आखिर किस-किस किस्म के शौक रखते थे देव आनंद
देव आनंद एक दफ़ा अपने प्रशंसक को थैंक्यू बोलना भूल गए तो उन्होंने ड्राइवर से गाड़ी घुमाने को कहा और उसे सिर्फ़ शुक्रिया अदा करने 40 किलोमीटर का सफ़र तय किया।
खाने में उनको क्या पसंद था, दिलीप कुमार और राज कपूर से उनके कैसे संबंध थे और उनकी पसंदीदा अभिनेत्री कौन थीं? ये सब बातें बताईं उनके 91वें जन्मदिन पर उनके निकट सहयोगी रहे मोहन चुरीवाला ने...
जैसेकि उन्हें अस्पताल जाना क़त्तई पसंद नहीं था क्योंकि बीमार लोगों को देख कर उन्हें तकलीफ़ होती थी। उनकी फ़िल्मों में जब अस्पताल का सीन होता तो वो असल अस्पताल में शूट नहीं करते थे हमेशा सेट बनाते। उन्हें किताबें पढ़ने का बहुत शौक़ था लेकिन वो अपनी किताबें किसी को नहीं देते थे।
साथियों के साथ रिश्ते
राज कपूर के जन्मदिन पर अपने ज़माने के ये तीनों सुपरस्टार मिलते। राज कपूर से तो उनके बहुत अच्छे संबंध थे। वो मुझे हमेशा बताते थे कि मैं किसी भी काम के लिए राज को बुलाऊं तो वो दौड़ा चला आता। मैं भी राज के बुलाने पर कहीं भी चला जाता।
मुंबई में अपनी आत्मकथा को वो दिलीप कुमार से लॉन्च कराना चाहते थे लेकिन दिलीप साहब की ख़राब सेहत के चलते ऐसा ना हो पाया। तब अमिताभ बच्चन ने किताब लॉन्च की थी।
खाना और चाहने वाले
उन्हें शाकाहारी खाना पसंद था। वो काली दाल, छोले और दही बड़े चाव से खाते थे। नाश्ता भारी करते थे लेकिन लंच नहीं करते थे। डिनर के बाद हमेशा वॉक पे जाते थे। उन्हें खाने से ज़्यादा खिलाने का शौक़ था।
वह कभी खाना अकेले नहीं खाते थे। हमेशा अपनी क्रू के साथ बैठकर खाते। हर उम्र के लोग उनके प्रशंसक थे। वह कभी उन्हें निराश नहीं करते थे.
लड़कियां अपनी हथेली पर उनके ऑटोग्राफ़ ले लेतीं थीं। एक दफ़ा एक लड़की उनसे बोली कि मेरी नानी आपकी बहुत बड़ी फ़ैन है और कहती हैं कि आपसे मिले बिना वो मरेंगी नहीं। तब देव साहब बोले, "तब तो मैं उनसे कभी नहीं मिलूंगा। क्योंकि मैं चाहता हूं कि वो ज़िंदा रहें।
और पंसदीदा अभिनेत्री कौन थी?
सुरैया को वो चाहते थे, ये बात हर किसी को पता है। लेकिन कोस्टार की बात करें तो उन्हें मीना कुमारी बहुत पसंद थी. वो कहते थे कि मीना का उच्चारण और भाषा बड़ी नफ़ासत वाली है।
संगीतकारों में उन्हें एसडी बर्मन के अलावा कोई नहीं भाता था. उनके गुज़र जाने के बाद वो उनके बेटे आरडी बर्मन के साथ काम करने लगे। अपने कपड़े वो ख़ुद पसंद करते। उन्हें सितारों का डिज़ाइनर से मदद लेना सख़्त नापसंद था।