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हीरोइन नहीं, मैं हीरोइन का भूत हूं : माही गिल

Fri, 21 Mar 2014 09:22 AM IST
नेहा वर्मा / अमर उजाला, मुंबई
नेहा वर्मा / अमर उजाला, मुंबई Updated Fri, 21 Mar 2014 09:22 AM IST
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mahi gill's talk

वह बोल्ड भी हैं और सीरियस भी। माही गिल की यही छवि है। ‘देव डी’ से शुरू हुआ उनका करियर ‘गैंग ऑफ घोस्ट’ तक आ पहुंचा है। माही ने कड़ी मेहनत से पहचान बनाई। उन्हें आइटम डांस से भी परहेज नहीं है और वह हर अच्छी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

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‘गैंग ऑफ घोस्ट’ में आप कैसी भूत बनी हैं?
मैं वह भूत हूं जो मरने से पहले एक फिल्म हीरोइन थी। मेरा नाम मनोरंजना है। जिसकी इमेज मीना कुमारी जैसी रखी गई है। मैं उसे सुरैया और गीता दत्त जैसा रखना चाहती थी, पर डायरेक्टर सतीश कौशिक जी ने उसे मीना कुमारी सरीखे टोन में रखने को कहा।
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सतीश जी हाल के समय के कामयाब डायरेक्टरों में नहीं हैं। जबकि आपका कैरियर कामयाबी की डिमांड कर रहा है!
हिट-फ्लॉप सभी के करियर में लगा रहता है। किसी एक हिट या फ्लॉप फिल्म से करियर की तस्वीर नहीं बदल जाती। सतीशजी कॉमेडी के महारथी हैं।

उनकी कॉमेडी का अंदाज दूसरों से काफी जुदा है। मैंने उनकी कही बातों का अनुसरण किया। मैंने अपने करियर में अब तक ‘गैंग ऑफ घोस्ट’ जैसी एक भी फिल्म नहीं की थी। यह बड़ा रोमांचक और अलग अनुभव था।
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आपको नहीं लगता कि नई ट्रेजडी क्वीन में रूप में टाइपकास्ट कर दी गई हैं? इसलिए मनोरंजना को मीना कुमारी जैसा रखने को कहा गया होगा?
मुझे नहीं मालूम, ऐसा क्यों हो गया है। इसका जवाब तो फिल्मकार ही दे सकते हैं। आप ही बताएं कौन सी ऐसी ऐक्ट्रेस होगी जो रोमांटिक रोल नहीं करना चाहेगी।

इत्तफाकन मुझे जो भी रोल मिलते हैं, उसमें ट्रेजिक पुट रहता ही है। दुखांत मुझे रील लाइफ में ही पसंद हैं, रियल लाइफ में नहीं। मेरा यकीन करें मैं ग्रे शेड वाली शख्स दूर-दूर तक नहीं हूं।

हंसाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है, लेकिन उस चुनौती को मैंने ‘गैंग ऑफ घोस्ट’ में स्वीकार किया है। मनोरंजना के किरदार से मेरी इमेज बदलने में आसानी होगी।

पंजाबी में कोई नया प्रोजेक्ट?
‘कैरी ऑन जट्टा’ के बाद सफलता का बेंचमार्क इतना हाई था कि मैंने सोचा और कोई फिल्म अगर करना चाहूंगी तो उससे बड़े पैमाने की होनी चाहिए।

कई सारे प्रस्ताव आए लेकिन मैंने मना कर दिया। जल्द ही एक और पंजाबी फिल्म की शूटिंग शुरू हो रही है। इसके बारे में ज्यादा विस्तार से मैं अभी नहीं बता सकती।

‘देव डी’ में आपका किरदार आज भी याद किया जाता है। महिलाओं को कितना विद्रोही होना चाहिए?
मुझे गर्व है कि मैं हिंदुस्तान की विद्रोही प्रवृत्ति वाली महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हूं। मैं नहीं मानती कि औरतों को बेचारी बन कर रहना चाहिए। यहां तक कि अगर शादीशुदा महिलाओं को अपने संबंध से संतुष्टि न मिलती तो उन्हें पति से तलाक लेना चाहिए। यहां एक बात और कहूंगी कि मैं विवाहेतर संबंधों के खिलाफ हूं।


जमाना घनघोर पब्लिसिटी का है लेकिन आप लो-प्रोफाइल रहती हैं। ऐसा क्यों?
मैं उन अभिनेत्रियों की तरह नहीं हूं जो काम पाने के लिए प्रतिभा से ज्यादा पब्लिसिटी और नेटवर्किंग पर समय खर्च करती हैं। मैं इसमें यकीन नहीं रखती।

मेरे पास मीडिया को देने लायक मसाले नहीं होते। हां, कुछ बेहतर बात अगर मुझे अपने प्रशंसकों तक पहुंचानी हो तो मैं जरूर मीडिया के पास आती हूं। वर्ना शूटिंग के अलावा घर में अकेले रहना पसंद करती हूं।

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