सुधार के लिए कड़े फैसले जरूरी
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एपी मिश्रा
एमडी, यूपी पॉवर कॉरपोरेशन
बिजली दरें बढ़ाने का फैसला लोगों को कड़ा लग सकता है, लेकिन भविष्य में यह उपभोक्ताओं के लिए ही फायदेमंद साबित होगा।
बिजली विभाग जितना आत्मनिर्भर होगा, बिजली व्यवस्था उतनी ही सुदृढ़ होगी। एफआरपी (फाइनेंशियल रिस्ट्रक्चर प्लान) की मदद से भी बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी।
31 जुलाई 2012 में ग्रिड संकट होने के अगले दिन ही मुझे तैनाती मिली थी। उस समय एक बड़ी चुनौती मेरे सामने थी। ग्रिड को सामान्य होने में तीन दिन लग गए। ग्रिड से ओवरड्रॉल किया गया।
करीब एक हजार करोड़ रुपए का बकाया हो गया। काफी रकम चुकाई, फिर भी बड़ा हिस्सा चुकाना बाकी है, लेकिन इस पूरे अनुभव से सबक लिया और ठाना कि किसी भी कीमत पर ओवरड्रॉल की स्थिति नहीं आने देंगे।
पूरे महकमे में मैंने अपने इस संदेश को पहुंचा भी दिया। इसके बाद शुरू हुए संकट को दूर करने के प्रयास। एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीदी गई। ओपेन मार्केट से करीब 300 मेगावाट और बैंकिंग पावर से 1500 मेगावाट बिजली ली।
बैंकिंग पावर के लिए हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर से बात हुई है। वहां बिजली सरप्लस रहती है। जाड़ों में उनकी जरूरत ज्यादा होती है। उस दौरान उनको बढ़ाकर बिजली लौटानी होगी।
इस खरीद-फरोख्त के दौरान इस बात का खास ध्यान रखा गया कि खरीद रेट किसी भी कीमत पर 3.50 रुपए से ज्यादा न हों। इस सख्ती और प्लानिंग का ही असर रहा कि बिजली खरीद के रेट को लेकर कोई हो-हल्ला नहीं हुआ।
नहीं तो पिछली बार यह मामला लोकायुक्त तक पहुंच गया था। विभाग की निर्भरता बढ़ाने के लिए राजस्व वसूली पर भी खासा जोर दिया, लेकिन 17000 करोड़ रुपए का बकाया विभाग के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती है।
इससे निपटने के लिए जगह-जगह कैंप लगाने के साथ तमाम प्रयास किए गए। कनेक्शन देने का भी अभियान चलाया गया। इसके अलावा बिजली चोरी रोकने के लिए एरियल बंच कंडक्टर लगाए गए।
ताबड़तोड़ छापेमारियां हुईं। इसी का नतीजा है कि इस बार मई तक 1602 करोड़ रुपए की राजस्व वसूली हो चुकी है। जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 1247 करोड़ था।