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पीजीआई को बना रहे पेशेंट फ्रेंडली

Sun, 15 Sep 2013 12:29 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Sun, 15 Sep 2013 12:29 PM IST
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director r k sharma talks on pgi

आर के शर्मा, निदेशक एसजीपीजीआई

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बड़ी से बड़ी बीमारी का अच्छे से अच्छा इलाज पीजीआई में उपलब्ध कराना मेरा लक्ष्य है। मैं चाहता हूं कि मरीज यहां से निराश न लौटे। इसलिए भविष्य के पीजीआई की हर योजना मरीजों की सुविधा को ध्यान में रख कर की जा रही है।

अगले तीन माह के अंदर यहां लिवर ट्रांसप्लांट फिर से शुरू हो जाएगा। पांच साल पहले यहां आखिरी ट्रांसप्लांट हुआ था। लिवर ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी संसाधन, फैकल्टी, आईसीयू, ओटी व पोस्ट ऑपरेटिव मॉनीटरिंग सिस्टम की व्यवस्था की जा रही है।
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कोशिश है विश्वास पर खरा उतरने की
बीते कुछ सालों में पीजीआई पर ओपीडी का लोड बहुत बढ़ गया है। यूपी के अलावा राजस्थान, नार्थ-ईस्ट, मध्यप्रदेश, बिहार यहां तक कि नेपाल से भी मरीज आ रहे हैं। लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं। हमारा प्रयास है कि हम उस पर ज्यादा से ज्यादा खरा उतरें।
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ओपीडी की नई बिल्डिंग बनने के बाद पुरानी मेन बिल्डिंग में काफी स्पेस हो जाएगा। यहां हम इमरजेंसी मेडिसिन डिपार्टमेंट और इमरजेंसी रिसीविंग स्टेशन की शुरुआत करेंगे। इस इमरजेंसी विभाग में 150 बेड उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। फिलहाल यहां 35 बेड हैं। अगले छह माह के अंदर ट्रॉमा सेंटर भी शुरू हो जाएगा।

यहां भी 200 से ज्यादा बेड होंगे। औपचारिक तौर पर ऑप्थेमोलॉजी डिपार्टमेंट शुरू हो गया है। नई ओपीडी बिल्डिंग में इसके लिए एक पूरा फ्लोर होगा। अभी तक यह न्यूरो सर्जरी विभाग से ही जुड़ा था। पेशेंट केयर इम्प्रूव करने के लिए लगातार ट्रेनिंग प्रोग्राम कराए जा रहे हैं।

इंटीग्रेटेड डवलपमेंट कराया जाएगा
आने वाले समय में पीजीआई में जो भी निर्माण कराए जाएंगे वह मरीजों और तीमारदारों की सुविधा को ध्यान में रखकर होंगे। इसका प्लान तैयार कर लिया गया है। सभी बिल्डिंग इंटीग्रेटेड (एक दूसरे से जुड़ी) होंगी। हर इमारत में पार्किंग की व्यवस्था होगी।

इसके अलावा तीमारदारों के रुकने के लिए भी इंतजाम किए जाएंगे। पीजीआई परिसर में सात से आठ मंजिला इमारतें बन सकती हैं। इसलिए हर इमारत की नींव आठ मंजिलों को ध्यान में रखकर डाली जाएगी ताकि भविष्य में वर्टिकल विस्तार की संभावनाएं बनी रहें।

रिसर्च ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान
दिसंबर में पीजीआई का स्थापना दिवस है। यह संस्थान 25 वर्ष का हो जाएगा। हम पूरे एक साल तक अपनी उपलब्धियों के बारे में बताएंगे। एक नामी साइंस जर्नल ने देश के टॉप टेन में मेडिकल संस्थानों में पीजीआई को पांचवें नंबर पर रखा है।


हमारे यहां की रिसर्च और कोर्स ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। हाल ही में केंद्र सरकार ने रिसर्च प्रोग्राम के लिए आठ इंस्टीट्यूट को फंडिंग की अनुमति दी है। उनमें से एक पीजीआई भी है।

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