India Pakistan war

उस समय पठानकोट बेस का सिर्फ एक मिसटियर्स विमान हवा में था। उसे उड़ा रहे थे युवा फ़्लाइग ऑफ़िसर माइक मैकमोहन। उन्होंने कुछ दिन पहले ही वायु सेना ज्वाएन की थी और वो एक अभ्यास मिशन पर थे। उन्हें रेडियो ट्रैफ‌िक ने निर्देश दिया कि वो पठानकोट से दूर रहें और पाकिस्तानी हमला गुज़र जाने के बाद उतरें।

पाकिस्तानी मैकमोहन को नहीं देख पाए। वो बाल बाल बचे और बाद में भारतीय वायु सेना के एयर मार्शल बने। उस समय पठानकोट में तैनात एयर मार्शल राघवेंद्रन सुब्रमण्यम अपनी आत्मकथा पैंथर रेड वन में लिखते हैं, "हम करीब छह सात पायलट एक गड्ढ़े में एक के ऊपर एक लेटे हुए थे।

सबसे नीचे वाला पायलट चिल्लाया मेरा बोझ से दम घुटा जा रहा है। सबसे ऊपर वाले पायलट ने जिसका पिछवाड़ा गड्ढ़े के ऊपर दिखाई दे रहा था, जवाब दिया, मुझसे अपनी जगह बदलोगे?"

सुब्रमण्यम आगे लिखते हैं कि अगर हमने अपने चार नैट हवा में भेज दिए होते तो पाकिस्तानी इतना नुकसान नहीं कर पाते। उसी दिन पाकिस्तानी विमानों ने हलवारा और आदमपुर पर भी हमला किया।

लेकिन वहां भारतीय विमान उनका मुक़ाबला करने के लिए पहले से तैयार थे। पाकिस्तान विमान इन दोनों एयरबेसों के ऊपर तक से भी नहीं गुजर पाए।

सबको सितार-ए-जुर्रत

10 aircraft destroyed in 1965 India Pakistan war

सारे सेबर हमला कर सुरक्षित निकल गए। इस हमले में भारत के दस विमान जमीन पर ही नष्ट कर दिए गए। इस हमले में शामिल हर एक पाकिस्तानी पायलट को सितार-ए-जुर्रत दिया गया।

1965 के युद्ध में पाकिस्तानी वायुसेना की ओर से गायक अदनान समी के पिता अरशद शमी ने अहम भूमिका निभाई थी। उन आठ पाकिस्तानी पायलट में से मशहूर गायक अदनान समी के पिता फ़्लाइंग ऑफ़ीसर अरशद समी भी शामिल थे।

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