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खुशियां तो हैं मगर आधी-अधूरी

टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 01 Dec 2014 12:22 PM IST
lack of basic facilities in uttar pradesh
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देश का दिल कहा जाता है यूपी। संभावनाओं से भरा-पूरा। मगर, सर्वाधिक आबादी वाले इस प्रदेश के लोगों की दिक्कतें भी कम नहीं हैं। वे सड़क, बिजली, पानी, रोजगार, महिला सुरक्षा, शिक्षा, सेहत, प्रदूषण और कूड़ों के ढेर जैसे मुद्दों से जूझ रहे हैं।
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हमने तय किया कि लोगों के पास जाकर उनकी राय ली जाए। हमने 11 मुद्दे चुने और 11 शहरों - लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, गोरखपुर, बरेली, मेरठ, आगरा, मुरादाबाद, अलीगढ़ और झांसी को चुना, ताकि पूरे प्रदेश की तस्वीर उभर सके।

अमर उजाला के लिए हंसा रिसर्च ने जो सर्वे किया, उससे यह सामने आया कि लखनऊ को छोड़कर बाकी शहरों में लोग बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहुत खुश नहीं हैं।

इस सर्वे में उभरी एक दिलचस्प तस्वीर, लेकिन यह नीति नियंताओं के लिए सबक की तरह है। सेहत का मामला हो या शिक्षा का, लोगों का भरोसा सरकार से अधिक निजी क्षेत्रों पर बढ़ा है! छोटे (पांच से दस लाख तक की आबादी वाले) और बड़े (दस से चालीस लाख तक की आबादी वाले) शहरों के युवा अपने शहर में ही रहना चाहते हैं। यानी यह सरकारी के साथ ही निजी प्रतिष्ठानों के लिए यूपी में रोजगार के नए अवसर पैदा करने का संकेत भी है।

सड़क, बिजली, पानी ऐसे मुद्दे हैं, जो सरकार तक बदल देते हैं। बिजली के मामले में तो पूरे सूबे का हाल बुरा है। मेरठ में सर्वाधिक 64 फीसदी लोगों ने माना कि घरों में इनवर्टर के बिना उनका काम नहीं चलता। अलबत्ता पानी और सड़क के मामले में बड़े शहर कुछ बेहतर नजर आते हैं। लेकिन हकीकत यह भी है कि आगरा में एक चौथाई लोग पानी खरीदने को मजबूर हैं, तो गोरखपुर में सर्वाधिक 34 फीसदी लोग पानी की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं हैं।

सर्वे में शामिल 50 फीसदी लोग बदहाल सड़कों को दुर्घटनाओं का कारण मानते हैं। टाटा स्ट्रेटजिक ग्रुप महिलाओं की सुरक्षा को महिला सुरक्षा सूचकांक (एफएसआई) से आंकता है और इसके मुताबिक महिला सुरक्षा के मामले में यूपी देश का सबसे बदतर राज्य है!

सर्वे बताता है कि 50 फीसदी महिलाओं को अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस पर भरोसा नहीं है। 39 फीसदी महिलाएं दिन में भी बाहर निकलते वक्त खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। रात में निकलने पर यह आंकड़ा 71 फीसदी तक जा पहुंचता है। सर्वे में इन मुद्दों को अलग-अलग नजरिये से देखने की कोशिश की गई, ताकि विभिन्न पहलुओं को लेकर लोगों की राय सामने आ सके।

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