फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Entertainment Archives ›   birthday special on actress madhubala

मधुबाला की अधूरी ख्वाहिशें, अधूरी प्रेम कहानियां

Fri, 14 Feb 2014 01:22 PM IST
Updated Fri, 14 Feb 2014 01:22 PM IST
विज्ञापन
birthday special on actress madhubala

ये बहुत कम लोगों के साथ होता है कि ज़िंदगी से उन्हें वक़्त भले ही कम मिला हो लेकिन उनके हुनर और कामयाबी की दास्तां इतनी लंबी होती है कि तकदीर की लकीर ही बेमानी हो जाए। हुस्न और अदाकारी की वो छाप जिसे मधुबाला कहते हैं आज ही के दिन पैदा हुई थीं।

विज्ञापन


हालांकि मधुबाला को याद किया जाता है सिल्वर स्क्रीन की देवी के तौर पर लेकिन बीबीसी से विशेष बातचीत में उनकी सबसे छोटी बहन मधुर भूषण ने कहा कि मधु आपा को ज़िंदगी से कुछ नहीं मिला, ना प्यार मिला और ना जिससे शादी की वो ही मिला। मधुर के शब्दों में ''अल्लाह ने जो एक सबसे बड़ी चीज़ उन्हें नहीं दी वो थी ख़ुशी।''

विज्ञापन

दिलीप-मधुबाला-एक अधूरी प्रेम कहानी

birthday special on actress madhubala

मधुबाला की बहन मधुर भूषण बताती हैं कि फ़िल्मों में आना मधुबाला का चुनाव नहीं था। मधुर भूषण ने बहुत ही साफ़ शब्दों में कहा, ''नौ साल की वो मोहब्बत बहुत ख़ूबसूरत थी, उनकी शादी भी होने वाली थी लेकिन वो मोहब्बत बिखर गई। वो रिश्ता टूट गया और आज तक समझ नहीं आया कि आख़िर ख़ता किसकी थी। अब वो गुज़र चुकी हैं तो इस पर बात करना भी सही नहीं लगता।

लेकिन थोड़ी देर बात करने पर मधुर बताती हैं कि ''एक फ़िल्म के सिलसिले में हमारे पिता (जो मधु आपा का काम-काज संभालते थे) की क्लिक करें दिलीप साहब से अनबन हो गई थी। मामला कोर्ट में पहुंचा। हालांकि बाद में सहमति बन गई थी और विवाद ख़त्म कर लिया गया।

आपा ने दिलीप साहब से कहा कि आप माफ़ी मांग लीजिए लेकिन दिलीप साहब ने मना कर दिया। आपा ने कहा अकेले में बोल दीजिए, गले लगा लीजिए। यूसुफ़ भाई जान नहीं माने और वहां ये रिश्ता ख़त्म हो गया।''

कहां से हुई इसकी शुरुआत

birthday special on actress madhubala
मधुबाला की ख़ूबसूरती का असर ज़्यादा था या अदाकारी का ये भी अपने आप में एक चर्चा का विषय हो सकता है लेकिन फ़िल्मों में आना उनका चुनाव नहीं था।

मधुर भूषण ने बताया, ''मधु आपा सात साल की उम्र से गाना सीखती थी। बहुत शौक़ था सजने संवरने का लेकिन फ़िल्मों में काम तब शुरू किया जब घर में ग़रीबी आई। जब हमारे अब्बा की नौकरी छूट गई तो लोगों ने कहा आपकी बच्ची ख़ूबसूरत है इसे बॉम्बे ले जाए कुछ छोटे मोटे रोल मिल जाएंगे।''

मधुर कहती हैं कि उनके पिता को सारे ख़ानदान के ख़िलाफ़ जाकर क़दम उठाना पड़ा लेकिन वो मुंबई चले आए।

मधुर याद करती हैं, ''यहां उस समय बॉम्बे टॉकीज़ का स्टूडियो था। मुमताज़ शांति हिरोइन हुआ करती थीं। चंदू लाल शांति के यहां ले गए और बोले कि इसे देख लीजिए। मुमताज़ की छोटी सी बेटी का रोल मिला जिसमें मधु आपा ने गाना भी गाया था। वहां से इतनी तारीफ़ मिली कि बहुत सारी फ़िल्में मिलने लगीं। बाद में फिर 'नीलकमल' मिली, फिर 'महल' मिली।
विज्ञापन

मधुबाला और उनके पिता

birthday special on actress madhubala

मधुर भूषण कहती हैं कि उनके पिता के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है जबकि सच कुछ और है। मधुर सवालिया अंदाज़ में कहती हैं, ''आप ही बताइए कि सात साल की बच्ची अपने आप क्या कर पाती जब तक बहुत मज़बूत आधार ना हो। पिता ने ही उन्हे सही रास्ते पर लगाया। हमेशा साथ दिया। हमसे पूछिए हमारे वालिद क्या थे हमारे लिए।''

मधुर बताती हैं कि उनका ख़ानदान ऐसा था कि जिसमें बडों ने जो कह दिया वही लकीर होता था, उस वक़्त उनके ग़ैर-शिक्षित पिता ने जो कुछ किया उसकी मिसालें कम मिलेंगी।

मधुबाला की शख़्सियत पर बात करते हुए मधुर कहती हैं, ''उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत थी कि वो बहुत जल्दी सीख लेती थीं। उस वक़्त अंग्रेजी़ फ़िल्में देखने की बिल्कुल मनाही थी लेकिन वो छिप-छिप कर पिक्चर देखती थीं। ख़ुदा का दिया तोहफ़ा था कि वो इतनी हुनरमंद थीं।''

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed