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एक कवि सम्मेलन में राजकपूर से मिले थे शैलेंद्र

Sat, 14 Dec 2013 05:01 PM IST
अमर उजाला दिल्ली
अमर उजाला दिल्ली Updated Sat, 14 Dec 2013 05:01 PM IST
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conection between raj kapoor and shailendra

आज राजकपूर का जन्मदिन है और गीतकार शैलेंद्र की पुण्यतिथि। इनके मिलने की कहानी बहुत ही दिलचस्प है।

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गीतकार शैलेंद्र की आज पुण्यतिथि है और राजकपूर का जन्मदिन। यह एक अनूठा संयोग तो है, इससे भी बड़ा संयोग इन दो महान कलाकारों की मित्रता है। अगर ये दोनों साथ न होते तो शायद कई यादगार फिल्में और गुनगुनाने लायक गीत हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री को नहीं मिल सकते थे। शैलेंद्र को उनकी योग्यता के अनुरूप ख्याति दिलाने में राजकूपर की भूमिका थी तो राजकपूर को शो मैन बनाने में शैलेंद्र की।

कहानी तब की है जब राजकपूर, राजकपूर नहीं थे बल्कि एक उभरते हुए फिल्मकार थे और शैलेंद्र रेलवे के एक ऐसे कर्मचारी जिसे गाने का शौक हो।

शैलेंद्र मुंबई में एक रेलवे वर्कशॉप में नौकरी करते थे। उनकी ख्याति रेलवे यूनियन के अच्छे गीतकारों में थी। महज 24 साल की उम्र में 'आग' फिल्म का निर्देशन कर चुके और 'बरसात' फिल्म की तैयारी कर रहे राजकपूर रेलवे वर्कशॉप के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे।
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शैलेंद्र ने इस कार्यक्रम में कविता पाठ किया। राजकपूर उनकी कविताओं से प्रभावित हुए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद वह राजकपूर को अलग ले गए और उनसे अपनी फिल्म में काम करने का आग्रह किया। शैलेंद्र ने कहा कि वह अपनी नौकरी से खुश हैं। राजकपूर अपना विजटिंग कार्ड देते हुए यह कहकर चले गए कि कभी उनका मन बदले तो वह जरूर मेरे पास आएं।
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शैलेंद्र को याद आए राजकपूर


कुछ समय बाद शैलेंद्र की पत्नी बीमार पड़ गई। यार-दोस्तों से उधार लेकर भी इलाज का ख़र्च पूरा नहीं हुआ तो उन्हें राजकपूर की याद आई। शैलेंद्र ने पत्नी के इलाज के लिए राजकपूर से पैसे उधार लिए और कहा 6 माह के भीतर मैं यह उधार चुका दूँ। जब शैलेंद्र को लगा कि वे उधार नहीं चुका पाएंगे तो वह दोबारा राजकपूर के पास गए और कहा कि वे गीत लिखने के लिए तैयार हैं । उस समय तक ‘बरसात’ के सारे गीत रिकार्ड हो चुके थे। गीतकार थे हसरत जयपुरी।


राजसाहब ने हसरत साहब को समझाया और कहा कि मैँ शैलेंद्र को मौका देना चाहता हूं। आपको फिल्म के दो गीत हटाने पड़ेगे। यह गीत ‘प्रेम नगर में बसने वाले’ और ‘मैं जिंदगी में हरदम रोता ही रहूंगा थे। इन्हें हटाकर शैलेंद्र से दो गीत लिखवाए गए। यह गीत ‘बरसात में हमसे मिले तुम सनम तुमसे मिले हम’ और ‘पतली कमर है तिरछी नज़र है' थे। यह गीत खूब चले और यही चल निकली शैलेंद्र और राजकपूर की जुगलबंदी।

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