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'वो सिंपल सूट में थी और उसे मैं देखता ही रह गया'
Updated Tue, 12 Nov 2013 03:31 PM IST
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वो सिंपल सूट में थी। शायद बीमार भी थी। वह इतनी खूबसूरत लग रही थी कि उसे मैं देखता ही रह गया।
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यह बात रामलीला फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने इस फिल्म की अभिनेत्री दीपिका पादुकोन के बारे में कही। संजय, दीपिका की खूबसूरती से बहुत प्रभावित हैं।
भंसाली ने इस फ़िल्म के सिलसिले में दीपिका के साथ हुई अपनी मुलाक़ात को कुछ यूं याद किया, "वो सिंपल सूट पहने हुए थीं और बीमार थीं। उन्होंने कोई मेकअप भी नहीं किया था। फिर भी वो इतनी ख़ूबसूरत लग रही थीं कि मैं बता नहीं सकता। मैंने ठान लिया कि बस यही है मेरी लीला।"
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दीपिका पादुकोण ने ये फ़िल्म 'कॉकटेल' रिलीज़ होने से एक हफ़्ते पहले साइन की थी। भंसाली ने कहा, "कॉकटेल के हिट होने से दीपिका पादुकोण का आत्मविश्वास बढ़ गया। 'रामलीला' में उन्होंने जो काम किया है वो देखते ही बनता है।"
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करीना थीं पहली पसंद
'रामलीला' के लिए दीपिका पादुकोण पहली पसंद नहीं थीं। भंसाली इसके लिए पहले करीना कपूर को लेना चाहते थे।
उन्होंने बताया, "मैं लंबे समय से करीना के साथ काम करना चाहता था लेकिन बात कुछ बन नहीं पा रही थी। रामलीला के लिए लगभग बात पक्की हो गई थी। उनके लिए कॉस्ट्यूम भी बन गया था। लेकिन परिस्थितियों को ये मंज़ूर नहीं था। करीना बेहतरीन अभिनेत्री हैं। उम्मीद है आगे उनके साथ काम करूंगा।"
भंसाली ने बताया कि 'रामलीला' में उन्होंने वो सब करने की कोशिश की है जो उनकी पहली की फ़िल्मों में नहीं था। उन्होंने मनोरंजन देने की भी कोशिश की है और साथ ही इस बात का ध्यान रखा है कि मसाला परोसने के चक्कर में फ़िल्म की मूल भावना के साथ खिलवाड़ ना हो।
निराश थे भंसाली
भंसाली की बतौर निर्देशक पिछली दो फ़िल्में 'सांवरिया' और 'गुज़ारिश' बॉक्स ऑफ़िस पर पिट गई थीं।
उन्होंने बताया, "सांवरिया को लोगों ने इतना बुरा भला कहा, इतनी आलोचना की कि मैं डिप्रेशन में चला गया। मैंने घर से निकलना, अख़बार पढ़ना और टीवी देखना बंद कर दिया। तब मेरे दिमाग़ में मौत और मर्सी किलिंग जैसी बातें चलने लगी और मैंने 'गुज़ारिश' बनाने की ठानी। लोगों ने मना किया कि एक तो वैसे ही 'सांवरिया' पिट चुकी है ऊपर से ऐसे डार्क सब्जेक्ट पर फ़िल्म बना रहे हो।"
भंसाली के मुताबिक़ उन्होंने लोगों की बातों की परवाह ना करते हुए 'गुज़ारिश' बनाई। हालांकि वो फ़िल्म भी नहीं चली।
उनके शब्दों में, "गुज़ारिश भी उतनी नहीं चली लेकिन मैं फ़िल्म से बड़ा ख़ुश हुआ। जैसी मैं चाहता था। ये वैसी ही बनी। गुज़ारिश से मेरे मन में मौत का डर और डिप्रेशन चला गया। मैं ज़िंदगी का लुत्फ़ उठाना चाहता था तो मैंने रामलीला जैसी रंगीन फ़िल्म बनाई।"