{"_id":"42340715ef68a68299b5a4e302c5ed58","slug":"salman-khan-jai-ho-9","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैं पापा के कहे को टाल नहीं सकाः सलमान ","category":{"title":"Entertainment Archives","title_hn":"एंटरटेनमेंट आर्काइव","slug":"entertainment-archives"}}
मैं पापा के कहे को टाल नहीं सकाः सलमान
हरि मृदुल/अमर उजाला मुंबई
Updated Sun, 19 Jan 2014 08:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सलमान खान की फिल्म जय हो इस शुक्रवार रिलीज हो रही है। इस फिल्म से जुड़े उन्होंने कुछ खुलासे किए हैं। जय हो' फिल्म की रिलीज गणतंत्र दिवस के दो दिन पहले यानी 24 जनवरी के दिन तय हुई है।
विज्ञापन
इस फिल्म को लेकर सलमान खान के प्रशंसकों में गहरी उत्सुकता है। असल में बड़े इंतजार के बाद उनकी कोई फिल्म दर्शकों तक पहुंचने जा रही है। `दबंग 2' उनकी आखिरी रिलीज थी, जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही।
विज्ञापन
आपकी फिल्में विशुद्ध रूप से मनोरंजक होती हैं। इस बार `जय हो' में आपने आम आदमी के पक्ष में कुछ जरूरी मुद्दे उठाए हैं?
विज्ञापन
जय हो' भी एक मनोरंजक फिल्म ही है। इसमें जबर्दस्त एक्शन है। ड्रामा है। इमोशन है। हां, इस बार हमने कुछ ऐसी बातें जरूर की हैं, जो आम आदमी से जीवन से जुड़ी हुई हैं।
आपको लगता है कि अब दर्शकों का मन बदल रहा है। वे एक जैसे मनोरंजन से ऊबने लगे हैं?
वक्त के साथ तमाम चीजें बदलती हैं। फिल्मों के रंग-रूप में भी परिवर्तन आता है। एक्टर भी कुछ नया देने की सोचता है। कहानी कहने की स्टाइल चेंज होती है। अब संभव नहीं है कि कई वर्षों तक एक जैसी फिल्में दर्शकों को लुभाती रहेंगी।
`मेंटल' एक नकारात्मक शब्द है, इसलिए आपकी फिल्म का नाम `जय हो' कर दिया गया है?
`मेंटल' पूरी तरह नकारात्मक तो नहीं है, लेकिन इसे कुछ लोग यह नेगेटिव अर्थ दे सकते हैं। `जय हो' के साथ ऐसा संभव नहीं है। इस नाम में जबर्दस्त पॉजिटिव एनर्जी दिखती है।
आज की तारीख में ईमानदार आदमी को सनकी या मेंटल कह दिया जाता है। फिल्म में मेरा किरदार भी ऐसा ही है। हम भाइयों को मेंटल टाइटल से कोई प्रॉब्लम नहीं थी, लेकिन मेरे पापा को यह शीर्षक ठीक नहीं लगा। हमने पापा की बात मानी और इसे बदल कर `जय हो' कर दिया।
लेकिन इस टाइटल के बारे में कहा जा रहा है कि यह संगीतकार ए.आर.रहमान के गाने `जय हो...' से उठाया गया है। रहमान को इससे आपत्ति है और इस संबंध में उन्होंने आपको फोन भी किया है?
नहीं, रहमान ने मुझे फोन नहीं किया। हमने टाइटल अप्लाई किया था और सौभाग्य से वह मिल भी गया। इस मामले में कोई विवाद नहीं है।
इस बार आपने जय हो के प्रमोशन का एक नया तरीका अपनाया है। आप शहर दर शहर जा रहे हैं और वहां के किसी एनजीओ के सहारे जरूरतमंद बच्चों की मदद कर रहे हैं। नागुपर में आपने सौ हार्ट पेशेंट बच्चों के इलाज के लिए धनराशि उपलब्ध करवाई?
`जय हो' का प्रमोशन नए तरीके से जरूर कर रहे हैं, लेकिन जरूरतमंद लोगों की मदद तो हम कई वर्षों से करते आ रहे हैं। ह्यूमन बीइंग के जरिए खुद मैं चैरिटी करता रहता हूं ।
दरअसल हमारी रणनीति यह है कि `जय हो' के बहाने चैरिटी भी हो जाए और फिल्म का प्रमोशन भी। अब तक हम ऐसा करने में सफल रहे हैं।
नए टैलेंट को जितना बढ़ावा आपने दिया है, आपके समकालीन एक्टरों में यह काम किसी ने नहीं किया है। आपको यह प्रेरणा कहां से मिली?
मैं जब भी किसी नए एक्टर को देखता हूं, तो अपने संघर्ष के दिन याद कर लेता हूं। जब मुझे किसी में टैलेंट नजर आता है, तो उसे आगे बढ़ाने की इच्छा होने लगती है। चाहे गीतकार हो, गायक हो, संगीतकार हो या फिर एक्टर, नई प्रतिभाओं को मौका मिलना ही चाहिए।