यहां ग्लैमर कम काम ज्यादा है: आलिया भट्ट
-तीन साल में मात्र चार फिल्म करके आलिया भट्ट ने अपनी पुख्ता पहचान बनाई है। नई पीढ़ी के किशोरों और युवाओं पर उनका प्रभाव है। आलिया बॉलीवुड में लंबी पारी खेलना चाहती हैं और जिंदगी में स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा गंभीरता से लेती हैं। आलिया भट्ट से बातचीत की रवि बुले ने...
-इंडस्ट्री में तीन साल हो रहे हैं। अपने आस-पास कुछ बदला-बदला महसूस करती हैं या खुद को न्यूमकर मानती हैं?
- यहां अब सब जाना-पहचाना लगने लगा है। एक्साइटमेंट पहले से भी ज्यादा है। हमेशा यह फीलिंग अंदर रहती है कि क्या होने वाला है!
-कम समय में आपको लगातार अच्छे मौके मिले!
- मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे अच्छे लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। मुझे इनसे बहुत सीखने को मिला। चाहे वे ऐक्टर्स हों या डायरेक्टर। मुझे लगता है कि मैंने अब तक जो किया है वह सिर्फ दिल की बात सुन कर किया। मेरी कोशिश रहेगी कि मेरी यात्रा लंबी हो और इसलिए मैं आगे भी दिल की ही सुनूंगी। अगर मैं ज्यादा सोचना शुरू करूंगी तो शायद चीजें बदल जाएंगी।
-क्या इसका मतलब यह कि आप बगैर योजना बनाएं आगे बढ़ेंगी?
- ऐसा नहीं है। प्लान तो यह रहेगा कि अलग-अलग रोल चुनूं। सोच-समझ कर काम करूं।
-साल में एक फिल्म दो फिल्म की रफ्तार रखेंगी?
- बिल्कुल। मैं अपनी शक्ति जल्दी खर्च नहीं करना चाहती। तीन साल में पचास फिल्में कर लूं तो क्या मतलब है?
स्थापित हीरोइनों के मुकाबले आप छोटी बच्ची जैसी दिखती हैं?
-अन्य स्थापित हीरोइनों के मुकाबले आप छोटी बच्ची जैसी दिखती हैं। निर्देशक कहते हैं कि बेबी फेस चाहिए था इसलिए आपको लिया। इस ब्रेकेट में आप अकेली ऐक्ट्रेस हैं। क्या सोचती हैं?
- यह अच्छी बात है। मुझे लगता है कि इस लुक के बाद मुझे आगे जाकर खुद को री-इनवेंट करने का जब मौका मिलेगा तो वह अच्छा ही रहेगा। मैं चाहूंगी कि जब तक यह चलता रहे, चलाऊं। लेकिन इसे बहुत ज्यादा खींचना भी नहीं चाहूंगी। मैं इस फेज को एंजॉय कर रही हूं।
-क्या इस दौर में आपके पास ऐसे रोल आए, जो लगे हों कि यह समय से पहले है?
- ऐसे रोल आए हैं और मैं कहती भी हूं कि इन्हें करना चाहती हूं परंतु अभी नहीं।
-ये किस तरह के रोल थे?
- जैसे नेगेटिव रोल! मैं करना चाहूंगी लेकिन अभी तो नहीं।
- यानी आने वाले समय में हम आपको बदलते देखेंगे?
- जी बिल्कुल। मेरे फिल्मों के चुनाव में। मेरे व्यक्तित्व में। मैं बड़ी हो रही हूं और मेरी भी पर्सनैलिटी उभर रही है। बदलाव तो दिखेगा ही।
-17-18 साल की उम्र से लगातार फिल्मों में हैं। क्या जिंदगी में कुछ मिस करती हैं?
- नहीं। मुझे लगता है कि मेरे लिए यही नॉरमल रूटीन लाइफ है। बाकी मुझे एबनॉरमल लगता है। सब कुछ ठीक चल रहा है। घर में हम फिल्मों पर बात नहीं करते हैं। मेरे स्कूल के कुछ फ्रेंड्स हैं, उनके साथ भी समय बिताती हूं।
-नई पीढ़ी के लिए सोशल मीडिया जिंदगी का हिस्सा बना गया है। आप इसे कितना अहम मानती हैं?
- मैं इसे एकदम तो जरूरी नहीं कहूंगी। खुद को अन्य लोगों से कनेक्ट करने में और अपनी पर्सनैलिटी दूसरों को दिखाने में यह मददगार है। मेरे लिए यह फैन्स से जुड़ने का माध्यम है। परंतु यह ऐसा नहीं है कि इसके बिना नहीं रह सकते। इसलिए मैं ज्यादा ट्वीट-वीट नहीं करती कि अभी बाथरूम गई, अभी जिम गई, अभी कार में बैठी। थोड़ी तो मिस्ट्री रहनी चाहिए।
जिंदगी में हर बात को सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है
-फिल्में, टीवी, विज्ञापन, सोशल मीडिया... क्या ऐसा नहीं लगता कि आज सेलेब्रिटी ओवर एक्सपोजर के शिकार हैं?
- मुझे लगता है कि ऐक्टर को खुद चुनना पड़ेगा कि वह कहां दिखना चाहता है और कहां नहीं। सारे प्लेटफॉर्म पर होने से जरूर ओवर एक्सपोजर हो सकता है। मैं संतुलन बना कर चलती हूं।
-सोशल मीडिया में आप चुटकुले भी बने। इन्हें किस तरह लेती हैं?
- अपने आप पर हंसना कठिन है लेकिन इसमें मुझे कठिनाई नहीं दिखती। मुझे लगता है कि जिंदगी में हर बात को सीरियसली लेने की जरूरत नहीं है। सिर्फ हेल्थ को लेकर सीरियस रहना चाहिए।
-आपका परिवार फिल्मों से है तो आपने शुरू से इस ग्लैमर वर्ल्ड को देखा है। पहले बाहर से देख रही थीं और अब खुद इसका हिस्सा हैं। अंदर से इसे कैसा पाती हैं?
- यह बहुत ही अलग दुनिया है। लोग समझते हैं कि यहां ग्लैमर ज्यादा है और काम कम। जबकि उल्टा है। यहां काम ज्यादा है और ग्लैमर कम।
-नई पीढ़ी के बहुत से किशोरों-युवाओं पर आपका असर है। क्या कहेंगी उनसे?
- यही कहूंगी कि मुझे लगता है यह उम्र काम करने और नाम कमाने की है। अपनी छाप छोड़ने की है। इसलिए अपने लिए कोई बड़ा सपना देखो। कुछ करो। घर पर मत बैठो। आगे बढ़ो।