जब जिंदा रहने के लिए शाहरुख ने बेचा अपना कैमरा
यह उन दिनों की बात है जब शाहरुख खान दिल्ली में थिएटर कर रहे थे। गौरी
बात आगे न बढ़े इसलिए उन्होंने गौरी खान को चुपचाप मुंबई अपने एक रिश्तेदार के यहां भेज दिया।
शाहरुख खान को जब यह बात पता चली तो वह गौरी के पीछे-पीछे मुंबई आ गए। शाहरुख की मां ने शाहरूख के हाथ में 10 हजार रूपए रखकर कहा कि जाओ मेरी बहू लेकर आओ। शाहरुख अपने एक दोस्त के साथ मुंबई पहुंचे।
मुंबई में दोस्त के घर रुके
वह दोनों मुंबई में रह रहे एक कॉमन फ्रेंड रमन
मुखर्जी के घर रुके। शाहरुख सुबह से शाम तक गौरी को यहां-वहां ढूढ़ते।
उन्हें कोई भी आइडिया नहीं था कि गौरी के उस रिश्तेदार का घर मुंबई के किस
इलाके में है।
शाहरुख को यह बात पता थी कि गौरी खान को समुद्र का
किनारा बहुत पसंद है। इसलिए वह दिन भर में दो-तीन बार समुद्र के किनारे
जरूर पहुंचते। उन्हें विश्वास था कि गौरी एक दिन उन्हें इसी समंदर के पास
मिलेंगी।
वह समंदर किनारे घूम रहे लोगों को गौरी खान की तस्वीरे दिखाते फिर रहे थे। ऐसा वह मुंबई के हर बीच पर करते।
अब
तक शाहरुख दिल्ली से लाया हुआ ज्यादातर पैसा खाने और टैक्सी-बस के किराए
में खर्च कर चुके थे। समस्या तब हुई जब तीसरे दिन रमन मुखर्जी के घर रहने
के लिए उनके माता-पिता आ गए।
घर भी करना पड़ा था खाली
शाहरुख और उनके दोस्त को रमन का घर खाली करना पड़ा।
अब समस्या कि रात में दोनों रहे कहां। पैसे इतने की दोनों यदि मिला भी दें
तो उससे सिर्फ कुछ टाइम का खाना खाया जा सके।
तो दोनों ने मिलजुल कर
फैसला लिया कि रात रेलवे के प्लेटफार्म में बितायी जाए। दोनों ही रेलवे के
वेटिंग रूम में लेट तो गए लेकिन पूरी रात दोनों को ही नींद न आयी। वह रात
भर मच्छरों और शाराबियों से घिरे रहे।
शाहरुख पर लिखी एक किताब में
इस घटना का जिक्र करते हुए मुश्ताक शेख लिखते हैं कि सुबह उठकर फ्रेश होने
और नहाने-धोने की समस्या थी। रेलवे के शौचालयों में ऐसा करने की हिम्मत
दोनों की ही न थी।
ताज में चुपके से घुसे शाहरुख
उन दिनों ताज होटल में कुछ निर्माण का काम चल रहा था।
तो हर तरह के लोग उस समय ताज में इंट्री कर ले रहे थे। शाहरुख और उनके
दोस्त ने इस बात का फायदा उठाया। वह चुपके से ताज में घुस गए।
फ्रेश
होने की समस्या हल हो गयी थी लेकिन जिस काम से शाहरुख यहां आए थे वह जस की
तस बनी हुई थी। अब जेब में 20 रूपए ही रह गए थे। इसी दिन शाहरुख को अपना
प्रिय कैमरा बेचना पड़ा।