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अपने अतीत की कुछ बातों पर आमिर को है 'शर्म'

Thu, 20 Nov 2014 08:05 AM IST
Updated Thu, 20 Nov 2014 08:05 AM IST
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aamir unhappy with his some last films

"हम अपनी फ़िल्मों में औरतों का चित्रण ठीक से नहीं करते। मुझे शर्म और दुख है कि मैं भी इस तरह की कई फ़िल्मों का हिस्सा रहा हूं।"

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हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री को प्रमोट करने पहुंचे आमिर ख़ान ने मीडिया से बात करते हुए कहा। उन्होंने आगे कहा, "ये बड़े शर्म की बात है कि हमारी इंडस्ट्री में ऐसा हो रहा है। अब वक़्त आ गया है कि हम सब अभिनेता, निर्देशक, लेखक अपने आप से पूछें कि क्या ये सही है? क्या हम सही शिक्षा दे रहे हैं अपने बच्चो कों?"

अपने टीवी शो 'सत्यमेव जयते' में भी आमिर ने ये मुद्दा उठाया था और 'चिपका ले सैंया फ़ेविकोल से', 'कद्दू कटेगा तो सबमें बंटेगा' जैसे तमाम आइटम गानों को आड़े हाथों लिया।आमिर ने कहा कि बॉलीवुड औरतों के प्रति असंवेदनशील है। आमिर के इस आरोप से क्या बॉलीवुड भी सहमत है। जानते हैं किसने क्या कहा?

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फ़रहान और ज़ोया अख्तर

aamir unhappy with his some last films

फ़रहान अख़्तर आमिर की बातों से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं। वो कहते हैं, "आइटम गाने बिलकुल शर्मनाक हैं। इसके अलावा मुझे उन फ़िल्मों से भी दिक़्क़त है जिनमें हीरो, हीरोइन के साथ बदतमीज़ी से पेश आता है। इससे लोगों के बीच ग़लत संदेश जाता है।"

वहीं फ़रहान की बहन फ़िल्मकार ज़ोया अख़्तर कहती हैं कि आइटम गानों के लिए दर्शक भी ज़िम्मेदार हैं सिर्फ़ बॉलीवुड को दोष देना ठीक नहीं। ज़ोया के मुताबिक़ महिला निर्देशकों के बढ़ने से बॉलीवुड में महिलाओं का चित्रण और बेहतर तरीक़े से होगा।

किरण राव और बाकी परिवार

aamir unhappy with his some last films

आमिर ख़ान की पत्नी और निर्देशक किरण राव ने कहा, "आइटम गाने वाहियात होते हैं। हमारी फ़िल्मों में ग्लैमर पर ही ज़ोर दिया जाता है और सारा फ़ोकस होता है कि हीरोइन कितनी ख़ूबसूरत लग रही है। आइटम गाने भी इसी सोच का हिस्सा है।"

लेकिन किरण आशान्वित है कि वक़्त बदल रहा है और स्थिति पहले से बेहतर हो रही है। लेकिन आमिर ख़ान के भांजे उनसे सहमत नहीं है।

वो कहते हैं, "विदेश की फ़िल्में भी ऐसी होती हैं। बल्कि उनमें औरत ही नहीं पुरुष को भी ऑब्जेक्ट की तरह दिखाया जाता है। समाज में जो ग़लत होता है उसके लिए फ़िल्मों और मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराना ग़लत है।"

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बाकी क्या कहते हैं?

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'आर राजकुमार' फ़िल्म के 'कद्दू कटेगा' गाने को लिखने वाले आशीष पंडित कहते हैं, "सत्यमेव जयते देखने के बाद मुझे आभास हुआ कि मेरे गाने के बोल अपमानजनक थे। लेकिन इन सब को मनोरंजन के लिए बनाया जाता है। फ़िल्मों को ज़्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। अब गानों की उम्र 20 दिन होती है।

इस दबाव में हमें ऐसे गाने लिखने पड़ते है जो नज़र में आ जाएं। आशीष पंडित ये भी कहते हैं कि वो ऐसे गाने लिखने के लिए क़त्तई शर्मिंदा नहीं है। वो कहते हैं, "यहां बड़ी निर्मम प्रतियोगिता है। मैं नहीं लिखूंता तो कोई और लिख देगा। बड़ी निर्मम प्रतियोगिता है।"

हैप्पी न्यू ईयर' के संवाद लेखक मयूर पुरी आमिर के दावे को सिरे से नकार देते हैं। वो कहते हैं, "इस तरह के दावे करना ग़लत है। हिंदी फ़िल्मों का काम मनोरंजन करना है। इसके अलावा हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।"

चिपका ले सैंया फ़ेविकोल' की संगीतकार जोड़ी साजिद वाजिद आमिर से सहमत भी हैं और ख़फ़ा भी। उनका कहना है कि वो आमिर ख़ान का सम्मान करते हैं और उनका शो सत्यमेव जयते काफ़ी पसंद भी करते हैं।

लेकिन इस संगीतकार जोड़ी को अफ़सोस है कि उनका गाना आमिर ने द्विअर्थी गानों की लिस्ट में रखा। साजिद वाजिद के मुताबिक़, "आमिर को अगर बच्चों और समाज की इतनी चिंता है तो वो पीके में अपना नग्न पोस्टर क्यों जनता के बीच लाते हैं।"

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