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पूरा होने जा रहा है कोहली का बड़ा सपना

Mon, 24 Nov 2014 11:04 AM IST
Updated Mon, 24 Nov 2014 11:04 AM IST
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Virat Kohli attacks on Australia as Test match captain.

टेस्ट क्रिकेट में भारत की कप्तानी करना हर क्रिकेटर का सपना होता है और ऐसा ही सपना टीम इंडिया के धुरंधर बल्लेबाज विराट कोहली ने भी देखा था। 20 जून 2011 को कैरियर का पहला टेस्ट मैच खेलने वाले विराट कोहली ने शायद ही कभी सपने में सोचा होगा कि सिर्फ तीन साल के अंदर और 29 टेस्ट मैचों के बाद उन्हें टेस्ट टीम की कप्तानी करने का मौका मिल जाएगा।

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...लेकिन ऐसा हुआ और कोहली की अगुआई में शुक्रवार को 19 सदस्यीय भारतीय दल ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए उड़ान भरी। ऑस्ट्रेलिया रवाना होने से पहले इस युवा कप्तान की आंखों में चमक और चेहरे पर उल्लास साफ नजर आ रहा था।
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भारतीय टीम इस दौरे पर चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के चोटिल होने के कारण विराट कोहली को पहले टेस्ट मैच में बतौर कप्तान उतरने का मौका मिलेगा। धोनी पहले टेस्ट मैच के बाद टीम से जुड़ जाएंगे। भारतीय टीम की कप्तानी से कोहली बेशक काफी खुश हैं लेकिन उन्हें इस बात का भी अंदाजा है कि पहला टेस्ट मैच उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

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जेहन में ताजा है वो करारी शिकस्त

Virat Kohli attacks on Australia as Test match captain.

कोहली के जेहन में 2011-12 का ऑस्ट्रेलिया दौरा भी याद है जब टीम इंडिया को 0-4 से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। उस टीम में धोनी की कमान में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग जैसे धुरंधर थे जिनसे पूरी दुनिया के गेंदबाज खौफ खाते थे। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया की तेज और बाउंसी विकेट ने इन दिग्गजों के पैर उखाड़ दिए। नतीजतन इस दौरे पर मिली शर्मनाक हार के बाद सचिन, लक्ष्मण और द्रविड़ का कैरियर ही खत्म हो गया जबकि गंभीर और सहवाग का टीम से पत्ता साफ हो गया।

हालांकि कोहली के लिए सकारात्मक बात यह है कि उस निराशाजनक दौरे पर वह भारतीय टीम की ओर से सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। कोहली ने उस दौरे पर आठ पारियों में 37.50 की औसत से सर्वाधिक 300 रन बनाए थे जिसमें एक शतक और एक अर्द्धशतक था। उनके अलावा अन्य कोई भारतीय बल्लेबाज 300 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका था।

सीरीज का पहला मैच सर्वाधिक अहम होता है और कोहली के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी युवा टीम के मनोबल को बनाए रखना है। खुद कोहली मानते हैं कि पिछले दौरे से उन्होंने काफी कुछ सीखा है और इसी आधार पर वह मैदान पर उतरेंगे। हालांकि इस युवा टीम से बड़ी उम्मीदें करना तो ज्यादती होगा लेकिन यदि रोहित शर्मा, शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा और मुरली विजय जैसे नौजवान अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने में कामयाब रहे तो तस्वीर बदल भी सकती है।

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