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रियल है 'शुद्घ देसी रोमांस' का रोमांसः सुशांत सिंह
रवि बुले
Updated Mon, 19 Aug 2013 03:02 PM IST
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सुशांत सिंह राजपूत इमेज में बंध कर काम नहीं करना चाहते। उन्हें विश्वास है कि जिस तरह से सिनेमा की दुनिया में नए प्रयोग हो रहे हैं, वे उनके लिए कामयाबी की सीढ़ियां साबित होंगे। ‘शुद्ध देसी रोमांस’ में दो हीरोइनों के साथ इश्क फरमाने के बाद जब वे पर्दे पर जासूसी करते दिखें तो चौंकिएगा मत।
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'काई पो चे' फिल्म से अपनी पहचान बनाने के बाद सुशांत को यशराज बैनर की रोमांटिक फिल्म 'शुद्घ देसी रोमांस' मिली। अमर उजाला से इस फिल्म के बारे में बात करते हुए सुशांत सिंह ने कहा कि 'शुद्घ देसी रोमांस' की कहानी आपको अपनी कहानी लगेगी।
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इंटरव्यू देना कोई आसान काम नहीं। फिर चाहे वह जॉब पाने के लिए हो या अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए। सुबह से मुंबई के यशराज स्टूडियो की कारपोरेट बिल्डिंग के फर्स्ट फ्लोर पर मीडिया के लोगों से अलग-अलग रू-ब-रू हो रहे सुशांत सिंह राजपूत लिए भी वह थकाने वाला दिन था।
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दोपहर दो बजे के बाद जब उनसे सामना हुआ, तो उन्होंने पहले एक सिगरेट पीने की इजाजत मांगी और स्मोकिंग जोन में चले गए। पांच-सात मिनट बाद दिमाग को हल्का करके लौटे और तब बातचीत शुरू की।
कल तक टीवी का एक सितारा और आज फिल्मों का स्टार। ‘काय पो चे’ के बाद सुशांत मनीष शर्मा के निर्देशन में तैयार ‘शुद्ध देसी रोमांस’ की रिलीज का बेसब्री से इंतजा कर रहे हैं। टीवी से फिल्मों के इस सफर में क्या-क्या बदल गया? सुशांत पुराने दिनों में खोते हुए कहते हैं कि जिंदगी में इससे पहले ही कहीं बदलाव की शुरुआत हो चुकी थी, जब मैंने परफॉर्मिंग आर्ट्स को अपने लिए चुना।
एक समय था जब मैं अपनी बात दूसरों के सामने रखने में हिचकिचाता था, लेकिन अब बहुत कॉन्फिडेंट हूं। ऐक्टिंग ने मेरी जिंदगी बदल दी। सुशांत ने नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच होकर ग्लैमर की दुनिया तक का सफर तय किया है।
पहली फिल्म में मिली प्रशंसा के बाद भी सुशांत के लिए यशराज फिल्म्स में प्रवेश आसान नहीं था। उन्होंने फिल्म के लिए ऑडिशन दिए और हीरो बने। ‘काय पो चे’ में जहां उनके अपोजिट कोई हीरोइन नहीं थी, ‘शुद्ध देसी रोमांस’ में उनकी दो नायिकाएं हैं। जिनके बारे में सुशांत कहते हैं, ‘परिणती (चोपड़ा) बहुत ही सहज ऐक्टर हैं। वह आपके साथ कदम से कदम मिला कर चलती हैं। आप जो परफॉर्म कर रहे हैं, उस पर तत्काल रिएक्ट करती हैं। जिससे ऐक्टिंग आसान हो जाती है।
जबकि वानी त्रिपाठी की यह पहली फिल्म थी, इसके बावजूद उन्होंने जिस आत्मविश्वास से काम किया, वह तारीफ के काबिल है। उन्हें इस फिल्म से पहले ऐक्टिंग का अनुभव नहीं था। वह फैशन और मॉडलिंग की दुनिया से आई हैं।’
फिल्म को लेकर सुशांत उत्साहित हैं और बताते हैं कि इसमें दिखाया रोमांस वैसा ही है, जैसा आज के समय में होता है। सुशांत के अनुसार, ‘आज रोमांस की कई लेयर्स हैं। वह पहले की तरह नहीं है कि प्यार हुआ और सीधे घर बसाने का खयाल। आज के युवा रोमांस को कई स्तरों पर देखते, महसूस करते और जीते हैं। उनके लिए प्यार का मतलब सिर्फ शादी नहीं है।’ फिल्म में सुशांत के किरदार का नाम रघु है, जो गुलाबी नगरी जयपुर में एक टूरिस्ट गाइड है।
रघु की तरह प्यार के मामले में पार्टनर बदलने में भरोसा न रखने वाले सुशांत अपने किरदारों को डूब कर निभाने के आदी हैं। वह किरदार को निभाने से पहले उसकी मानसिकता, उसके आस-पास के लोगों और उसके परिवेश का अध्यय करते हैं। उन्हें लेकर अपने नोट्स बनाते हैं। किरादार को लेकर अपनी सोच को साफ करते हैं और उसके बाद कैमरे के सामने आते हैं।
सुशांत का किसी एक इमेज में बंध कर काम करने का इरादा नहीं है। वे अलग-अलग ढंग के किरदार निभाना चाहते हैं। यही कारण है कि गुलाबी नगरी के रोमांस के बाद वह कोलकाता में डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी के रोल में खुफियागिरी करते नजर आएंगे। दिबाकर बनर्जी यह फिल्म निर्देशित कर रहे हैं।
सुशांत कहते हैं, ‘सिनेमा तेजी से बदल रहा है और आने वाले दिनों में यह परिवर्तन अधिक रफ्तार पकड़ेगा। आज जो कंटेंट ड्रिवन सिनेमा छोटा लग रहा है, वह बड़ा होने वाला है। दर्शकों में इसकी मांग है।’ निश्चित ही सफल ऐक्टर बनने के लिए अच्छा अभिनय ही काफी नहीं, भविष्य की नब्ज पर हाथ रखना भी आना चाहिए। सुशांत इस दिशा में आश्वस्त नजर आते हैं।
राखी पर बहनों से रहेंगे दूर
सुशांत की चार बहनें हैं। वे उन सबसे छोटे हैं। सुशांत अपनी कामयाबी का श्रेय बहनों के साथ बांटते हैं और कहते हैं कि उनके व्यक्तित्व को निखारने और बढ़ाने में बहनों का बहुत योगदान रहा है। इस राखी पर सुशांत बहनों के साथ नहीं होंगे क्योंकि फिल्म के प्रमोशन में लगे हैं। लेकिन कहते हैं, ‘उन्हें इस बात से शिकायत नहीं है। वे सभी मेरे लिए खुश हैं कि मैं आज अपने मन का काम कर पा रहा हूं।