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सरकार की कार्यशैली से नाखुश राजस्थान हाईकोर्ट ने भंग किया ओबीसी आयोग

Thu, 20 Oct 2016 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ जयपुर
अमर उजाला ब्यूरो/ जयपुर Updated Thu, 20 Oct 2016 12:02 AM IST
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Rajasthan High Court dissolved OBC Commission
राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बैंच ने बुधवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को भंग कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से जवाब नहीं देने में टालमटोल करने पर हाईकोर्ट ने दो दिन पहले ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक जैन को अवमानना मामले में एक माह के वेतन को दान करने के आदेश दिए थे। यह भी कहा था कि वे जिस संस्था को भी दान दें, उसकी रसीद भी साथ लेकर आएं। जैन ने कोर्ट के समक्ष रसीद भी पेश की।
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इस मामले में सरकार द्वारा पेश जवाब में कहा है कि वैधानिक ओबीसी आयोग के गठन के लिए राज्य केबिनेट से मंजूरी हो गई है। शीतकालीन सत्र में इसे विधानसभा से मंजूर करवाकर ओबीसी कमीशन को वैधानिक दर्जा दे दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने ओबीसी कमीशन को भंग कर अध्यक्ष व सदस्यों का वेतन रोकने के आदेश दिए। इस मामले में समता आंदोलन समिति ने यह याचिका लगाई थी। 
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10 अगस्त 2015 को समता आंदोलन समिति ने यह याचिका लगाई थी। इसमें बताया कि ओबीसी आयोग को कानूनी दर्जा नहीं दे रखा है। इसे वैधानिक रूप से गठित किया जाए। ताकि मूल रूप से आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग की ईमानदारी से पहचान हो सके और जरूरतमंदों को ही आरक्षण का फायदा मिल सके। 
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शीतकालीन सत्र में दिया जाएगा ओबीसी कमीशन को वैधानिक दर्जा 

Rajasthan High Court dissolved OBC Commission
याचिका पर हाईकोर्ट ने चार माह में स्थायी ओबीसी कमीशन गठित करने का फैसला सुनाया। इस आदेश के बावजूद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने स्थायी कमीशन का गठन नहीं किया, उलटे एक आदेश से अस्थायी कमीशन बना दिया। कोर्ट के आदेश की अवमानना पर आरक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर लड़ाई लड़ रहे समता आंदोलन की ओर से अवमानना याचिका लगाई गई। 

कोर्ट ने फिर से आठ सप्ताह का समय दिया और स्थायी ओबीसी आयोग गठित करने को कहा। लेकिन आदेश की पालना नहीं की गई और ना ही जवाब पेश किया गया। हाईकोर्ट ने मामले में जवाब नहीं देने पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के एसीएस अशोक जैन को दो दिन पहले ही कड़ी फटकार लगाई थी। 

जैन बुधवार को अपने एक माह के करीब 1.96 लाख रुपये के वेतन को दान करने की रसीद लेकर पहुंचे थे। यह राशि उन्होंने आदिनाथ फाउंडेशन को दी है। रसीद देखने के बाद कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए ओबीसी कमीशन को भंग कर दिया। ओबीसी कमीशन में अध्यक्ष और सदस्य सचिव समेत पांच सदस्य हैं। इन पर हर महीने सात से आठ लाख रुपये वेतन के खर्च हो रहे हैं।
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