जब गब्बर के कहने पर मानी 'मौसी', 'बसंती' की करा दी शादी
शोले के बाद हर गांव में कुछ बसंती दिखने लगीं। कितनी ही वीरू-बसंती-मौसी की खबरें सामने आईं। लेकिन रामगढ़ की असली बसंती की कहानी अब तक अनकही है। दरअसल, शोले के सेट पर वीरू-बसंती की दो अलग-अलग कहानियां साथ-साथ चल रही थीं।
एक काल्पनिक-फिल्मी, दूसरी असली-जीवंत। एक तरफ पर्दे पर वीरू, बसंती को मनाने का सीन फिल्माया जा रहा होता था, तो दूसरी तरफ असल वीरू, बसंती को मनाने के लिए शहरी तकनीक अपना रहा था। ये कहानी है रामगढ़ की बसंती की, मुंबई से फिल्म की शूटिंग करने आए लाइटमैन वीरू की, जिनकी शादी शोले के सेट पर खुद गब्बर सिंह ने कराई।
असल में शोले की शूटिंग किसी आम सेट के इतर बंगलुरु से करीब 50 किलोमीटर एक पहाड़ी इलाके में हुई। यहां सेट तैयार करने और शूटिंग के लिए मुंबई से सैकड़ों लोग बुलाए गए। जबकि छोटे कामों के स्थानीय लोगों को चुना गया। इसी दौरान सेट पर खाना बनाने की जिम्मेदारी मुतम्मा को दी गई। ये कहानी उन्ही मुतम्मा की बेटी की है, उनके खाना बनाने के चक्कर में कब इतनी बड़ी बात हो गई उन्हें भी पता नहीं चला।
जब शोले में काम करने वालों को नहीं मिला दिनभर खाना
शोले की शूटिंग के दौरान एक दिन अचानक तहलका मच गया, जब यूनिट के सदस्यों को दिनभर खाना नहीं मिला। वजह थी, सेट की रसोइया मुतम्मा। उन्होंने शोले के सेट पर जाने से मना कर दिया। रमेश सिप्पी ही नहीं कोई भी नहीं समझ पा रहा था कि आखिर अचानक मुताम्मा को हुआ क्या?
सिवाय उस लाइटमैन के जो उनकी बेटी से प्यार करता था और उस जय के जो मुतम्मा को उनकी बेटी के लिए रिश्ता लेकर गया था। जब एक तरफ शोले बसंती-वीरू के रूठने मनाने के दृश्यों की शूटिंग होती, तो दूसरी तरफ असली वीरू भी बसंती को मनाने में लगा रहता। बात नहीं बनी तो उसने अपने दोस्त को मुतम्मा को मनाने के लिए भी भेजा, ठीक उसी तरह जैसे वीरू ने अपने दोस्त जय को मौसी के पास भेजा था।
मुतम्मा बताती हैं कि शाम को जब खुद रमेश सिप्पी उनके घर कारण जानने पहुंचे तो पूरे मामले का खुलासा हुआ। देखते ही देखते पूरे सेट पर असली वीरू बसंती के प्यार की कहानी फैल गई और सब उन्हें मिलाने में लग गए। दअरसल, मुतम्मा रोज शोले के सेट पर खाना बनाने जाती थीं, इसी बहाने रोज उनकी बेटी भी शूटिंग देखने पहुंच जाती थी। तब उसकी उम्र महज 15 साल थी।
रामगढ़ की 'बसंती' की अनसुनी कहानी
रामगढ़ की असली बसंती का नाम है, शांता। शोले की शूटिंग के दौरान वह दसवीं में पढ़ती थीं। शांता बताती हैं कि फिल्मों में बचपन से ही उनकी दिलचस्पी थी। जब शोले की शूटिंग में मां को काम मिल गया तो जैसे उनकी मुराद पूरी हो गई।
वह स्कूल से भाग-भाग कर शोले की शूटिंग देखने जाने लगीं। सेट पर शांता की एंट्री आसान और अंदर तक थी, क्योंकि उनकी मां रसोई में थीं। वह बताती हैं कि कई बार उन्हें खाना लेकर धर्मेंद्र, अमिताभ के पास जाने का भी मौका मिलता था।
इसी बीच मुंबई से आए लाइटमैन शंकर की नजर शांता पर पड़ी। कुछ दिनों बाद ही शंकर, शांता पर लट्टू हो गए। शांता बताती हैं कि एक दिन जब वो खाना लेकर शंकर के पास पहुंची तो शंकर ने उन्हें रोक लिया और अपने दिल की बात बताई। इससे शांता डर गईं और शंकर से बचने लगीं।
और यहां भी नहीं मानी 'मौसी'
शांता के मुताबिक एक दिन शंकर ने मौका पाकर उन्हें फिर से रोक लिया और शादी की बात कही। इसके बाद शांता को उनसे लगाव हो गया। लेकिन शांता अपनी मां से डरती थीं। इसलिए उन्होंने शंकर को पहले मां से बात करने के लिए कहा। लेकिन यहां भी वही हुआ जो शोले फिल्म में हुआ था।
शांता की मां मुतम्मा को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। मुतम्मा बताती हैं कि उन्हें डर था कि भले ये लड़का शादी की बात कर रहा हो, लेकिन शूटिंग के बाद वह मुंबई भाग जाएगा और उनकी लड़की की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। इसलिए उन्होंने शंकर को साफ मना कर दिया।
लेकिन शंकर माना नहीं। वह आए दिन शांता की मां को फिर से सोचने के लिए कहता, विश्वास करने के लिए कहता। लेकिन इसके बावजूद मुतम्मा नहीं मानी, तो शंकर ने अपने दोस्त महमूद को उन्हें मनाने के लिए उनके घर भेजा। और यह धमकी भी दिलवाई कि अगर वह शांता की शादी शंकर से नहीं करेंगी तो वह उसे भगा ले जाएगा। यह सुनकर मुतम्मा के होश उड़ गए और उन्होंने शोले के सेट पर फिर कभी न जाने की ठान ली।
गब्बर सिंह ने कराई बसंती की शादी
मुतम्मा के सेट पर न आने का कारण जाकर रमेश सिप्पी आश्चर्यचकित रह गए। साथ ही उन्हें यह डर भी सताने लगा कि मुंबई से आई टीम अगर इस तरह की घटना को अंजाम देगी तो उन्हें भारी स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ेगा और उनकी फिल्म आधे में रुक जाएगी। इसलिए सेट पर वापस जाकर उन्होंने लाइटमैन की क्लास लगा दी।
लेकिन वहां शंकर के दिल हालत जानकर वो भौचक्क रह गए। शंकर वास्तव में शांता से प्यार करने लगा था। लेकिन रमेश सिप्पी अपनी फिल्म के बीच कोई विवाद नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने शंकर को मुंबई वापस भेजने का निर्णय किया। लेकिन मामले की पूरी जानकारी लेने और शंकर से बात करने के बाद संजीव कुमार और अमजद खान यानि ठाकुर और गब्बर ने उसकी शादी का बीड़ा अपने सिर उठा लिया।
बाद में गब्बर सिंह ने शांता की मां मुतम्मा को समझाया और विश्वास दिलाया कि शंकर उनकी बेटी का जीवनभर साथ देगा। तब जाकर रामगढ़ की बसंती और मुंबई के वीरू की शादी हुई। शांता बताती हैं कि संजीव और अमजद उन्हें और शंकर को लेकर बंगलुरु के रजिस्ट्रार ऑफिस गए और खुद शादी के गवाह बने। बाद में शोले के सेट पर दोनों की धूमधाम से शादी कराई गई।
अब तीन बच्चों की मां है बसंती
शंकर, अमजद खान और संजीव कुमार के विश्वास पर खरे उतरे। शंकर ने साबित किया कि वे शांता से असल में प्यार करते थे। शूटिंग के बाद वो मुंबई तो चले गए लेकिन जीवीकोपार्जन के लिए। पैसे कमाने के बाद वह फिर से रामनगरम लौट आए और यही पर घर बसा लिया।
शांता बताती हैं कि शंकर आज भी दो से तीन महीने पैसे कमाने के लिए मुंबई चले जाते हैं। बाकी नौ महीने वो रामनगरम में ही रहकर खेती व अन्य काम करते हैं। दोनों बेहद सुखी है। शांता की मां भी अभी जीवित और खुश हैं।
पिछले साल शांता-शंकर ने अपनी एक बेटी की शादी भी मुंबई के एक लड़के से की है। शंकर बताते हैं कि शोले ने उन्हें उनकी जिंदगी है। इससे पहले उनकी जिंदगी का कोई उद्देश्य नहीं था। वह फिल्म यूनिट के साथ यहां-वहां भटकते रहते थे। लेकिन शोले की शूटिंग ने उन्हें शांता से मिलाया और उनका घर बसाया।