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मिल्खा सिंह बनना आसान नहीं थाः फरहान अख्तर
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 14 Jul 2013 01:31 PM IST
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'भाग मिल्खा भाग' में मिल्खा सिंह के किरदार को पर्दे पर शानदार तरीके से जीने वाले फरहान अख्तर इस किरदार को निभाना एक सपने के पूरे होना जैसा मानते हैं। फरहान ने इस फिल्म को लगभग डेढ़ साल दिए। फरहान के लिए क्यों यह फिल्म खास रही वह खुद ही बता रहे हैं।
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फरहान आखिर कैसे बने परदे के मिल्खा सिंह?
मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतनी महान हस्ती का किरदार निभाने का मौका मिलेगा। मैं खुशनसीब हूं कि मुझे यह मौका मिला। जब राकेश मेरे पास फिल्म लेकर आए तो मैं पहले चौंका भी था। लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि राकेश यूं ही कोई निर्णय नहीं लेते। मैंने उनकी पिछली फिल्में 'रंग दे बसंती' और 'दिल्ली 6' देखी हैं और दोनों ही फिल्मों से प्रभावित रहा हूं। तो एक बात तो स्पष्ट थी कि वह कुछ विजन लेकर आये हैं।
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मैंने जब उनसे सिर्फ 20-25 मिनट की कहानी सुनी तभी तय कर लिया कि न कहने का तो सवाल ही नहीं उठता। मिल्खा सिंह जैसी हस्ती हम सबको कुछ न कुछ सिखाती है। मुझे ये सुनहरा मौका बिल्कुल नहीं खोना था। मैं इस फिल्म से बस दर्शकों तक यही संदेश पहुंचाना चाहता हूं कि मिल्खा सिंह जो कई लोगों के लिए लीजेंड हैं तो आखिर वे लीजेंड बने कैसे।
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मिल्खा सिंह का किरदार निभाना कितना कठिन रहा?
कठिन इस लिहाज से नहीं रहा कि इस फिल्म में अभिनय के साथ साथ मुझे खुद को फिजिकली फिट भी रखना था। बल्कि इस लिहाज से रहा कि आप किसी लेजेंड की तस्वीर परदे पर पेश कर रहे हों तो आपकी जिम्मेदारी बड़ी है। आप किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर सकते। कुछ भी फैंटेसी नहीं दिखा सकते। तो यह मुश्किलें रहीं। मैंने इन बातों का ख्याल रखा। खासतौर से हमारे निर्देशक राकेश ओम प्रकाश और लेखक प्रसून ने जैसा होम वर्क किया मैं सबकुछ उनके मुताबिक ही करता गया।
हां इस फिल्म के दौरान मैंने कई बार चोटें खायीं। मेरी अब तक की बाकी फिल्मों में मैंने मेट्रो शहर के लड़के का किरदार निभाया है। किसी की जिंदगी में इतने सारे वेरियेशन नहीं थे। लेकिन इस फिल्म में बात अलग थी। इस फिल्म को मैंने पूरी शिद्दत से डेढ़ साल दिये हैं। पहले 6 महीने फिजिकल ट्रेनिंग को दी। फिर बाकी के दिन शूटिंग में और कैरेक्टर को समझने में।
मिल्खा सिंह की जिंदगी के किस हिस्से ने आपको सबसे अधिक प्रभावित किया?
मैंने उनकी जिंदगी से बहुत कुछ सीखा। खासतौर से एक व्यक्ति जो 11 साल की उम्र में अपने परिवार को बचाने के लिए हथियार उठाता है। अपने परिवार को खो देता है। फिर पार्टिशन में वह दूसरे मूल्क आता है। यहां जेल में रहना। फिर आर्मी ज्वाइन करना। अपनी इज्जत को वापस हासिल करना और सबसे खास एक अच्छा व्यक्ति बनना।
यह सब आपको इंस्पायर करता है। हां, यह सच है कि मैंने कभी वैसी जिंदगी नहीं जी वास्तविकता में। लेकिन जब आप उस किरदार को जी रहे होते तो आप महसूस करते हो कि कितना कष्ट झेला है। मैं तो परदे पर उतार रहा हूं। लेकिन वास्तविकता में जिस पर बीती।
किसी ऐसे व्यक्ति पर जो अभी हैं और उन पर बायोपिक फिल्म बनाना कितना कठिन होता है या कितना आसान?
यह तो आपको राकेश से पूछना चाहिए। मेरा मानना है कि बायोपिक फिल्म बनाना ही अपने आप में कठिन काम है। फिर चाहे वह व्यक्ति खुद व्यक्तिगत रूप से मौजूद हो या न हो। चूंकि आपको उस व्यक्ति की पर्सनालिटी के साथ पूरा न्याय करना होता है। आपके किरदारों का चयन, घटनाओं का चयन, परिस्थितियों का चयन सब मिलाकर एक अच्छी बॉयोपिक फिल्म बनती है।
जहां तक इस फिल्म की बात है तो मेरे पास रिसर्च के विकल्प अधिक थे। मैं जो समझना चाहता था, जानना चाहता था। वह मैंने मिल्खा सिंह के साथ मिलकर जान लिया। लेकिन यह सारी जिम्मेदारी अंतत: निर्देशक की है। लेकिन मुझे खुशी है कि मिल्खा सिंह जी के परिवार को और उन्हें खुद मेरी फिल्म पसंद आयी है।
आप मानते हैं कि यह फिल्म आपकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित होगी?
हां, वह इस लिहाज से नहीं कि यह पहली बार है जब मुझ पर पूरी फिल्म केंद्रित है। इसलिए कि इस फिल्म ने मुझे इनरिच किया है।
आप कभी स्पोर्ट्स में रुचि रखते थे या नहीं।
बिल्कुल रखता था। मुझे स्पोर्ट्स खेलना और देखना दोनों पसंद है। आज भी सबसे ज्यादा स्पोर्ट्स ही देखता हूं। मैं अपने स्कूल में शॉर्ट डिस्टेंस के लिए दौड़ा करता था। वॉलीबॉल, फुटबॉल खेलता रहता हूं आज भी।
राकेश ओम प्रकाश मेहरा के साथ कैसा रहा अनुभव
राकेश हिंदी सिनेमा के स्थिर और पूरी गंभीरता से काम करनेवाल निर्देशकों में से एक हैं। हम प्राय: कहते हैं न कि भीड़ से अलग रहने वाला व्यक्ति। राकेश वैसे ही है। आप देखे न, उनकी फिल्में कितनी कम आयी हैं। लेकिन जितनी भी फिल्में आयी हैं वह याद रखने के लायक हैं। उनके निर्देशन की खासियत है कि वे हड़बड़ी में नहीं है। पैशन फॉर सिनेमा का दूसरा नाम है राकेश।
आपकी आने फिल्में?
'शादी के साइड इफेक्ट्स' का सीक्वल कर रहा हूं। साथ ही राहुल ढोलकिया की एक फिल्म प्रोडयूस करूंगा। फिलहाल इतनी ही प्लानिंग है।