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ब्यूरोक्रेसी ईमानदार हो तो विकास संभव
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 04 Oct 2013 06:04 PM IST
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जिन मकसदों से उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सैकडों ने अपनी जान गवाई वह मकसद राज्य बनने के 13 साल बाद भी अधूरे हैं। यह कहना है उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती का।
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विकास के नाम पर केवल सड़कों का जाल
प्रदीप कुकरेती ने बातचीत में बताया कि राज्य बनने के बाद से उत्तराखंड को कोई ऐसी उपलब्धि नहीं मिली जो याद की जा सके। विकास के नाम पर केवल भवन और सड़कों का जाल बनाना काफी नहीं है। बेराजगारी के चलते पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहा पलायन अब भी जारी है। प्रदीप के मुताबिक राज्य आंदोलन के समय जो मकसद तय किए गए थे उससेजनप्रतिनिधि और ब्यूराक्रेट्स उनसे भटक गए हैं। पर्वतीय विकास के नाम पर केवल जंगल काटे जा रहे हैं।
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प्रदीप के मुताबिक राज्य को चलाने वाले ब्यूरोक्रेट्स को राज्य के बारे में ही जानकारी नहीं है। केवल कुछ ही जो राज्य के बारे में गहराई से जानते हैं। अगर ब्यूरोक्रेसी ईमानदार हो जाए तो राज्य का विकास संभव है।
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देहरादून के लोगों में इंसानियत जिंदा
राज्य में केवल भ्रष्टाचार, नेतागिरी में ही विकास हुआ है। उत्तराखंड को एजूकेशन हब कहा जाता है लेकिन आज भी कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पुरानी पद्घति से शिक्षा दी जा रही है। प्रदीप कुकरेती जन्म से ही देहरादून में हैं। इन्हें देहरादून वातावरण बेहद पसंद है। उनका कहना है कि अभी भी देहरादून के लोगों में इंसानियत जिंदा है। लेकिन बाहरी लोगों के हस्तक्षेप से अब शहर का माहौल बिगड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में यहां शिक्षा के स्तर में गिरावट देखने को मिली है।
देहरादून के लोग पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं। लेकिन पश्चिमी देशों के विकास और उन्नति का अनुसरण करना इन्हें पसंद नहीं है। अगर कपडों और जीवन शैली की जगह इन देशों की सफलता का अनुसरण किया जाए तो ऊचाईयों पर पहुंचा जा सकता है।