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कोचिंग नहीं, मेहनत से एचएएस बने रोहित ठाकुर

Tue, 25 Nov 2014 11:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सरकाघाट (मंडी)
ब्यूरो/अमर उजाला, सरकाघाट (मंडी) Updated Tue, 25 Nov 2014 11:12 AM IST
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HAS rohit thakur interview.

मन में कुछ करने का जज्बा और मेहनत करने का इरादा हो तो सफलता की राह में कोई मुश्किल नहीं आती। अंग्रेजी प्रवक्ता की नौकरी छोड़कर एचएएस बने एसडीएम सरकाघाट रोहित राठौर ने भी मेहनत और जज्बे से प्रशासनिक अधिकारी बनने में सफलता हासिल की है।

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33 वर्षीय रोहित राठौर 2008 बैच के एचएएस अधिकारी हैं। बिलासपुर के रहने वाले युवा अधिकारी रोहित जमा दो और स्नातक में प्रथम रहे। उन्होंने जमा दो की पढ़ाई डीएवी स्कूल बरमाणा और स्नातक की शिक्षा बिलासपुर कॉलेज से ग्रहण की। पिता सैन्य अधिकारी और माता शिक्षिका हैं।
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पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से अंग्रेजी में एमए करने के बाद रोहित पंजाब के दसूहा में कॉलेज प्रवक्ता के रूप में पढ़ाने लगे। उनके मन में बचपन से प्रशासनिक अधिकारी बनने का जुनून था। कॉलेज प्रवक्ता की नौकरी छोड़कर घर आ गए और बिलासपुर कॉलेज के पुस्तकालय में अध्ययन करते रहे। रोहित राठौर प्रतिदिन आठ घंटे की पढ़ाई करते थे। बिना किसी कोचिंग की एचएएस की परीक्षा पास कर प्रशासनिक अधिकारी बने।
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गरीबों की सेवा करना ही मकसद
रोहित राठौर कहते हैं कि वह बचपन से निर्धन और असहाय लोगों की सहायता करना चाहते थे। इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी के रूप में वह अधिक सफल हो सकते थे। उन्हें आईटी क्षेत्र में काफी ज्ञान है।

भारत निर्वाचन आयोग की वोटर आईकार्ड प्रणाली का साफ्टवेयर तैयार करने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। चंबा में बतौर एसडीएम उन्हें आपदा प्रबंधन में बेहतर कार्य करने पर सरकार ने सम्मानित किया है।

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