'टेरर बोट' पर कोस्ट गार्ड ने किया नया खुलासा
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पाकिस्तानी टेरर बोट के समुद्र में डूबने से 18 घंटे पहले ही भारतीय कोस्ट गार्ड को इसकी भनक लग चुकी थी। पाकिस्तानी बोट की घेरेबंदी करने वाले भारतीय जहाज पर तैनात करीब 23 सुरक्षा बलों में से एक ने इस बोट की सभी गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद कर लिया था।
इस वीडियो सूट ने उस पूरे ड्रामे से पर्दा हटा दिया है जिसमें कहा जा रहा था कि नए साल की पूर्व संध्या पर पोरबंदर से 365 किलोमीटर दूर स्थिति एक विदेशी पोत ने खुद को आग के हलाले कर दिया फिर वो समुद्र में समा गई, लेकिन उसे कोई भी ट्रेस नहीं कर पाया था।
कोस्ट गार्ड के अधिकारी ने बताया कि आईसीजीएस राजरतन से एलएमजी के जरिए फायर कर पाकिस्तानी बोट के सदस्यों को आगाह भी किया गया था कि वो समुद्र की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से दूर चले जाएं।
आतंकी ही नहीं टेरर बोट में ईंधन भी रखा था!
अधिकारी ने बताया कि जो बोट भारत की तरफ आ रही थी उसमें दो बड़े जरीकेन रखे हुए थे। उन्होंने बताया शायद उसमें 25 मीटर लंबी पाकिस्तानी बोट का ईंधन भरा हो। इस बोट के ईंधन टैक की क्षमता करीब 200 लीटर थी।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी बोट के किसी हिस्से का मिल पाना मुश्किल हैं क्योंकि यह समुद्र में काफी गहराई तक करीब 2,350 मीटर नीचे तक जा चुके हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि भारतीय कोस्ट गार्ड ने करीब 72 घंटों तक 100 वर्ग मील क्षेत्र की सघन तलाशी की थी।
अधिकारी ने बताया कि कोस्ट गार्डों को उम्मीद थी कि कम से कम उन चार सदस्यों के शव मिल जाएंगे जो पाकिस्तान की बोट पर देखे गए थे। उन्होंने बताया कि एक अन्य कोस्ट गार्ड शिप आईसीजीएस समुद्र प्रहरी एक और दिन इस क्षेत्र की निगरानी करेगा।
समुद्र की अंतर्राष्ट्रीय सीमा में प्रवेश कर गई थी पाक बोट
पाकिस्तान की यह बोट अंतर्राष्ट्रीय समुद्र सीमा में 9-10 नॉटिकल मील भीतर तक प्रवेश कर गई थी, लेकिन वो पाकिस्तानी समुद्र एजेंसी के बराबर संपर्क में थी। यह नाव अंतर्राष्ट्रीय सीमा में तेजी से आगे बढ़ रही थी और यह संभावनाएं तेज हो गईं थी वो जल्द ही पाकिस्तान की सीमा को पार कर जाएगी जिसके बाद उसको पकड़ा जाना काफी मुश्किल हो जाता। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बोट को हर स्थिति में पकड़ना था।
अधिकारी ने बताया कि पोरबंदर के एयरक्राफ्ट से दो ड्रोनियर एयरक्राफ्टों ने उन्हें घेरने के लिए पांच बार उड़ान भरी थी। इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय तकनीक अनुसंधान संगठन एनटीआरओ ने सबसे पहले 31 दिसंबर की सुबह 7 बजकर 34 मिनट पर संदिग्ध नाव के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि फिर उन्होंने एजेंसी से कहा था कि वो इसकी सूचना नेवी को दे दें। नेवी को भी सूचना दे दी गई थी हालांकि नेवी अपनी तरफ से इसपर प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं था।
अधिकारी ने बताया कि उनके पहले ड्रोनियर एयरक्राफ्ट ने एक नाव की मौजूदगी की पुष्टि की थी, जबकि दूसरे ड्रोनियर ने पुष्टि की थी कि यह समुद्री सीमा में 5 से 6 नॉटिकल मील आगे बढ़ चुका है और यह हमारी समुद्री सीमा के पास तक पहुंच गया है और लगातार आगे बढ़ रहा है।