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नए साल पर मिलेगा पुरनिया ओवरब्रिज का गिफ्ट
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Sun, 22 Dec 2013 12:09 PM IST
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लखनऊ में हम कई ओवर ब्रिज बना रहे हैं। पुरनिया ओवर ब्रिज लगभग तैयार है।
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इसे हम 26 जनवरी तक चालू कर देंगे। इसके अलावा आलमनगर और आरडीएसओ रेलवे ओवर ब्रिज पर हमने निर्माण कार्य पूरा लिया है। एक छोटा सा हिस्सा रह गया है जिसे रेलवे को बनाना है।
जल्द ही ये दोनों पुल भी शुरू हो जाएंगे। इसके अलावा मल्हौर में हमने भी नए ओवर ब्रिज का काम शुरू हो गया है।
राज्य सेतु निगम ने प्रदेश के अलावा दिल्ली, पुणे, मुम्बई और बंगलौर के अलावा विदेशों में भी कई बड़े पुल बनाए हैं।
लखनऊ इस समय ज्यादातर ओवर ब्रिज का ही काम चल रहा है। डालीगंज पुल हमने रिकॉर्ड नौ महीने में बनाकर तैयार कर दिया। अब पुरनिया का पुल शुरू करना है। इन पुलों से जल्द ही एक बड़ी आबादी को राहत मिलेगी।
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हम तो अपना काम समय से पूरा कर लेते हैं। बीच वाला हिस्सा जो रेलवे लाइन के ऊपर होता है, वह रह जाता है। उसे रेलवे को ही पूरा करना होता है। यदि सभी विभागों की क्लियरेंस मिल जाए तो हम 9 से 12 महीने में ओवर ब्रिज पूरा कर लेते हैं।
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इस साल प्रदेश भर में 100 पुल बनाने का लक्ष्य था जिन पर काम चल रहा है। माल एवेन्यू क्रॉसिंग पर रक्षा मंत्रालय से एनओसी का इंतजार है। इसके लिए हम लगातार प्रयास भी कर रहे हैं।
शहर में बनेंगे दो नए अंडरपास
शहर में दो नए अंडरपास भी बनाए जाएंगे। एक अंडरपास गांधी सेतु के पास से जनेश्वर मिश्र पार्क तक बनाया जाएगा।
अंबेडकर स्मराक के सामने जहां गांधी सेतु समाप्त होता है, उसी के आसपास से यह अंडरपास शुरू होगा और जनेश्वर मिश्र पार्क तक पहुंचाएगा। दूसरा अंडरपास सीतापुर रोड से लखनऊ विश्वविद्यालय के नए परिसर के लिए बनाया जाएगा।
रेलवे लाइन के कारण नए परिसर पहुंचने के लिए काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। अंडरपास बन जाने से विश्वविद्यालय नए परिसर का रास्ता आसान हो जाएगा।
ताकि मेट्रो में न आए अड़चन
मेट्रो के काम में कोई अड़चन न आए, इसे ध्यान में रखकर ही हम काम कर रहे हैं। हम भी ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते जिससे निर्माण शुरू करने के बाद कोई रुकावट आए।
यही वजह है कि हम डीएमआरसी से तालमेल करके ही कोई काम शुरू करेंगे। हजरतगंज में अंडरपास या फुट ओवरब्रिज जैसी प्लानिंग अभी इसीलिए टाल दी गई है। पहले मेट्रो की योजना देख ली जाए क्योंकि हजरतगंज के आसपास ही मेट्रो का भी काफी काम भूमिगत होना होगा।
अब बारिश में भी बनेंगे नदी पर पुल
हमारी सबसे बड़ी समस्या यह थी कि बारिश में चार से छह महीने तक नदियों पर पुल बनाने का काम रुका रहता था। नदी का बहाव तेज होने के कारण उनमें बीम नहीं डाल पाते थे। काम होते हुए भी हमें खाली बैठना पड़ता था।
अब हमने नई तकनीक निकाली है। बारिश में भी काम चलता रहेगा। दोनों किनारों पर पुल का कुछ हिस्सा बन जाएगा। उसी पर हम अलग से बीम बनाते रहेंगे। उसके बाद हम उन्हें ऊपर से नदी में सरकाकर खड़े कर देंगे। तेज बहाव में भी पहले से तैयार बीम खड़े किए जा सकेंगे।
वाहनों की बढ़ती संख्या से फेल हो रहीं प्लानिंग
महानगरों की जनंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है। वाहनों की संख्या उससे भी तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि अच्छी-अच्छी प्लानिंग भी फेल हो जा रही हैं। मैं आवास विभाग में भी रहा हूं।
इंदिरा नगर कॉलोनी 60 हजार की आबादी के लिए बनी थी। वहां से शहर की ओर आने के लिए एक सड़क पर्याप्त थी। अब इंदिरा नगर और गोमती नगर और आसपास 16 लाख की आबादी हो गई।
यह आबादी लगातार तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि गोमती नगर ओवरब्रिज पर बार-बार हमें नए पुल बनाने पड़ रहे हैं। गोमती पर आठ लेन पुल बन गया। यहां तो फिर भी गनीमत है।
दिल्ली में तो पूरे देश से लोग पलायन कर रहे हैं। इतने पुल और मेट्रो के बावजूद जाम के कारण अपने वाहन से गंतव्य पर सही समय से नहीं पहुंच पाते।