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मोहम्मद रफी को समझिए गीतकार नीरज से

Thu, 31 Jul 2014 08:09 AM IST
Updated Thu, 31 Jul 2014 08:09 AM IST
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interview of gopal das neeraj have concern mohammed rafi

हिंदी साहित्य की गीत विधा के सिरमौर बच्चन के बाद हमारे बीच मौजूद जीवित हस्ताक्षर प्रख्यात गीतकार पद्मभूषण गोपाल दास 'नीरज ने फिल्मी दुनिया में भी लंबा समय गुजारा है। फिल्मी गीतों में कवित्व के अंश को जीवित किया। नई तरह की श्रृंगारिक शैली भी शुरू की। नीरज के दर्जनों गीतों को अपना स्वर देने वाले मशहूर पाश्र्व गायक मोहम्मद रफी की ३१ जुलाई को ३४ वीं पुण्यतिथि है।

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मुंबई में सक्रियता के दौरान नीरज अक्सर ही रफी से मिलते थे। पुण्यतिथि के मौके पर नीरज से अमर उजाला की खास बातचीत उनके अलीगढ़ में जनकपुरी स्थित आवास पर हुई। इसमें नीरज ने मो. रफी को याद किया साथ ही कई जानी अनजानी बातों को भी साझा किया।
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ऐसे हुई थी रफी से मुलाकात

interview of gopal das neeraj have concern mohammed rafi

मो. रफी से आपकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई?

मैंने सन १९५४ में लखनऊ आकाशवाणी पर अपने गीत 'कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे' का काव्य पाठ किया। जिसके बाद यह गीत रातों रात बेहद लोकप्रिय हुआ। मुझसे हर कवि सम्मेलन में इसी गीत का पाठ करने की मांग की जाती। गीत की लोकप्रियता को देखते हुए फिल्म निर्माता आर चंद्रा ने १९६० में शुरू की अपनी फिल्म 'नई उमर की नई फसल' में मेरा गीत शामिल किया। गीत की रिकॉर्डिंग के सिलसिले में मैं मुंबई गया। वहीं पर मेरी पहली मुलाकात मो. रफी से हुई।

वह मेरे हम उम्र ही थे। यह मेरा फिल्मों में पहला गीत था। यह फिल्म १९६४ में रिलीज हुई। फिल्म तो नहीं चली लेकिन मो. रफी का गाया मेरा गीत रातों रात और भी लोकप्रिय और कालजयी हो गया। इसने विदेशों में भी मेरा नाम पहुंचाया। हालांकि इस फिल्म की रिलीज से पहले मशहूर अभिनेता चंद्रशेखर की फिल्म' के साथ ही उसके गीत भी हिट हो चुके थे। लेकिन 'कारवां गुजर गया' मेरा हस्ताक्षर गीत बन गया और इसी के साथ मेरा फिल्मी दुनिया में सफर शुरू हुआ।

रफी की फिल्म में एक्टर नीरज

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मो. रफी के गाए एक गीत पर आपने एक्टिंग भी की थी। वह कौन सी फिल्म थी और गीत कौन सा था?

वह मनोज कुमार की फिल्म 'पहचान' थी। इस फिल्म में मैने कई गीत लिखे जिसमें मो. रफी का गाया एक गीत था 'पैसे की पहचान यहां इंसान की कीमत कुछ भी नहीं, बच के निकल जा इस बस्ती से करता मोहब्बत कोई नहीं'। इस गीत पर मैंने स्ट्रीट सिंगर की भूमिका निभाई थी। उन दिनों मुंबई में स्ट्रीट सिंगर होते थे।

गीत से पहले मेरा एक लंबा दृश्य और कुछ संवाद भी थे जिन्हें फिल्म की एडीटिंग के दौरान हटा दिया था। बाद में मनोज कुमार ने (मजाक में) मुझसे कहा था कि यह सीन इतना असरदार बन पड़ा था कि इसके बाद मेरी एक्टिंग हल्की लगने लगी थी। इसीलिए हटा दिया। इस गीत के अलावा मैंने 'बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं, आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं' लिखा था जो सुपरहिट रहा।

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इन गीतों पर हुई नीरज-रफी की जुगलबंदी

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मो रफी और कवि नीरज की जुगलबंदी इन गीतों पर हुई। ये सभी गीत आज भी लोगों के जेहन में हैं।

कांरवा गुजर गया गुबार देखते रहे- फिल्म नई उमर की नई फसल
मेरा मन तेरा प्यासा..मेरा मन- फिल्म गैंबलर
लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में, हजारों रंग के- फिल्म कन्यादान
वो हम न थे वो तुम न थे वो रहगुजर थी प्यार की- फिल्म, च च च
वो सुबह न आई, शाम न आई, जिस दिन तेरी.. फिल्म च च च
पैसे की पहचान यहां, इंसान की कीमत कोई नहीं- फिल्म पहचान

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