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आर्मी की नौकरी छोड़कर जुट गए एचएएस की तैयारी में

Sat, 29 Nov 2014 10:51 AM IST
रोशन ठाकुर /अमर उजाला, कुल्लू
रोशन ठाकुर /अमर उजाला, कुल्लू Updated Sat, 29 Nov 2014 10:51 AM IST
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HAS officer prashant sarcaik SDM kullu

अगर मन में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो कठिन से कठिन राह भी आसान हो जाती है। फिर चाहे रास्ते में कितनी भी बाधाएं क्यों न आएं, बुलंद हौसले के आगे उन्हें घुटने टेकने ही पड़ते हैं। जी हां, कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया है एचएएस अफसर प्रशांत सरकैक ने।

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प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए उन्होंने जी-तोड़ मेहनत की। वह उपमंडल बंजार में बतौर एसडीएम तैनात हैं। लोगों का काम समय पर हो जाए तथा एक काम के लिए उन्हें बार-बार चक्कर न काटने पड़ें, कुछ ऐसा ही काम करने का तरीका 35 वर्षीय एचएएस अधिकारी प्रशांत सरकैक का है।
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पहले ही प्रयास में एचएएस परीक्षा पास करने के बाद उनकी पहली ज्वाइनिंग 2011 में पालमपुर में बीडीओ के पद पर हुई। इसके बाद पदोन्नत होकर बतौर एसडीएम जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के जिला मुख्यालय केलांग गए। शिमला जिले के कोटगढ़ गांव में एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रशांत सरकैक की पढ़ाई ऑकलैंड हाउस और डीएवी स्कूल शिमला में हुई।
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से ग्रेजुएशन के बाद वह 2003 से 2009 तक भारतीय सेना में रहे। बाद में आर्मी की नौकरी छोड़ एचएएस की तैयारी शुरू की। वर्ष 2010 में एचएएस परीक्षा पास की। इसके लिए उन्हें दिन में 12 से 14 घंटे की पढ़ाई करनी पड़ी।


पढ़ाई के साथ जुनून होना जरूरी

प्रशांत सरकैक प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए हफ्ते में एक ब्रेक लेते थे। प्रशांत कहते हैं कि मंजिल पाने के लिए पढ़ाई के साथ जनून का होना आवश्यक है। युवाओं को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी बढ-चढ़कर भाग लेना चाहिए। लोगों को अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

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