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मिलिए 'स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर' आलिया, वरुण और सिद्धार्थ से
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 20 Oct 2012 11:12 AM IST
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जी हां, तीनों ही नए हैं, प्रतिभाशाली हैं और धमाल मचा रहे हैं। आइए मिलते हैं करन जौहर के तीन स्टूडेंट आलिया भट्ट, सिद्धार्थ मल्होत्रा और वरुण धवन से। जिनकी फिल्म 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' ने बॉक्स आफिस धूम मचा दी है। फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय बाद नई स्टार कास्ट वाली किसी फिल्म को ऐसी शानदार ओपनिंग मिली है। तो करन के इन तीन स्टूडेंट्स ने कैसे की इस फिल्म की तैयारी। बता रहे हैं वे खुद।
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सबसे पहले आप तीनों को बधाई, आपकी फिल्म दर्शकों को पसंद आ रही है। अच्छी ओपनिंग की वजह करन जौहर का बैनर है या आप आप तीनों ने अच्छा काम किया है?
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वरुण :सिर्फ बैनर की वजह से फिल्मों को ओपनिंग मिलती तो फिर हर बड़े प्रोडक्शन की फिल्म हिट ही होती। निस्संदेह करन सर का नाम ही काफी है। लेकिन मुझे लगता है कि हम तीनों की मेहनत रंग लायी। दर्शकों ने हमारी मेहनत की वजह से फिल्म पसंद की।
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आलिया: आइ एम रियली फीलिंग क्लाउड ऑन नाइन। पहली फिल्म से दर्शकों का इतना प्यार मिल रहा है। आइ एम सो एक्साइटेड
सिद्धार्थ मल्होत्रा: टचवुड, वीकेंड में हमें और सफलता मिले।
आप तीनों ही नये कलाकार हैं तो करन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? पहली बार जब आपने कैमरा फेस किया तो कैसा लगा। क्या आप तीनों नर्वस थे?
आलिया: आइ एम श्योर, सिद्धार्थ और वरुण तो नर्वस नहीं रहे होंगे, क्योंकि उन्होंने करन के साथ अस्टिट किया है। तो वे अच्छी तरह से माहौल से वाकिफ थे। लेकिन मैं बहुत ही नर्वस थी। हालांकि मैंने फिल्में बनती देखी हैं। लेकिन कैमरे के सामने आना बहुत टफ था। हां, पहले दिन जब शूटिंग शुरू हुई तो करन सर ने मुझे बहुत आराम से समझाया था कि मैं भूल जाऊं कि मेरी पहली शुरुआत है। कैमरे से दोस्ती तभी होगी। जब उससे डरना छोड़ूंगी। मैं ये जरूर कहना चाहूंगी कि करन सर से मैंने बहुत सीखा है। पूरे सेट पर मुझे उन्होंने सबसे अधिक पैंपरड किया है।
वरुण: हां, और आलिया की वजह से हमें कितनी डांट भी पड़ी है... (हंसते हुए)
सिद्धार्थ: हां, सबकी लाड़ली जो ठहरी आलिया...
आलिया: हां, तो डांट तो पड़ती न तुमलोग मेरी कितनी टांग खिचाई करते थे।
वरुण: अब लीजेंड के सामने हम क्या।
लीजेंड? इससे क्या मतलब है आपका?
वरुण: एक्चुअली, हम आलिया को लीजेंड ही पुकारते हैं। आखिर वह हिंदी सिनेमा के लीजेंडरी निर्देशक की बेटी जो है... (हंसते हुए)। बहरहाल आपने जो प्रश्न किया था। उसके जवाब में मैं यही कहूंगा कि करन सर भले ही बहुत कैजुअल रहते हैं। आमतौर पर... लेकिन काम के वक्त वह बहुत सीरियस रहते हैं। उनका प्रोफेशनल अप्रोच मुझे बेहद पसंद है और शायद यही वजह थी कि उनके साथ काम करने में कभी नर्वसनेस नहीं हुई।
वे जब हमें सीन समझाते थे तो एक दोस्त की तरह और जब कैमरा ऑन होता था तो वे निर्देशक की तरह हर एंगल से हमारा काम देखते थे। वैसे मैं कहना चाहूंगा कि करन सर की वजह से ही मैंने निर्देशन की बारीकियां भी सीखीं और उनकी वजह से ही मेरे अभिनय में भी मुझे यह बात समझ आती थी कि मुझे कौन सा शॉट किस तरह देना है।
सिद्धार्थ: मैं खुद को लकी मानता हूं कि मुझे करन सर के साथ सीखने का मौका मिला। लेकिन मैं दिल से कहना चाहूंगा कि मैं अभिनय करते वक्त थोड़ा नर्वस था। क्योंकि अभिनय करना बाकी कामों से बिल्कुल अलग है। आप कैसे दिखते हैं। क्या करते हैं। कैमरे से कुछ छुपा नहीं रहता। ऐसे में आपको एक्स्ट्रा अफर्ट तो लगाना ही पड़ता है। सो, मैं नर्वस था। लेकिन जैसे जैसे शूटिंग के दिन बीतते गये। कांफिडेंस बढ़ता गया और करन सर ने हमसे जो दोस्ताना व्यवहार रखा, उसकी वजह से झिझक कम होती गयी।
आलिया और वरुण आपसे यह जानना चाहेंगे कि आप दोनों ही फिल्मी परिवार से हैं तो क्या आप मानते हैं कि बॉलीवुड में एंट्री लेने के लिए यह बात सहायक होती है कि आप किसके बेटे-बेटी हैं और सिद्धार्थ से यह जानना चाहेंगे कि एक न्यूकमर होने के साथ-साथ बॉलीवुड से बाहर आकर यहां अपनी पहचान बनाना कितना कठिन है?
आलिया: ऐसा सबको लगता है कि बॉलीवुड में पहले से मेरा परिवार है तो मुझे कुछ भी मेहनत नहीं करनी पड़ी होगी। लेकिन मैंने तो ऑडिशन के माध्यम से फिल्म में एंट्री ली। उस वक्त लगभग 500 लोगों के साथ ऑडिशन दिया था मैंने। मैंने इससे पहले कुछ और फिल्मों के लिए भी ऑडिशन दिया था और अगर सरनेम ही काम आता तो उस वक्त भी मुझे काम मिल सकता था न। हां, इतना जरूर है कि अगर बॉलीवुड में आपको कोई पहले से जानता है तो वह आपका मोरल सपोर्ट बन सकता है। दैट्स इट।
वरुण: मेरे पापा (डेविड धवन) ने आज से नहीं। जब से मैंने उनसे यह बात शेयर की थी कि मैं एक्टिंग करना चाहता हूं। उन्होंने साफ कहा था तो फिर एक्टर बनने की तैयारी में जुट जाओ। इतना आसान नहीं है। मेहनत करने और जूझने के लिए तैयार हो जाओ। शायद यही उनका ईशारा था कि मुझे अपने बलबुते ही पहचान बनानी होगी। ऐसे में पापा ने कभी किसी स्टार को लांच नहीं किया है तो उनके माध्यम से लांच होने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन अगर रास्ते आसान होते तो निर्देशन सीख कर यहां नहीं आता। शॉटकर्ट मारता।
मैं तो मानता हूं कि न्यूकमर्स के साथ यह इंडस्ट्री अधिक स्ट्रिक्ट है। आपकी एक चूक आपका अंत हो सकती है। साथ ही हमारी जिम्मेदारियां भी ज्यादा हैं कि हमें अपने सरनेम का नेम खराब नहीं करना है। बॉलीवुड सिर्फ टैलेंटस का ही है। हां, यह जरूर है कि अगर आपके साथ किसी का नाम जुड़ा है तो लोग आपसे ऑडिशन के वक्त भी अच्छे से बात करते हैं। कभी कभी कॉफी भी पिला देते हैं( हंसते हुए)। बस।
सिद्धार्थ : हां, यह सच है कि न्यूकमर के लिए काम मिलना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन टचवुड मुझे अच्छे लोगों का साथ मिलता गया। पहले जब मम्मी लोगों को बताती थी कि मैं एक्टर बनने मुंबई आया हूं तो लोग हंसते थे। अब वही लोग मां को अखबार में नाम देख कर बताते हैं कि देखो सिद्ध का नाम छपा है। वैसे, मैंने जब शुरुआत की थी तो मेरे एक दोस्त ने मेरी बहुत मदद की। मैं आया एक्टर बनने ही था। शुरुआत में मुझे एक फिल्म भी मिली थी। अनुभव सिन्हा की। लेकिन फिर वह फिल्म बन नहीं पायी। मैं उस वक्त हताश हो गया था। लेकिन मेरे दोस्त ने ही कहा कि मुझे अस्टिट करना चाहिए और अस्टिट करते करते फिल्म मिल गयी तो मुझे लगता है कि यह सच है कि जगह बनाना मुश्किल तो है। लेकिन अगर एक बार पहला ब्रेक मिले और आप अपना काम दिखा लें तो निश्चित तौर पर फिर रास्ते आसान हो जाते हैं।
आप तीनों अपने कॉलेज और स्कूल में कैसे स्टूडेंट थे?
वरुण: मैं तो बेहद ही शरारती था। हां, लेकिन मुझे कल्चरल एक्टिविटिज में बहुत मन लगता था। मुझे याद है मुझे एक बार एक प्ले में परी बना दिया गया था। उसी वक्त मैंने पहली बार अभिनय किया था। वैसे मेरे मार्क्स ठीकठाक ही आते थे।
आलिया: अभी तो मेरी पढ़ाई हो ही रही है। मैं एकडेमिक्स में अच्छी रही हूं। लेकिन यह भी सच है कि मुझे हमेशा से एक्टिंग का शौक रहा है तो मैं पढ़ाई पर कम ध्यान देती थी।
सिद्धार्थ: मैं अच्छा स्टूडेंट रहा हूं। लेकिन मैं कॉलेज में ज्यादा पॉपुलर अपने स्पोर्ट्स की वजह से था। स्पोटर्स एक्टिविटिज का मैं हमेशा हिस्सा बना रहता था।
वरुण और सिद्धार्थ, फिल्म के सेट पर आप दोनों में कोई लड़ाई नहीं हुई। किसी शॉट में ऐसा नहीं लगा कि मुझे कम फुटेज दिये जा रहे हैं?
वरुण-सिद्धार्थ (दोनों ही बोल पड़े): लड़ाई? बल्कि हम दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त बन गये हैं।
सिद्धार्थ: और तो और मैंने तो एक सीन में वरुण को इतनी जोर से हाथ मारा था कि उसके चेहरे से खून निकल आया था। और फिर जब मैं उसे लेकर गाड़ी में जा रहा था। तो मुझे वरुण कहता है कि यार कोई अच्छा सा गाना लगा न। उस वक्त तक मैं वरुण को बहुत अच्छे से नहीं जानता था और मुझे बुरा लग रहा था कि मेरी वजह से उसे चोट लगी है। लेकिन इस वाक्य के बाद मुझे लगा कि वरुण जॉली मूड का है।तो हमारे बीच कंफर्ट लेवल आ गया।
वरुण: जॉली मूड का तो होना बनता है न बॉस। कॉमेडी किंग का बेटा हूं... (हंसते हुए)
हमने सुना कि आप तीनों फिलहाल केवल करन के साथ काम कर सकते हैं। तीन सालों के लिए तो क्या इस बीच किसी और प्रोडक्शन हाउस के साथ काम नहीं कर सकते?
वरुण: हां, कांट्रैक्ट है कि हमें धर्मा प्रोडक्शन के साथ तीन फिल्में करनी है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम बाहर काम नहीं कर सकते।
आलिया, पापा महेश भट्ट से किस तरह के टिप्स मिले हैं?
पापा ने मुझे बस यही कहा है कि सोच समझ कर फिल्में साइन करूं क्योंकि शुरुआती दौर की फिल्में ही करियर को शेप करेगी।
और वरुण आपको?
पापा तो जब से मेरी शूटिंग शुरू हुई थी। तब से अब तक मुझे समझाते आये हैं कि इस इंडस्ट्री को करीब से जानो और फूंक फूंक कर कदम रखो। काम ही आगे काम दिलायेगा। सो, केवल बॉडी बिल्डिंग पर नहीं स्किल पर भी काम करो। पापा ने हिंदी सुधारने की भी सलाह दी है।
आप तीनों के अनुसार स्टूडेंट ऑफ द ईयर बनने के लिए किसी स्टूडेंट में क्या-क्या क्वालिटी होनी चाहिए?
आलिया: बंदा ओबिडियेंट हो, रेगुलर हो। स्मार्ट हो और हां उसके पास सेंस ऑफ ह्मुमर भी होना चाहिए।
सिद्धार्थ: हॉनेस्ट हो। अनुशासित हो। और स्पोर्ट्स का नॉलेज हो।
वरुण: शरारती हो, खुराफाती हो और टीचर्स की खूब टांग खिंचाई करता हो (हंसते हुए)।
आप तीनों कभी स्टूडेंट ऑफ द ईयर बने हैं?
आलिया: मैं तो नहीं । लेकिन क्लास में फर्स्ट आयी हूं कई बार।
सिद्धार्थ: हां, एक साल मैंने स्पोटर्स में कई अवार्ड जीते थे।
वरुण: ओवियसली नॉट।
आप तीनों के पसंदीदा और नापसंद विषय?
आलिया: मनपसंद है इंगलिश लिटरेचर और नापसंद मैथ्स।
सिद्धार्थ: पॉलिटिकल साइंस फेवरिट है और फिजिक्स बोरिंग।
वरुण : मैथ्स सबसे अधिक पसंद था। अंगरेजी बोरिंग।