बीजेपी के गले की हड्डी बन गए हैं मुफ्ती?
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जम्मू-कश्मीर के कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई के बाद राज्य में पीडीपी के साथ गठबंधन भाजपा के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। भाजपा के लिए जवाब देना भारी पड़ रहा है। यही वजह है कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने जवाब देने की सारी जिम्मेदारी राज्य इकाई पर छोड़ चुप्पी साध ली है।
मसर्रत की रिहाई के बाद विपक्ष के निशाने पर एक ओर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं तो दूसरी ओर पीडीपी के साथ गठबंधन को लेकर भाजपा आलाकमान पर अपनों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। संघ और शिवसेना ने भाजपा को हिदायत दी है। शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि यदि भाजपा के विरोध के बाद भी जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी जेल से छूटते हैं, तो वहां भाजपा की नहीं पाकिस्तान की सरकार चल रही है। वहीं, कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अलगाववादी आलम को रिहा कर मतदाताओं को आहत किया है। जनता दल यूनाइटेड ने भी मुसर्रत की रिहाई के लिए भाजपा पर निशाना साधा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि भाजपा ने कश्मीर में सत्ता पाने के लिए अपने संस्थापक की ही वैचारिक हत्या कर दी।
अपनों के निशाने पर बीजेपी
रोज नए विवादों को जन्म दे रहे मुख्यमंत्री पर संघ ने भी करारा हमला बोला है। विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने कहा है कि मुफ्ती जम्मू-कश्मीर को बर्बाद कर देंगे, अगर वे नहीं रुकते हैं तो जम्मू-कश्मीर की जनता उन्हें कुर्सी से उतार देगी। वह पाकिस्तान के एजेंडे पर चलें तो उन्हें कान पकड़कर कुर्सी से नीचे उतार दिया जाएगा। विविप नेता ने कहा कि सईद रोजगार, नौकरी, शिक्षा और राज्य में शांति के खिलाफ काम कर रहे हैं और वह राज्य की समृद्धि के दुश्मन हैं।
संघ ने सईद पर हमला करते हुए उनकी भारतीयता पर सवाल उठाया है। संघ के मुखपत्र आर्गनाइजर में कहा गया है कि भाजपा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री सईद से पूछे कि वह भारतीय हैं या नहीं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने पीएम मोदी से यह साफ करने को कहा है कि भाजपा मसर्रत आलम को आतंकवादी मानती है या फिर राजनीतिक कैदी। बहरहाल, भाजपा भी पीडीपी के बयानबाजी और मसर्रत की रिहाई के बाद असहज महसूस कर रही है। मगर गठबंधन की मजबूरी में वह अपना कदम अभी रोके हुए है
आदित्यनाथ और यशवंत सिन्हा ने की रिहाई की निंदा
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर की वर्तमान हालत को चिंताजनक बताया। बोले, मुख्यमंत्री पाकपरस्ती में बयानबाजी से आगे निकल चुके हैं। अलगाववादी मसर्रत की रिहाई से उनकी मंशा जगजाहिर हुई है। वक्त रहते भाजपा को गठबंधन पर पुन: विचार करना चाहिए।
आगरा में कायस्थ समाज के कार्यक्रम में शामिल होने आए सिन्हा ने कहा कि सत्ता के लालच में नहीं बल्कि भाजपा ने जनाधार का सम्मान और विकास के लिए पीडीपी से हाथ मिलाया। भूमि अधिग्रहण बिल को राष्ट्रीय हितकारी बताते हुए सिन्हा ने कहा कि विपक्षी मोदी सरकार को किसान विरोधी बता रहे हैं। हैरत है, जिन बिंदुओं पर विपक्ष को आपत्ति है, उसमें संशोधन नहीं बता रहे जबकि प्रधानमंत्री बदलाव को राजी हैं। आम बजट पर सिन्हा ने कहा कि अगली बार वह कर संबंधी मामलों में और छूट देने की सिफारिश करेंगे। बिहार की राजनीतिक नौटंकी पर बोले कि सभी विरोधी शून्य हैं और वहां भाजपा सत्तासीन होगी। विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी 2017 के चुनाव में लोकसभा की तरह भाजपा का परचम लहराएगा।
बीजेपी सांसद आदित्यनाथ ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा कट्टर अलगाववादी नेता मसर्रत आलम को रिहा करना सही नहीं है। जो मामला कोर्ट में विचाराधीन हो उसका निर्णय सरकार को नहीं लेना चाहिए।
मुफ्ती के रवैये से सकते में भगवा परिवार
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के रवैये से भगवा परिवार सकते में है। सईद सरकार के द्वारा अलगाववादी मसरत की रिहाई के फैसले ने पूरे कूनबे को आश्चर्य में डाल रखा है। हालांकि संघ गठबंधन पर कड़े फैसले के मामले में वह जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है। भगवा नेतृत्व मुफ्ती को अभी एक-डेढ़ माह और परखने के पक्ष में है। भाजपा आलाकमान की ओर से प्रदेश इकाई को इस बात के निर्देश दिए हैं कि वह अपने तरीके से मुफ्ती से निपटें। प्रदेश नेताओं से पीडीपी और सईद के खिलाफ बयानबाजी तेज करने को कहा गया है।
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा है कि मसरत की रिहाई का कदम पीढ़ा एवं कष्ट देने वाला है। इस कदम से पार्टी असहज है। पात्रा ने कहा है कि मसरत आलम को पुन: गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास दिलाया है कि भाजपा राष्ट्रहित के साथ खिलवाड़ नहीं करेगी। वहीं संघ विचारक राकेश सिन्हा का कहना है कि भाजपा को जल्द से जल्द मुफ्ती से किनारा करना चाहिए, वरना उसे बहुत नुकशान उठाना पड़ सकता है। अमर उजाला से बातचीत में सिन्हा ने कहा कि भाजपा को सईद को अल्टीमेटम देना चाहिए। मरे हुए सांप को ज्यादा देर तक गले में बांध कर घुमने से ज्यादा नुकशान होगा। इसे जल्दी से गले से उतार कर फेंक दे। पीडीपी के साथ भाजपा का गठबंधन महज एक प्रयोग था, ये विफल होता दिख रहा है। मुफ्ती यदि अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं तो भाजपा को जल्द से जल्द गठबंधन तोड देना चाहिए। इसके टुटने का दोष पीडीपी पर पडेगा।
डेढ़ माह की मोहल्लत देने के मूड में बीजेपी के रणनीतिकार
मगर संघ एवं भाजपा के रणनीतिकार अब भी मुफ्ती को एक से डेढ़ माह की माहल्लत देने के मूड में हैं। प्रतिनिधि सभा की बैठक के लिए नागपुर में एकत्रित हुए संघ के शीर्ष नेतृत्व की नजर जम्मू-कश्मीर के सियासत पर जमी हुई है। संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुफ्ती के रवैये पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि राज्य की सियासत पर उनकी नजर है। लेकिन मुफ्ती से गठबंधन तोड़ने के सवाल पर उक्त अधिकारी ने कहा कि अभी कोई निर्णय लेने से पहले मुफ्ती के कामकाज को 15-20 दिन तक और परखा जाएगा। उन्हें समय देना चाहिए। वहीं भाजपा आलाकमान ने इस मामले पर अभी हस्तक्षेप करने से बचते हुए राज्य ईकाई को पीडीपी पर जवाबी हल्ला बोलने को गया है। आलाकमान को उम्मीद है कि जल्द ही मुफ्ती पटरी पर लौट आएंगे। पार्टी ने मुफ्ती को संदेश भेजा है कि वे सरकार को न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर केंद्रीत करते हुए विवाद के कदमों से बचें।
दरअसल भगवा रणनीतिकार मुफ्ती के कदमों को अपनी सियासी जमीन पुख्ता करने की कवायद मान रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि मुफ्ती जल्द ही साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर चल पड़ेगें। इसीलिए भगवा रणनीतिकार अंतिम निष्कर्स पर आने से पहले मुफ्ती को अभी एक-डेढ़ माह का समय देना चाहते हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि साझा न्यूनतम कार्यक्रम में पीडीपी को अपने कोर मुद्दों से काफी समझौता करना पड़ा है। इसलिए वह अपने सियासी जमीन को पुख्ता करने के लिए विवादित बयानों के अलावा अलगाववादी को छोडने का कदम उठा रही है। जल्द ही वह सूबे के विकास के एजेंडे पर लौट आएगी। वरना उसे इसका खामियाजा भुगतना पडेगा।