जानिए परिणिती चोपड़ा टूथपेस्ट क्यों खाती हैं?
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परिणिती टूथपेस्ट क्यों खाती हैं? जीभ क्यों निकालती हैं? इस बारे में वही आपको बता रही हैं।
यशराज फिल्म्स के बाहर आपकी यह पहली फिल्म है। कैरियर को आप किस तरह प्लान कर रही हैं?
इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि शुरुआती दिनों में आपको ज्यादातर वही काम करना होता है जो आपके पास आ रहा है। पहली तीन फिल्में मैंने यशराज के साथ की। तब भी मेरे पास बाहर से कई ऑफर थे, अब भी हैं। हां, इतना जरूर है कि अब मेरे पास जो ऑफर आ रहे हैं उन पर मैं सोच-विचार रही हूं। लेकिन यह कहना कि मेरे पास कोई प्लानिंग है, सही नहीं है।
अब तक की फिल्मों से आपकी इमेज एक ‘बबली गर्ल’ की है। क्या सोचती हैं?
मुझे लगता है कि कहीं कुछ गड़बड़ है क्योंकि पहली तीनों फिल्मों में मेरे रोल अलग-अलग थे, इसमें केवल ‘लेडीज वर्सेज रिक्की बहल’ में ही मैं तेज तर्रार, चुलबुली पंजाबी लड़की थी। जबकि ‘इशकजादे’ में तो ज्यादातर गुस्सैल और बात बात में तमंचा उठा लने वाली थी।
‘शुद्ध देसी रोमांस’ में मेरे हिस्से पूरी फिल्म में बमुश्किल पचास डायलॉग आए... वो भी ऐसे नहीं थे कि लोग मुझे ‘बबली गर्ल’ मान लें। मैं किसी इमेज में नहीं बंधना चाहती। यह सही कि पर्सनल लाइफ में मैं बहुत खुशमिजाज और बबली टाइप लड़की हूं।
‘हंसी तो फंसी’ में आपके रोल के बारे में बताइए?
फिल्म में मैं मीता नाम की लड़की बनी हूं, जो एक साइंटिस्ट (वैज्ञानिक) है। बहुत जीनियस है। लेकिन कहते हैं ना कि जीनियस लोग थोड़े से सनकी होते हैं... मीता भी ऐसी ही है। वह बहुत ही अजीब है... लेकिन वह ऐसी क्यों है, आपको फिल्म देखने पर पता चलेगा।
फिल्म में आप टूथपेस्ट खाती हैं, पलकें नहीं झपकाती हैं, जीभ बाहर निकाले रहती हैं... यह सब क्या है?
इंटेलिजेंट लोग ऐसे ही होते हैं। कुछ न कुछ उल्टा-सीधा करते हैं। हमेशा जल्दबाजी में रहते हैं। हमने मेरे केरेक्टर की इन बातों के लिए खूब सोचा कि जब मीता जीनियस है तो उसके केरेक्टर में हमें क्या क्या दिखाना चाहिए। लेकिन याद रखिए कि वह मानसिक रूप से बीमार नहीं है। उसे कोई मेडिकल प्रॉब्लम नहीं है। मुझे उम्मीद है कि दर्शकों को मुझे देख कर मजा आएगा।
फिल्म में तो आप साइंटिस्ट और जीनियस बनी हैं। स्कूल दिनों में आप पढ़ाई में कैसी थीं?
मैं पढ़ाई में हमेशा अच्छी थी। टॉप थ्री में रहती थी। स्कूल की हेडगर्ल बनने का भी मुझे चांस मिला। विदेश जाकर पढ़ने का भी मौका मिला।
अभी तक आप किसी ग्लैमरस रोल में नहीं दिखी। आपने क्या जानबूझ कर ऐसा किया या कोई रोल वैसा नहीं आया?
पहली फिल्म में तो रोल के बारे में सोचने की बात ही नहीं थी। ‘इशकजादे’ में मैं यह सोच रही थी कि मुझे ऐसा किरदार मिले जिससे मेरी पहचान बने। ‘शुद्ध देसी रोमांस’ मैंने डायरेक्टर मनीष के कारण की थी क्योंकि उन्होंने ही मुझे मेरी पहली फिल्म दी थी।
ऐसे में ग्लैमर वगैरह के बारे में सोचने की फुर्सत ही नहीं थी। ‘हंसी तो फंसी’ का रोल भी ऐसा कि लड़की साइंटिस्ट है, जिसमें ग्लैमर की गुंजाइश नहीं के बराबर थी। इस तरह अभी तक मेरा सोचा हुआ कुछ नहीं हुआ है। आगे जरूर थोड़ा ध्यान रखूंगी। ‘किल दिल’ में मैं आपको शायद ग्लैमरस लगूंगी।
क्या उसमें आप बिकनी में नजर आएंगी।
बिल्कुल नहीं। मेरा रोल उसमें इस तरह का नहीं है। न ही कहानी में हम कहीं समुद्र या स्वीमिंग पूल में होंगे। इस फिल्म की कहानी दिल्ली की है और वह भी ठंड के मौसम की। ऐसे में ‘किल दिल’ में बिकनी का कोई चांस ही नहीं है।
पिछले दिनों कुछ सीनियर ऐक्टरों के साथ आपको फिल्में ऑफर हुई थीं, मगर आपने इंकार कर दिया।
यह सही है कि पिछले साल कुछ ऐसे प्रस्ताव मेरे पास आए थे लेकिन सच यह है कि उन फिल्मों में मेरे पास कुछ करने को ही नहीं था। मैं ऐसी फिल्में नहीं कर सकती। इसका यह मतलब नहीं कि मैं सीनियर हीरो के साथ काम नहीं करना चाहती।
आपको अच्छी अभिनेत्री माना जा रहा है, उम्मीदें लगाई जा रही हैं। क्या इन उम्मीदों से कोई डर भी लगता है?
बिल्कुल लगता है। अभी मैं अच्छा काम कर रही हूं, अच्छी ऐक्टिंग कर रही हूं तो लोग देख रहे हैं। लेकिन कभी लगता है कि अगर मैंने दर्शकों की उम्मीद से कम अच्छा काम किया और दो फिल्में भी फ्लॉप हो गईं तो क्या होगा? दर्शक आपको प्यार करते हैं लेकिन आपकी नाकामियों को बर्दाश्त नहीं करते। वह तुरंत दूसरे ऐक्टर की फिल्म देखने निकल जाते हैं। ऐसे में डर तो लगेगा ही।