खामियां तलाशते रहें, हमें परवाह नहीं
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वासुदेव यादव
अध्यक्ष व निदेशक, माध्यमिक शिक्षा
रिकार्ड रिजल्ट देने के बावजूद उसमें खामियां तलाशना सिर्फ नकारात्मक सोच को दिखाता है। लेकिन, हमें इसकी कोई परवाह नहीं है। 65 लाख से ज्यादा बच्चों का इम्तिहान कराना कोई हंसी-खेल नहीं है।
अच्छा रिजल्ट बेहतर सिस्टम का नतीजा है। अब हमारा प्रयास है कि अच्छे अंकों से पास होने के साथ बच्चे दूसरे क्षेत्रों में भी नाम कमाएं। इसके लिए हम अब बच्चों के व्यक्तित्व के विकास भी योजना बना रहे हैं।
वित्त विहीन स्कूलों का रिजल्ट एडेड और राजकीय कॉलेजों की तुलना में बेहतर आने की बात बेमानी है। क्योंकि एक से डेढ़ प्रतिशत वृद्धि का अंतर न के बराबर है। परीक्षा में राजकीय कालेजों से एक लाख परीक्षार्थी बैठे और वित्त विहीन से 26 लाख से ज्यादा छात्र थे।
राजकीय कॉलेजों का रिजल्ट 85 प्रतिशत रहा और वित्त विहीन का 86 प्रतिशत से कुछ ज्यादा। यह अंतर मामूली है। इस तरह के मुद्दे सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए उठाए जाते हैं।
बच्चों के हर पहलू को उभारने पर रहेगा जोर रिजल्ट सुधारने के बाद अब हम लोग बच्चों के दूसरे पहलू जैसे सांस्कृतिक, सांस्कारिक, खेल को उभारने की कोशिश करेंगे। ताकि हमारे यहां के बच्चे हर क्षेत्र में सफल हों।
मैंने जब निदेशक का कार्यभार संभाला था तो विभाग की छवि को लेकर खासी बातें हो रही थीं। लेकिन मैंने इसे चुनौती की तरह लिया। स्कूलों का माहौल बेहतर बनाने के साथ ही मूल्यांकन पद्धति को स्टेप बाई स्टेप बेहतर बनाया।
अलग-अलग चरणों में गृह परीक्षा कराकर छात्रों की क्षमता बेहतर ही। प्रश्नपत्रों के पैटर्न और अंक देने के नजरिए में बदलाव किए। बच्चों की कमियों को दूर किया गया ताकि उन्हें परीक्षा में किसी तरह की परेशानी न हो।
अभिभावकों को फीड बैक देने के लिए प्रोत्साहित किया गया। भले ही लोग यूपी बोर्ड पर उंगलियां उठाएं लेकिन आज भी हर क्षेत्र में यूपी बोर्ड का बोलबाला है।