पढ़िए, इनका एचएएस बनने का सफर
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कड़ी मेहनत ही कामयाबी का मूल मंत्र है। जीवन में सफलता-असफलता की परवाह किए बगैर आगे बढ़ने वाले लोगों से एनर्जी मिलती है। यह कहना है एचएएस अधिकारी अंकुश शर्मा का। उपमंडल नादौन के तहत बलडूहक निवासी अंकुश ने इंजीनियरिंग क्षेत्र को छोड़कर प्रशासनिक सेवा को चुना। 37 वर्षीय अंकुश शर्मा ने डीएवी कॉलेज कांगड़ा से जमा पास की। इसके बाद एनआईआईटी हमीरपुर से सिविल इंजीनियरिंग की।
वर्ष 2006 में हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की। सबसे पहले खंड विकास अधिकारी सुंदरनगर के पद पर तैनात हुए। इसके बाद बीडीओ पंचरुखी, बीडीओ नालागढ़, बीडीओ नेरचौक, बीडीओ सरकाघाट और बीडीओ घुमारवीं के पद पर सेवाएं दी। इसके बाद अंकुश ने ग्रामीण विकास अभिकरण कुल्लू में प्रोजेक्ट अफसर के पद पर सेवाएं दीं। वर्तमान में हमीरपुर में ग्रामीण विकास अभिकरण में उपनिदेशक एवं परियोजना अधिकारी के पद पर हैं।
जनता से स्थापित किया सीधा संवाद
उन्होंने सभी ब्लॉकों में विकास खंड अधिकारी के पद पर सेवाएं देते हुए जनता और पंचायत प्रतिनिधियों से सीधा संवाद कर हर समस्या का हल निकाला। मनरेगा, निर्मल भारत अभियान समेत वाटरशेड प्रोजेक्ट को धरातल पर कार्यान्वित करने के प्रयास किए। कुल्लू में परियोजना अधिकारी रहते निरमंड और आनी को केंद्र के प्रोजेक्ट में पिछड़े ब्लॉक में शामिल करने में भूमिका निभाई है।
हार-जीत की परवाह छोड़ आगे बढ़ें
अंकुश ने कहा कि जीवन में हार और जीत होती रहती है। युवाओं को इसकी परवाह किए बिना आगे बढ़ते रहना चाहिए। युवाओं के लिए उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों के अलावा हर रोज थोड़ा समय प्रतियोगी पुस्तकों और वर्तमान घटनाक्रम की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जीवन में लक्ष्य को सामने रखकर मेहनत करना जरूरी है।