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मुश्किल था तीन डायनों संग रोमांसः इमरान हाशमी
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 19 Apr 2013 04:52 PM IST
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हॉरर फिल्म 'एक थी डायन' में इमरान हाशमी तीन नायिकाओं यानी तीन डायनों के साथ काम कर रहे हैं। इस फिल्म से जुड़े अपने अनुभव के बारे में इमरान हाशमी खुद बता रहे हैं,
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डायनों की कहानी 'एक थी डायन' में आप क्या कर रहे हैं?
मैं कभी डायन से डरकर भाग रहा हूं तो कभी प्यार कर रहा हूं। मेरे इर्द-गिर्द तीन औरतें हैं और तीनों ही मुङो डायन लगती है। यह मेरी सिर्फ सोच है या हकीकत। इसी पर फिल्म की कहानी है। वैसे तीन डायनों के साथ काम करना मेरे लिए आसान नहीं रहा है।
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आप इस फिल्म में मैजिशियन का किरदार निभा रहे हैं। क्या आपने रियल लाइफ में किसी मैजिशियन को फॉलो किया है?
फॉलो करने की बात है तो मैने डेविड कोपर फिल से लेकर अपने पीसी सरकार तक सभी को देखा। उसके बाद ही इस किरदार को निभाया।
इस फिल्म में आपके साथ तीन अभिनेत्रियां है क्या किसिंग सीन का ओवरडोज नजर आने वाला है?
ओवरडोज तो नहीं है हां लेकिन मेरी जो इमेज है उसे ध्यान में रखते हुए इस फिल्म में भी कुछ सीन होंगे। लेकिन हां, इन्हें मैं बहुत अच्छे और शालीन तरीके से फिल्मा रहा हूं। वैसे तीन डायनों के साथ रोमांस आसान नहीं होता।
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क्या आपको लगता नहीं कि इस तरह की फिल्में अंधविश्वास को बढ़ावा देती है?
यह बात सुनकर मैं परेशान हो गया है। जब हम गैंगस्टर की फिल्में बनाते हैं तो सब बोलते हैं कि हम गैंगस्टर को बढ़ावा दे रहे हैं। अब इस फिल्म से यह चर्चा शुरु हो गयी है कि हम डायनों को बढ़ावा दे रहे हैं। हर चीज पर पांबदी है तो फिल्में बनेगी किस पर।
वैसे फिल्में मनोरंजन का साधन है और फिल्म की शुरुआत में ही हम लिख देते हैं कि यह काल्पनिक कहानी है। मुङो लगता है कि ऑडियंस समझदार है। उसे पता है कि किस पर विश्वास किया जा सकता है और किस पर नहीं।
हिंदी फिल्मों में अब तक सबसे पसंदीदा हॉरर फिल्म आपकी कौन सी थी?
रामगोपाल वर्मा की फिल्म 'रात'। वह थोड़ी डरावनी थी। मैं उस वक्त 8वीं में पढ़ता था। उस फिल्म में रेवती का अभिनय देखकर कुछ दिनों के लिए मैं जरूर डर गया था।
क्या वजह है जो आप इन दिनों हॉरर फिल्मों का चेहरा बनते जा रहे हैं?
(हंसते हुए) सेक्स और हॉरर एक सिक्के के दो पहलू हैं। अब तक सेक्स पर आधारित फिल्में करता था तो नैचुरल है अब ग्रेड बढ़ गया सो हॉरर में ज्यादा नजर आ रहा हूं। वैसे एक्टर के तौर पर मुङो हॉरर फिल्मों से जुड़ने में कोई परेशानी नहीं है। मैं हमेशा नयी कहानी का हिस्सा बनना चाहता हूं।
आप 'राज' के असिस्टेंट डायरेक्टर रह चुके हैं। 'राज' से 'एक थी डायन' तक हॉरर जॉनर की फिल्मों में आपने कितना बदलाव पाया है?
मौजूदा दौर में हॉरर फिल्मों का ट्रीटमेंट बिल्कुल बदल गया है। अब गंदे चेहरे, टैमटो कैचअप लगी लाशे और बूढा रामू काका लालटेन लिए हवेली के दरवाजे पर आपको नजर नहीं आता है। अब विजुअल इफेक्टस और साउंड इफेक्टस के जरिए दर्शकों में डर पैदा किया जाता है।
क्या किसिंग सीन पर आपकी पत्नी को कोई परेशानी नहीं होती है?
सच कहूं तो मेरी पत्नी मेरी फिल्मों के चयन में कोई दखल नहीं देतीं। वह मेरी फिल्में देखती हैं और अपनी राय भी देती है कि उसे कौन सी फिल्म अच्छी लगी कौन सी नहीं। लेकिन यह नहीं कहती कि मुङो यह दृश्य करना चाहिए था या नहीं।
वैसे आमतौर पर ऐसे दृश्य में आप कितना सहज होते हैं?
सच कहूं तो यह सीन अभिनेत्रियों के लिए ज्यादा मुश्किल होते हैं क्योंकि सेट पर ज्यादातर आदमी होते हैं लडकियां कम इसलिए मेरी जिम्मेदारी होती है कि मैं सेट का माहौल ठीक रखूं। उन्हें सहज कर सकूं ताकि वह सीन अच्छे से परफॉर्म कर सके।
जैसा कि आपने बताया आपकी पत्नी को कोई परेशानी नहीं है तो आप अपनी फिल्मों को अपने बेटे को भी दिखाएंगे?
अभी वो बहुत छोटा है। मैं नहीं जानता कि वह मेरी फिल्में देखकर मुङो प्यार करेगा या नफरत लेकिन मैंने यह तय कर रखा है कि मेरी जो भी ए सर्टिफिकेट वाली फिल्में हैं, वो मैं उसे तब तक नहीं दिखाऊंगा जब तक वह 15 साल का न हो जाए।
फिल्मों में आपकी इमेज बदल रही है इसका श्रेय किसे देना चाहेंगे?
मैने आज तक जो भी पाया है उसमे मेरी हर फिल्म का योगदान रहा है। लेकिन मैं दिबाकर बनर्जी की फिल्म 'संघाई' को ज्यादा क्रेडिट दूंगा। उस फिल्म को करने के बाद लोगों का नजरिया मेरे प्रति बदला है। वह ऐसा किरदार था जो मैंने अब तक नहीं किया था।
अपने कंफर्टजोन से बाहर निकलकर मैंने वह फिल्म की थी। मैं बहुत खुश हूं। मैं 'संघाई' जैसी फिल्म में फिर से काम नहीं करूंगा लेकिन यह जरूर है कि मैं फिर से परदे पर कुछ अलग करना चाहूंगा। ऐसा ही कुछ मैं राजकुमार गुप्ता की फिल्म 'घनचक्कर' में करता नजर आऊंगा। इस फिल्म के जरिए मैंने पहली बार कॉमेडी की है।
'घनचक्कर' में आप पहली बार कॉमेडी करने जा रहे हैं। अनुभव कैसा रहा?
ऐसा नहीं है कि मुङो 'घनचक्कर' से पहले कोई कॉमेडी फिल्म ऑफर नहीं हुई लेकिन सभी सेकेंड स्टैंडर्ड ह्यूमर लग रही थी। डायलॉग पढकर हंसी नहीं चिढ़ आती थी। मुङो इंटरटेनिंग कॉमेडी चाहिए थी। जिसे करते हुए आपको चिल्लाना न पड़े न ही टेढ़ी मेढी शक्ल बनाना हो।
'घनचक्कर' में ऐसी ही सहज कॉमेडी है। गजिनी वाला जो डायलॉग है कितना सहजता से बोला गया है लेकिन कितनी हंसी आती है। वह मेरा पसंदीदा सीन है?
किसी फिल्म को साइन करते हुए आपके लिए सबसे ज्यादा क्या मायने रखता है?
मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने स्क्रिप्ट के हैं। मैं नहीं कहूंगा कि मैं उस स्क्रिप्ट को पसंद करता हूं जो ऑडियंस को पसंद आए। अरे भाई, ऑडियंस को क्या पसंद है ये शायद ही दुनिया में कोई जान सका है। मैं अपनी पसंद या नापसंद से फिल्म से जुड़ता हूं। मुङो स्क्रिप्ट अच्छी लगती है तो फिल्म को हां कह देता हूं।
हाल ही में आपके हाथों में अंगूठियों की बढ़ी संख्या ने जमकर चर्चा बटोरी थी। आप क्या कहना है?
यह मैंने अभी नहीं पहनी है। यह पिछले तीन साल से मेरे साथ है। शायद अब लोग नोटिस कर रहे हैं। मैं यह भी साफ कर देना चाहूंगा कि यह अंगूठियां मुङो एकता ने नहीं दी हैं बल्कि मेरे एक दोस्त ने दी है। मैं इनमे विश्वास नहीं करता लेकिन इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि इनको पहनने से जिंदगी थोड़ी और बेहतर जरूर हो गयी है।
भविष्य संबंधी क्या योजानाएं हैं आईपीएल टीम खरीदना चाहेंगे या निर्देशन की जिम्मेदारी संभालेंगे?
सच कहूं तो मुङो क्रिकेट पसंद नहीं है। मैं क्रिकेट नहीं देखता। निर्देशक की जिम्मेदारी तो नहीं लेकिन हां मैं भविष्य में निर्माता के तौर पर जरूर आपको सक्रिय नजर आऊंगा।
क्या अब आपने भट्ट कैंप की फिल्मों से दूरी बना ली है?
हर एक्टर और डायरेक्टर के लिए जरूरी होता है कि वह सबके साथ काम करे। वैसे मैंने भट्ट कैंप से दूरी नहीं बनायी है। एक साल के भीतर हम साथ में फिर नजर आएंगे।