{"_id":"c1f3fc1de5dfe2702d8f27c7da4c3c1d","slug":"madhubala-films","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसने बिगाड़ दिया था मधुबाला का स्क्रीनटेस्ट ","category":{"title":"Entertainment Archives","title_hn":"एंटरटेनमेंट आर्काइव","slug":"entertainment-archives"}}
किसने बिगाड़ दिया था मधुबाला का स्क्रीनटेस्ट
रवि बुले/अमर उजाला,मुंबई
Updated Wed, 15 Jan 2014 08:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री मानी जाने वाली मधुबाला को भी फिल्म पाने के लिए स्क्रीन टेस्ट देने पड़े होंगे, यह बात सोच कर भी आज आश्चर्य होता है।
मधुबाला ने बाल कलाकार के रूप में कैरियर शुरू किया था और जब वह हीरोइन बनने को तैयार हुईं तो हर कोई उनका मुरीद नहीं था। वह मात्र 16 साल की थीं और निर्देशक कमाल अमरोही की उन पर नजर पड़ी।
कमाल उन दिनों इंडस्ट्री में लेखक के तौर पर स्थापित थे और निर्देशक के रूप में अपनी पहली फिल्म 'महल' (1949) बनाने की तैयारी कर रहे थे। बॉम्बे टॉकीज जैसा प्रोडक्शन हाउस उनकी फिल्म बनाने को तैयार था, जिसकी बागडोर उन दिनों अशोक कुमार और सावक वाचा के हाथों में थी।
विज्ञापन
फिल्म में अशोक कुमार का हीरो बनना तय था, मगर बात हीरोइन पर अटकी थी। निर्माताओं की राय थी कि उन दिनों की स्टार सुरैया को हीरोइन बनाया जाए। जबकि मधुबाला को देखने के बाद कमाल उन्हें हीरोइन बनाना चाहते थे।
अशोक कुमार तो तैयार हो गए, परंतु दूसरे निर्माता सावक को मधुबाला पसंद नहीं आईं। 1948 में राज कपूर के साथ मधुबाला की 'नील कमल' (निर्देशकः केदार शर्मा) आई थी और खास करिश्मा नहीं कर सकी थी।
ऐसे में जब कमाल ने मधुबाला का स्क्रीन टेस्ट लेने की बात कही तो सावक राजी हो गए। उन्होंने अपने समय के मशहूर कैमरामैन और अपने दोस्त जोसफ विर्सचिंग के साथ मिल कर मधुबाला का स्क्रीन टेस्ट खराब कर दिया। जिसने भी पर्दे पर मधुबाला को देखा उसने कहा कि वह फिल्म के लायक नहीं है।
तब कमाल ने बागडोर अपने हाथों में ली और जोसफ से कहा कि जहां मैं कहता हूं वहां से मधुबाला पर लाइट डालो और दृश्य को कैमरे में कैद करो। इससे पहले कमाल ने निर्देशन जैसा कोई काम नहीं किया था।
वाकई, उनके अनुसार काम करने पर नतीजा कमाल का आया और मधुबाला 'महल' की हीरोइन बन गईं। यह फिल्म हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर है। 'महल' से हिंदी फिल्मों की दुनिया में तीन प्रतिभाएं चमकीं।
खुद कमाल अमरोही, दूसरी मधुबाला और तीसरी लता मंगेशकर। 'आएगा आने वाला...' जैसा गीत सुन कर लोग उनके दीवाने बन गए।
रोचक बात यह कि उन दिनों गानों के रेकॉर्ड्स पर गायकों के नहीं, कलाकार और फिल्म में उसके किरदार के नाम दर्ज होते थे। जैसे रेकॉर्ड पर 'आएगा आने वाला...' के सामने कामिनी (मधुबाला) दर्ज था।
लेकिन जब ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) पर यह गाना बजा तो लोगों ने वहां चिट्ठियों की झड़ी लगा दी कि यह आवाज किसकी है? तब ऑल इंडिया रेडियो ने रिकॉर्डिंग कंपनी से जानकारी मांगी और लोगों को लता का नाम बताया गया। इसके बाद गानों के साथ गायकों के नाम देने की भी परंपरा की भी नींव पड़ी।
(साभारः हार्पर कॉलिंस इंडिया द्वारा प्रकाशित लेखक मेघनाद देसाई की किताब 'पाकीजाःएन ओड टू अ बायगॉन वर्ल्ड' से)
विज्ञापन
मधुबाला ने बाल कलाकार के रूप में कैरियर शुरू किया था और जब वह हीरोइन बनने को तैयार हुईं तो हर कोई उनका मुरीद नहीं था। वह मात्र 16 साल की थीं और निर्देशक कमाल अमरोही की उन पर नजर पड़ी।
विज्ञापन
कमाल उन दिनों इंडस्ट्री में लेखक के तौर पर स्थापित थे और निर्देशक के रूप में अपनी पहली फिल्म 'महल' (1949) बनाने की तैयारी कर रहे थे। बॉम्बे टॉकीज जैसा प्रोडक्शन हाउस उनकी फिल्म बनाने को तैयार था, जिसकी बागडोर उन दिनों अशोक कुमार और सावक वाचा के हाथों में थी।
विज्ञापन
फिल्म में अशोक कुमार का हीरो बनना तय था, मगर बात हीरोइन पर अटकी थी। निर्माताओं की राय थी कि उन दिनों की स्टार सुरैया को हीरोइन बनाया जाए। जबकि मधुबाला को देखने के बाद कमाल उन्हें हीरोइन बनाना चाहते थे।
अशोक कुमार तो तैयार हो गए, परंतु दूसरे निर्माता सावक को मधुबाला पसंद नहीं आईं। 1948 में राज कपूर के साथ मधुबाला की 'नील कमल' (निर्देशकः केदार शर्मा) आई थी और खास करिश्मा नहीं कर सकी थी।
ऐसे में जब कमाल ने मधुबाला का स्क्रीन टेस्ट लेने की बात कही तो सावक राजी हो गए। उन्होंने अपने समय के मशहूर कैमरामैन और अपने दोस्त जोसफ विर्सचिंग के साथ मिल कर मधुबाला का स्क्रीन टेस्ट खराब कर दिया। जिसने भी पर्दे पर मधुबाला को देखा उसने कहा कि वह फिल्म के लायक नहीं है।
तब कमाल ने बागडोर अपने हाथों में ली और जोसफ से कहा कि जहां मैं कहता हूं वहां से मधुबाला पर लाइट डालो और दृश्य को कैमरे में कैद करो। इससे पहले कमाल ने निर्देशन जैसा कोई काम नहीं किया था।
वाकई, उनके अनुसार काम करने पर नतीजा कमाल का आया और मधुबाला 'महल' की हीरोइन बन गईं। यह फिल्म हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर है। 'महल' से हिंदी फिल्मों की दुनिया में तीन प्रतिभाएं चमकीं।
खुद कमाल अमरोही, दूसरी मधुबाला और तीसरी लता मंगेशकर। 'आएगा आने वाला...' जैसा गीत सुन कर लोग उनके दीवाने बन गए।
रोचक बात यह कि उन दिनों गानों के रेकॉर्ड्स पर गायकों के नहीं, कलाकार और फिल्म में उसके किरदार के नाम दर्ज होते थे। जैसे रेकॉर्ड पर 'आएगा आने वाला...' के सामने कामिनी (मधुबाला) दर्ज था।
लेकिन जब ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) पर यह गाना बजा तो लोगों ने वहां चिट्ठियों की झड़ी लगा दी कि यह आवाज किसकी है? तब ऑल इंडिया रेडियो ने रिकॉर्डिंग कंपनी से जानकारी मांगी और लोगों को लता का नाम बताया गया। इसके बाद गानों के साथ गायकों के नाम देने की भी परंपरा की भी नींव पड़ी।
(साभारः हार्पर कॉलिंस इंडिया द्वारा प्रकाशित लेखक मेघनाद देसाई की किताब 'पाकीजाःएन ओड टू अ बायगॉन वर्ल्ड' से)